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Karnataka news: वो पांच कारण, जिनकी वजह से सिद्धारमैया को ही कांग्रेस बनाएगी कर्नाटक का सीएम

कर्नाटक का अगला मुख्‍यमंत्री कौन होगा, कांग्रेस ने इसका खुलासा चुनाव परिणाम आने के तीन दिन बाद भी नहीं किया है लेकिन पांच वो कौन से कारण हैं जिसकी वजह से सिद्धारमैया को ही कांग्रेस अलाकमान सीएम बनाएंगे?

Siddaramaiah

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बंपर जीत हासिल करने वाली कांग्रेस चुनाव परिणाम आने के तीन दिन बाद भी उनकी सरकार में मुख्‍यमंत्री कौन होगा इस पर चुप्‍पी साधे हुए हैं। कांग्रेस कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसकी घोषणा करेगी लेकिन यह बिना नाटक के संभव नहीं होगा। कर्नाटक में मुख्‍यमंत्री पद के दो दावेदार हैं जिसमें एक पूर्व मुख्‍यमंत्री सिद्धारमैया है और दूसरे डीके शिवकुमार हैं। जहां चुनाव परिणाम आने के बाद से डीके शिवकुमार जहां लगातार मुख्‍यमंत्री पद को लेकर बराबर बयान दे रहे है वहीं सिद्धारमैया ने इस मुद्दे पर चुप्‍पी साध रखी है।

इसकी वजह ये हैं कर्नाटक की राजनीति के धुरंधर और अनुभवी नेता सिद्धारमैया को ये अच्‍छे से पता है कि कांग्रेस आलाकमान उन्‍हें ही कर्नाटक मुख्‍यमंत्री बनाएगी। पार्टी के भीतर सिद्धारमैया को जो समर्थन मिल रहा है ऐसे में किसी और सीए बनाया जाए ये सवाल ही नहीं उठता है। आइए जानते हैं वो वो पांच कारण जिसकी वजह सिद्धारमैया को ही कांग्रेस बनाएगी कर्नाटक का मुख्‍यमंत्री।

लोकप्रिय और जनप्रिय नेता सिद्धारमैया

सिद्धारमैया एक करिश्माई नेता हैं जो जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों से जुड़ने में सक्षम हैं। वह अपने डाउन टू अर्थ व्यक्तित्व और आम लोगों की चिंताओं को बोलने और उसके लिए काम करने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। यह उन्हें जनता, विशेषकर पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के बीच एक लोकप्रिय हैं। कर्नाटक चुनाव में जो गरीब वर्ग और मुसलमानों का वोट आया वो सिद्धारमैया की बदौलत आया।

सिद्धारमैया के नाम पर वोट दिया

कई क्षेत्रों और वर्गों के वोटरों ने कांग्रेस नहीं सिद्धारमैया के नाम पर वोट दिया है। इसकी वजह है कि सिद्धारमैया पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के प्रबल हिमायती हैं। सिद्धारमैया पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के एक मजबूत समर्थक रहे हैं। सिद्धारमैया 2013 और 2023 दोनों में अहिन्दा (अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों, दलित, कन्नडा acronym) वोट ब्लॉक को पुनर्जीवित करने में सफल हुए। इस चुनाव में गरीब, दलित और अल्पसंख्यक ने सिद्धारमैया के नाम पर कांग्रेस को वोट दिया। अहिंदा की आबादी वोक्कालिगा की तुलना में बहुत अधिक है, जो राज्य की आबादी का 2/3 है, जिस पर भाजपा ने आरक्षण देकर फोकर किया लेकिन कामयाब नहीं हुई।

वादों को पूरा करने का ट्रैक रिकॉर्ड , सफल प्रशासक

सिद्धारमैया चार दशकों से अधिक समय से राजनीति में हैं और दो बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री सहित कई अहम पदों पर रहते हुए जिम्‍मेदारी संभाल चुके हैं। सिद्धारमैया का नाम उन चुंनिदा मुख्‍यमंत्रियों की लिस्‍ट में शुमार हैं जिन्‍होंने कर्नाटक में बतौर मुख्‍यमंत्री पांचा साल का कार्यकाल पूरा किया। इसके अलावा सिद्धू को राज्य की राजनीति और सत्‍ता के दौरान आने वाली चुनौतियों की उन्‍हें गहरी समझ है सिद्धारमैया वो नेता है जो कर्नाटक के सफल प्रशासक साबित हुए और उन्‍होंने अपने वादों को पूरा करने का ट्रैक रिकॉर्ड है।

सिद्धारमैया ने लागू की कई सफल नीतियां

मुख्यमंत्री के रूप में अपने दो कार्यकाल के दौरान, सिद्धारमैया ने कई सफल नीतियां लागू की, जैसे कि क्षीर भाग्य योजना, इंदिरा कैंटीन और गरीबों के लिए आवास योजना। इन नीतियों ने लाखों लोगों को लाभान्वित किया है और सिद्धारमैया को जनता के बीच एक लोकप्रिय व्यक्ति बना दिया है।

सिद्धारमैया ही पूरे कर सकते हैं कांग्रेस के ये वादे

कर्नाटक ऐसा राज्‍य हैं जो बेरोजगारी, गरीबी और विकास की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। सिद्धारमैया ऐसे नेता हैं जो इन समस्याओं को हल कर सकने का हुनर रखते हैं। वहीं कर्नाटक चुनाव के दौरान कांग्रेस ने जो पांच गांरटी योजनाओं की घोषणा की है वो कर्नाटक की उक्‍त चुनौतियों को ही ध्‍यान में रखकर कर लाई गई है।

कर्नाटक में कांग्रेस को अब उन वादों को पूरा करने का समय है। वो भी 2023 में तीन राज्‍य राजस्‍थान, मध्‍यप्रदेश छत्‍तीसगढ़ और 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले। सिद्धारमैया ही वो नेता है जो इन वादों को पूरा करने में सक्षम हैं, जिससे कांग्रेस को आने वाले दिनों अन्‍य राज्‍यों में जीतने में मदद मिलेगी।

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