karnataka: बांदीपुर टाइगर रिजर्व में पीएम मोदी को नहीं दिखा था एक भी बाघ, क्या है वजह?
Prime Minister Narendra Modi को बांदीपुर टाइगर रिजर्व में एक भी बाघ नहीं दिखा। बार-बार सिक्योरिटी ड्रिल की वजह से बाघों ने जगह बदल ली थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व (बीटीआर) के दौरे पर गए थे, वहां पर उन्होंने 22 किलोमीटर की सफारी की, लेकिन कोई बाघ या बड़ी बिल्ली नहीं दिखी। अब ये मामला गरमा गया है। साथ ही अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे।
The New Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक पीएम सुबह 7.15 बजे से 9.30 बजे तक बीटीआर में थे। जब उन्हें बाघ नहीं दिखा, तो 29 वर्षीय ड्राइवर मधुसूदन को दोषी ठहराया जाने लगा। कुछ बीजेपी नेताओं ने ड्राइवर और वन विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही ड्राइवर को गलत रूट चुनने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
मामले में एक एंगल और भी है। दावा किया जा रहा कि सुरक्षा ड्रिल की वजह से बाघ उस इलाके से चले गए, जहां पर पीएम ने सफारी की थी। पीएम के दौरे से पहले करीब पांच दिन तक एसपीजी, स्थानीय पुलिस, नक्सल विरोधी बल और अन्य टीमों ने कई बार उस रूट की यात्रा की।
मामले में बीटीआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस रूट पर सुरक्षा टीमें चक्कर लगा रही थीं, उस पर पांच दिनों तक बाघ दिखे, लेकिन जब पीएम पहुंचे तो बाघ वहां पर नहीं थे। वहां पर उसके पदचिह्न थे। अधिकारी का दावा है कि कुछ सुरक्षाबलों ने ड्रिल के दौरान बाघ की तस्वीरें भी ली थीं।
उन्होंने आगे कहा कि पीएम के सुरक्षा अधिकारी चाहते थे कि पीएम जिस वाहन पर बैठें, वो काफिले के बीच रहे, लेकिन उन्होंने उस वाहन को आगे रखने का निवेदन किया। उनका मानना था कि आगे के वाहन से अच्छा नजारा दिखेगा। इस पर सिक्योरिटी टीम ने अतिरिक्त सफारी की। उनको भी उस वक्त बाघ और तेंदुए दिखे, ऐसे में वो पीएम के वाहन को आगे रखने को राजी हो गए।
इसके अलावा बीटीआर के कर्मचारियों ने सुरक्षा टीमों से शनिवार की रात मार्ग को बिना बाधा के रहने देने की मांग की थी, ताकि जानवरों की आवाजाही बाधित ना हो। ऐसे में बाघ के वहां से जाने की वजह सिक्योरिटी ड्रिल है।
पीएम ने जताई नाराजगी
रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी ने कम से कम 40 हाथी, 30 सांभर समेत अन्य जीवों को देखा, लेकिन वो बाघ देखने से चूक गए। इसके बारे में उन्होंने अधिकारी को बताया, साथ ही वजह पूछी। जब बीटीआर के अधिकारियों ने सिक्योरिटी ड्रिल को इसकी वजह बताई, तो पीएम अपने सुरक्षा कर्मचारियों पर नाराज हुए।
ड्राइवर पर कार्रवाई नहीं
वहीं मामले में बीटीआर के निदेशक रमेश कुमार ने कहा कि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा कि वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है, ये गलत है। ड्राइवर मधुसूदन का कोई दोष नहीं है। हाई सिक्योरिटी के नाम पर बार-बार उस रूट पर गाड़ियां गईं, जिस वजह से बाघ वहां से हट गए होंगे।
ड्राइवर ने क्या कहा?
मधुसूदन ने कहा कि उस वक्त उनके रोंगटे खड़े थे। उनका पूरा ध्यान पीएम की सुरक्षा पर था। वो इतने डरे थे कि पीएम से बात तक नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने कहा कि जंगल में बाघ दिखना किस्मत पर निर्भर करता है। कई बार जब वो ट्रायल के लिए मार्ग पर गए थे, तो उनको बाघ दिख गया था, लेकिन पीएम के दौरे के वक्त वो नजर नहीं आए।












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