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MUDA scam: क्या सिद्दारमैया के खिलाफ कसेगा ED का शिकंजा? मनी लॉन्ड्रिंग के मामले का मिल रहा है संकेत

MUDA scam: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को मैसूर में आवंटित 14 प्लॉटों से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग योजना का पर्दाफाश किया है। मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) साइट आवंटन मामले में ईडी की जांच के अनुसार, इन प्लॉटों को कथित तौर पर अवैध रूप से आवंटित किया गया था। प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) में इस ऑपरेशन का विवरण दिया गया है।

धन शोधन (Money laundering) निवारण अधिनियम, 2002 की जांच शुरू होने के बाद पार्वती ने प्लॉट वापस कर दिए थे। ईडी ने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि MUDA अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा थी। नकदी,संपत्तियों और वाहनों के बदले में अवैध आवंटन किए गए थे।

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MUDA scam: शुरू में अयोग्य लोगों को मुखौटे के तौर पर दिए गए प्लॉट

ईडी ने खुलासा किया कि ये प्लॉट शुरू में उन्हें दिए जो इसके पात्र नहीं थे और मुखौटे या डमी के रूप में काम कर रहे थे। बाद में उन्हें MUDA द्वारा अधिग्रहित भूमि के लिए वैध मुआवजे के हकदार रूप में दिखाया गया। इसका उद्देश्य उनकी अवैध धंधे को छिपाना और PMLA, 2002 के तहत कानूनी कार्रवाई से बचना था।

जांच से पता चला कि पार्वती को ये प्लॉट केसारे गांव में उनकी तीन एकड़ और 16 गुंटा कृषि भूमि के बदले में मिले थे। उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने उन्हें यह जमीन उपहार में दी थी। हालांकि, सैटेलाइट इमेज में 2001 से 2003 के बीच जमीन पर हुए विकास कार्यों को दिखाने पर विसंगतियां सामने आईं।

MUDA scam: जमीन अधिग्रहण से लेकर उसके आवंटन तक में बड़ी गड़बड़ी पाई गई

स्वामी ने दावा किया था कि 2003 में उनकी खरीद से पहले कोई विकास नहीं हुआ था, लेकिन वे सैटेलाइट साक्ष्य की व्याख्या नहीं कर सके। ईडी ने उल्लेख किया कि देवराजू को अंतिम अधिग्रहण अधिसूचना में भूमि मालिक के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया था।

ईडी को आधिकारिक अभिलेखों से छेड़छाड़, अनुचित प्रभाव, हस्ताक्षर जालसाजी और साक्ष्यों में हेराफेरी के सबूत मिले हैं। मूल रूप से MUDA द्वारा 3,24,700 रुपए में अधिग्रहित की गई इस भूमि को गलत सूचना के आधार पर अवैध रूप से गैर-अधिसूचित किया गया और गलत रिपोर्ट और MUDA से 'नौ ऑब्जेक्शन' प्राप्त करने के साथ आवासीय भूमि में बदल दिया गया।

MUDA scam:राजनीतिक प्रभाव के माध्यम से मुआवजा

राजनीतिक प्रभाव के कारण पॉश इलाके में साइटों के माध्यम से लगभग 56 करोड़ रुपये का अवैध मुआवजा प्राप्त हुआ। इन साइटों को MUDA से मुआवजे के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। पीएमएलए के तहत जांच के बाद पार्वती ने 1 अक्टूबर, 2024 को उन्हें वापस कर दिया था।

ईडी के निष्कर्षों से पता चलता है कि सिद्धारमैया, पार्वती, स्वामी, देवराजू, MUDA अधिकारियों, रियल एस्टेट कारोबारियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की संलिप्तता में मनी लॉन्ड्रिंग की कोशिश की गई है। जांच के अनुसार लगभग 1,095 MUDA प्लॉट अवैध रूप से आवंटित किए गए हैं। ईडी द्वारा जारी पीएओ (Provisional Attachment Order) के संबंध में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया या उनके परिवार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। (इनपुट-पीटीआई)

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