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Karnataka Political Crisis: सिद्धारमैया vs शिवकुमार—कर्नाटक में क्या पलटेगी सत्ता? 10 MLA पहुंचे दिल्ली

Karnataka Political Crisis: कर्नाटक में राजनीति फिर गरमा गई है। राज्य सरकार के 2।5 साल पूरे होते ही डीके शिवकुमार के करीबी दर्जनों विधायक और एक मंत्री अचानक दिल्ली की ओर रुख कर गए हैं। उनका दावा यह है कि पार्टी के भीतर 2023 में जो अनौपचारिक समझौता हुआ था उसे लागू कराना उनका मकसद है। इस कदम ने सीएम सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच चल रही अटकलों को फिर हवा दे दी है।

दिल्ली में कौन क्या करने आया है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक एक मंत्री और करीब 10 से अधिक विधायक अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हैं और वे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। इन विधायकों का कहना बताया जा रहा है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से 2023 में हुई बात का सम्मान करने का अनुरोध करना है। इस बीच कुछ और विधायकों के भी शुक्रवार (21 नवंबर) को दिल्ली आने की बात कही जा रही है, जिससे सियासी घमासान और बढ़ा है।

Karnataka Political Crisis

🟡 दिल्ली दौरा सिर्फ सरकारी काम के लिए, चेन्नूरायस्वामी ने CM सिद्धारमैया को दी सफाई

कर्नाटक राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंत्री चेलुवरायस्वामी को फोन कर उनके अचानक दिल्ली पहुंचने पर बात की। राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लग रही थीं कि उनका यह दौरा किसी राजनीतिक संदेश का हिस्सा हो सकता है।

लेकिन चेलुवरायस्वामी ने साफ कर दिया कि वे किसी भी राजनीतिक वजह से नहीं आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह दौरा डीके शिवकुमार के कहने पर भी नहीं किया गया है। मंत्री का कहना है कि वे दिल्ली केवल सरकारी काम से आए हैं और इसे किसी राजनीतिक गतिविधि से जोड़कर न देखा जाए।

🟡 सिद्धारमैया का रुख और दौरे रद्द होना

तनाव बढ़ने के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने मैसूरु-चामराजनगर के दौरे को अचानक रद्द कर दिया और 20 नवंबर की सुबह बेंगलुरु लौट आए। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि उनका पद मजबूत है और वे पूरे पांच साल तक काम करने का इरादा रखते हैं। सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक अनुभव का जिक्र कर के यह संदेश भी दिया कि वे किसी तरह की 'क्रांति' को स्थान नहीं देंगे।

🟡 डीके शिवकुमार ने पूरे मामले पर क्या कहा?

डीके शिवकुमार ने विधायकों के दिल्ली जाने पर कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और वे अस्वस्थ होने के चलते घर पर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने उन्हें जिम्मेदारी दी है और वे सब मिलकर काम करेंगे।डीके शिवकुमार की चुप्पी और आधिकारिक बयान दोनों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

🟡 2.5 साल का समझौता क्यों फिर छिड़ गया है?

कर्नाटक संकट की जड़ में बताया जा रहा है वह अनौपचारिक समझौता जिसके मुताबिक सिद्धारमैया 2.5 साल के बाद पद छोड़कर डीके शिवकुमार को कमान सौंपने वाले थे। हालांकि इस अटकल का आधिकारिक तौर पर कभी खुलकर पुष्टि नहीं हुई, पर 2023 से यह चर्चा चल रही थी। जब सरकार ने आधा टर्म पूरा कर लिया, तो वही चर्चा फिर जिंदगी में लौट आई। दोनों तरफ से मिले-जुले संकेत और विधायकों की आवाजाही ने उस अफवाह को फिर जोर दे दिया है।

🟡 पार्टी हाई कमान का फैसला ही अंतिम होगा

अध्यक्ष तक मिलने पहुंचे विधायकों की पहल के बावजूद प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता यह कहते दिखे कि अंततः फैसला कांग्रेस हाई कमान ही करेगा। कुछ मंत्रियों ने दिल्ली यात्रा को मामूली घटना करार दिया और कहा कि अंत में जो भी होगा वह हाई कमान तय करेगा। इस बीच पार्टी के कुछ नेताओं ने बैठकें कर के शांति और एकता की अपील की है ताकि जनता के काम प्रभावित न हों।

🟡 क्या बनेगा अगला बड़ा कदम

अब सवाल यह है कि दिल्ली में बैठी फेहरिस्त क्या मांग सफल कर पाएगी? क्या पार्टी हाई कमान अंदरूनी समझौते को मानते हुए कोई बदलाव करेगी या दोनों धड़ों को समझौते के लिए बैठाने का प्रयास करेगी? फिलहाल स्थिति फिलहाल अस्थिर दिखती है और अगले कुछ दिनों की घटनाएं यह तय करेंगी कि कर्नाटक में सत्ता के झोटे बदलेंगे या नहीं। खड़े राजनीतिक दबाव के बावजूद कई नेताओं का मानना है कि निर्णय अंतिम रूप से AICC के हाथ में है और किसी भी बड़े फैसले के लिए पार्टी की रणनीति ही निर्णायक रहेगी।

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