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Karnataka Power Crisis: कर्नाटक में कलह! CM सिद्धरमैया का ब्रेकफास्ट न्योता से हाईकमान की बैठक तक, ताजा अपडेट

Karnataka Power Crisis: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बने दो से ज्यादा साल हो चुके हैं। मई 2023 में जब पार्टी सत्ता में लौटी थी, तब सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उनका डिप्टी बनाया गया था। उस वक्त से ही सत्ता के शीर्ष पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच खींचतान की चर्चाएँ लगातार होती रही हैं।

अब, नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा फिर तेजी से उठने लगा है। इस बीच, कांग्रेस हाईकमान ने 30 नवंबर को एक अहम स्ट्रैटेजी ग्रुप मीटिंग बुलाई है, जिसमें सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस बैठकों में कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति पर गहन चर्चा होगी।

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उधर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार जल्द ही एक ब्रेकफास्ट मीटिंग करने वाले हैं। यह निमंत्रण स्वयं सिद्धारमैया ने दिया है, हाईकमान के निर्देश के बाद कि दोनों नेता अपने मतभेद दूर करने की कोशिश करें।

कर्नाटक नेतृत्व संकट: समझिए पूरे मामले की 5 बड़ी बातें

1. हाईकमान की बड़ी बैठक 30 नवंबर को

कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कर्नाटक संकट पर दिल्ली में बैठक करने वाला है। यह बैठक 30 नवंबर की शाम को होगी, जिसमें सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल होंगे। रिपोर्टस के मुताबिक यदि हाईकमान बुलाएगा तो सिद्धारमैया तुरंत दिल्ली जाएंगे। शिवकुमार भी 1 दिसंबर को दिल्ली जाने की तैयारी में हैं।

2. क्या था 'रोटेशनल CM डील'?

2023 में कांग्रेस ने शानदार जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर दो नाम उभरकर आए-सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार। लंबी चर्चाओं के बाद सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया और शिवकुमार को डिप्टी सीएम का पद दिया गया। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा रही कि दोनों नेताओं के बीच पर्दे के पीछे एक ढाई-ढाई साल का सत्ता साझेदारी समझौता हुआ था।अब जब सरकार का आधा कार्यकाल बीत चुका है, तो सवाल फिर उठ रहे हैं-क्या अब मुख्यमंत्री की कुर्सी शिवकुमार को मिलेगी?

3. शिवकुमार के पोस्ट ने मचाई हलचल

हाल की अटकलों पर डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर हाईकमान से कोई बातचीत नहीं की है। उन्होंने कहा- मैं किसी भी चीज़ की जल्दबाजी में नहीं हूं। सभी फैसले दिल्ली या बेंगलुरु में होंगे, न कि मीडिया की अटकलों में। लेकिन, इसी बीच उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी हलचल बढ़ा दी। उन्होंने लिखा-वर्ड पावर इज वर्ल्ड पावर। इन बयानों को राजनीतिक संकेत माना गया कि शिवकुमार अपने "वचन" की याद दिला रहे हैं।

4. सिद्धारमैया का पलटवार-"मैं पूरा कार्यकाल पूरा करूंगा"

शिवकुमार के संकेतों के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी खुलकर सामने आए। उन्होंने कहा-"लोगों ने हमें पांच साल का जनादेश दिया है। मैं अपना पूरा कार्यकाल पूरा करूंगा।" हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो भी हाईकमान तय करेगा, मैं वही मानूंगा। साथ ही उन्होंने शिवकुमार को नाश्ते के लिए आमंत्रित भी किया, यह दिखाने के लिए कि दोनों नेता बातचीत के लिए तैयार हैं।

5. क्या शिवकुमार कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ेंगे?

सिद्धारमैया का आधा कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा होते ही शिवकुमार समर्थक सक्रिय हो गए और "रोटेशनल फॉर्मूला" की याद दिलाने लगे। एक दिन पहले शिवकुमार ने संकेत दिए कि वे कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा- "मैं यह पद हमेशा नहीं रख सकता। किसी और को मौका मिलना चाहिए।" राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान भी नेतृत्व परिवर्तन की बड़ी तस्वीर का हिस्सा हो सकता है।

क्या बदलेगा CM? अभी तस्वीर साफ नहीं

कांग्रेस के भीतर इस स्थिति को लेकर अभी बहुत सस्पेंस है। शिवकुमार के समर्थक सत्ता परिवर्तन का समय मान रहे हैं वहीं सिद्धारमैया इस बात पर अड़ने लगे हैं कि वे पूरा कार्यकाल पूरा करना चाहते हैं। हाईकमान दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है अगले कुछ दिनों में कांग्रेस का फैसला कर्नाटक की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है।

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