Karnataka Janeu controversy: CET में जनेऊ पर बवाल! केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक सरकार को लताड़ा!
Karnataka Janeu controversy: कर्नाटक के शिवमोग्गा में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) के दौरान दो द्वितीय वर्ष के पीयू छात्रों से कथित रूप से 'जनेऊ' (पवित्र धागा) उतारने के लिए कहा गया। यह घटना 16 अप्रैल को अदीचूंचनागिरी इंडिपेंडेंट पीयू कॉलेज परीक्षा केंद्र पर हुई।
बताया जा रहा है कि सुरक्षा कर्मियों ने छात्रों को जनेऊ उतारने के लिए मजबूर किया। जिस वजह से छात्र बिना परीक्षा दिए ही घर वापस लौट गए। इस घटना के बाद ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने पुलिस से बात की और दोषी सुरक्षा गार्ड पर कार्रवाई की मांग की।

दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए- छात्र की मां
वहीं इस घटना के बाद छात्र की मां ने मांग की है मेरे बच्चे के लिए दोबारा परीक्षा का आयोजन किया जाए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, 17 अप्रैल को मेरा बेटा परीक्षा देने गया था, लेकिन वहां उससे जनेऊ काटने और उतारने को कहा गया। मेरे बेटे ने कहा कि यह एक पवित्र धागा है और मैं इसे नहीं काट सकता। उन्हें बताया गया कि अगर तुम जनेऊ नहीं हटाओगे, तो तुम्हें परीक्षा देने नहीं दिया जाएगा। उसे परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया और वह वापस घर आ गया।
'मैं सरकार से चाहती हूं कि या तो मेरे बेटे के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए, या फिर उसे किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला दिया जाए और उसकी फीस सरकार या साई स्पूर्ति पीयू कॉलेज उठाए।'
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दोषी अधिकारियों पर उचित कार्रवाई की मांग
वहीं इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने शिवमोग्गा डीसी को एक एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में लिखा कि, 'यह अत्यंत निंदनीय है कि परीक्षा केंद्र में ऐसे अपमानजनक कृत्य को अंजाम दिया गया, जहाँ गायत्री मंत्र दीक्षा लेकर आत्मबोध का संकल्प लेने वाले छात्रों से उनका पवित्र जनेऊ उतरवाया गया।'
'ये छात्र पूरे साल मेहनत करके परीक्षा देने आए थे और उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि यह एक प्रकार से ब्राह्मण विरोधी और हिंदू विरोधी कृत्य है। अखिल कर्नाटक ब्राह्मण महासभा और शिवमोग्गा जिला की विप्र संगठनों की फेडरेशन इस घटना की कड़ी निंदा करती है।'डीसी से इस घटना की तुरंत जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सरकार पर उठाया सवाल
वहीं इस घटना पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'कल कर्नाटक में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) हुआ। आप देख सकते हैं कि कर्नाटक की छद्म-धर्मनिरपेक्ष सरकार का रवैया कैसा है। कुछ छात्रों से 'जनेऊ' उतारने को कहा गया कुछ संस्थानों ने इसे हटाने के लिए कहा। और एक स्थान पर तो ऐसा आरोप है कि उसे काटा गया। यह अत्यंत निंदनीय है।'
उन्होंने आगे कहा कि, संबंधित अधिकारियों ने खेद व्यक्त किया है और माफी भी मांगी है। लेकिन उस छात्र के लिए समाधान क्या है जिसे परीक्षा देने ही नहीं दी गई? इसका समाधान तो निकालना ही होगा।
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घटना पर DC ने क्या कहा?
वहीं इस घटना पर बात करते हुए शिवमोग्गा के ज़िलाधिकारी (DC) गुरुदत्त हेगड़े ने कहा, 'हमने इस मामले की पूरी जांच की है, सभी CCTV फुटेज एकत्र किए हैं, संबंधित छात्रों से बात की है और ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों से भी चर्चा की है।'
'CCTV में साफ़ दिख रहा है कि दो होम गार्ड छात्रों की frisking (जाँच) के लिए ज़िम्मेदार थे। जानकारी की कमी और गलती उनकी ओर से हुई। उन्होंने छात्रों से जनेऊ हटाने के लिए कहा। एक छात्र ने उनकी बात मान ली, जबकि दूसरे ने आपत्ति जताई... उसी समय स्कूल के प्रिंसिपल वहाँ आए और छात्र को बिना जनेऊ हटाए परीक्षा में बैठने की अनुमति दी... दोनों होम गार्ड को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की गई है'












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