Karnataka Politics: क्यों शांत पड़ गए CM सिद्दारमैया, क्या दिल्ली दरबार में शिवकुमार पड़ने लगे हैं भारी?
Karnataka Politics: कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के अंदर सत्ता बंटवारे को लेकर जारी घमासान खुलकर सामने आने लगा है। लेकिन, इसमें सबसे बड़ी बात ये है कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस विवाद को लेकर फिलहाल पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। दरअसल, नेतृत्व परिवर्तन को लेकर राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और सहकारी मंत्री केएन राजन्ना के बीच इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
दरअसल,मई 2023 में जब से कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनी है, इसको लेकर चर्चा है कि सत्ता बंटवारे को लेकर एक 'गुप्त समझौता' हुआ था। इस कथित समझौते के अनुसार, सिद्धारमैया को सरकार के पहले ढाई वर्षों तक मुख्यमंत्री पद पर रहना था और उसके बाद डीके शिवकुमार को यह जिम्मेदारी सौंपी जानी थी। तथ्य यह है कि इसी विवाद की वजह से तब भी सरकार गठन में लंबा समय निकल गया था।

Karnataka Politics: सिद्दारमैया खेमे को क्यों करनी पड़ रही उनके लिए लॉबिंग?
आज की तारीख में कांग्रेस के कई विधायक और मंत्री सिद्धारमैया के समर्थन में खड़े हैं और वे चाहते हैं कि वे ही पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करें। दूसरी ओर,कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते शिवकुमार ने पार्टी के अंदर अपने विरोधियों को हड़काया है कि वे इस मुद्दे पर अनावश्यक विवाद न पैदा करें,जिससे पार्टी की छवि को नुकसान हो।
Karnataka Politics: सीएम सिद्दारमैया की चुप्पी का राज?
दोनों तरफ की इस बयानबाजी के बीच मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से इस विवाद के बारे में पूछा गया,तो उन्होंने जवाब देने से बचते हुए कहा,'मैं इस विवाद पर कुछ नहीं कहूंगा। राजन्ना और शिवकुमार अपनी-अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं।'
जब उनसे पूछा गया कि क्या वास्तव में कोई सत्ता की अदला-बदली जैसा को समझौता हुआ था,तो वे बोले,'मैं कितनी बार कह चुका हूं कि अंतिम निर्णय हाईकमान ही लेता है। हाईकमान जो भी फैसला करेगा,वह सभी पर लागू होगा।'
Karnataka Politics: कर्नाटक के मंत्री और उपमुख्यमंत्री में क्यों ठनी ?
दरअसल, सिद्दारमैया के करीबी माने जाने वाले सहकारी मंत्री केएन राजन्ना ने खुलकर शिवकुमार का विरोध किया है। उन्होंने शिवकुमार पर आरोप लगाया कि वे कांग्रेस और पार्टी हाईकमान के नाम का "दुरुपयोग" कर रहे हैं।
राजन्ना का बयान शिवकुमार की उस टिप्पणी के जवाब में आया,जिसमें उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से राजन्ना और उन नेताओं पर निशाना साधा था,जो मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाते हैं।
वहीं,शिवकुमार की दलील है कि कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर किसी भी तरह की अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पार्टी की एकता पर असर पड़ सकता है। वैसे उन्होंने अपनी ओर से सार्वजनिक रूप से यही संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस पार्टी में फिलहाल सिद्धारमैया ही निर्विवाद नेता हैं; और उनकी स्थिति को कमजोर करने की कोई जरूरत नहीं है।
Karnataka Politics: क्या हाई कमान के इशारे पर शांत पड़ गए सिद्दारमैया?
कांग्रेस की कमान यूं तो अभी पार्टी अध्यक्ष होने के नाते मल्लिकार्जुन खड़गे के पास है और वे खुद भी कर्नाटक से ही आते हैं। लेकिन, परोक्ष रूप से कांग्रेस अभी राहुल गांधी के नियंत्रण में है और उनकी ओर से पार्टी के किसी नेता ने कर्नाटक कांग्रेस में जारी इस विवाद पर कुछ भी नहीं कहा है। जबकि, यह तय है कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए आलाकमान का आशीर्वाद ही प्राथमिक शर्त है।
ऐसे में शिवकुमार के पार्टी के वरिष्ठ मंत्री के खिलाफ अपनाए गए सख्त तेवर और सिद्दारमैया की चुप्पी से सवाल उठता है कि क्या दिल्ली दरबार की ओर से इशारों संकेत देने की कोशिश हो रही है?(इनपुट-पीटीआई)












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