रद्द हो चुकी थी स्कीम, फिर किसके कहने पर आवंटित हुई सिद्दारमैया की पत्नी को बेशकीमती जमीन? RTI से खुली पोल!
Karnataka Land Scam: कर्नाटक में हुए कथित जमीन घोटाले की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। अब आरटीआई कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस मामले में 100% घोटाला किया गया है।
आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि जो स्कीम बीजेपी तत्कालीन सरकार ने 2020 के सितंबर में खत्म कर दिया था, उसे मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) ने खुद ही बिना मंजूरी के दोबारा शुरू कर दी।

मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने क्यों की मनमानी?
पता चल रहा है कि एमयूडीए ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी पार्वती समेत अन्य लाभार्थियों को जिस 50:50 अनुपात वाली योजना के तहत जमीनें दी हैं, वह पहले रद्द हो चुकी थी। यह योजना पहले 2009 में लागू की गई।
लेकिन, 2020 के सितंबर में यह योजना रद्द कर दी गई। लेकिन, कोविड महामारी के दौरान बिना तत्कालीन भाजपा सरकार से मंजूरी लिए ही एमयूडीए इसे फिर से शुरू कर दिया।
बिना विधानमंडल की मंजूरी के फिर नहीं शुरू हो सकती थी स्कीम- आरटीआई कार्यकर्ता
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा, 'यह अवैध है। संस्था (MUDA) रद्द की गई योजना पुनर्जीवित नहीं कर सकती। इसे सिर्फ राज्य विधानमंडल के माध्यम से संशोधन के जरिए ही पुनर्जीवित किया जा सकता था।'
जमीन के अधिग्रहण वाले इलाके में ही आवंटन का था नियम
इस योजना के तहत उसी इलाके में एमयूडीए की ओर से विकसित जमीन का एक हिस्सा मुआवजे के तौर पर आवंटित किया जाना था, जिस इलाके से किसी की जमीन अधिग्रहित की जाती है।
'भाग्यशाली' लाभार्थियों में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी भी शामिल
बाद में पता चला कि सभी मानदंडों का मजाक बनाते हुए एमयूडीए ने कुछ 'भाग्यशाली' जमीन मालिकों को प्राइम लोकेशन वाली जमीनें दे दीं, जिन लाभार्थियों में मुख्यमंत्री की पत्नी भी शामिल हैं। पार्वती को मैसूर के विजयनगर III और IV क्षेत्र में विभिन्न आकार के 14 वैकल्पिक प्लॉट दे दी गई।
एक और आरटीआई कार्यकर्ता के अनुसार, 'यह भी गैर-कानूनी है, क्योंकि वैकल्पिक साइट सिर्फ उसी खास लेआउट या आने वाले लेआउट में आवंटित की जा सकती है।'
बीजेपी विधायक की चिट्ठी से सामने आया घोटाला
इस जमीन घोटाले का खुलासा तब से होने लगा, जब 26 जून, 2024 को बीजेपी एमएलए टीएस श्रीवत्स ने मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखकर रद्द की गई 50:50 योजना के तहत अक्टूबर 2023 में प्लॉट आवंटन की जांच की मांग की। आरटीआई कार्यकर्ताओं के अनुसार 2021 से 2023 के बीच यह खेल बड़े पैमाने पर चला।
इस घोटाले को अंजाम देने के लिए एमयूडीए के कई पूर्व कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी उंगलियां उठ रही हैं। लेकिन, इस गड़बड़ी का असली गुनहार कौन है, यह जांच का विषय है।
बीजेपी ने मुख्यमंत्री को घेरने की बना ली है रणनीति
बहरहाल, इस 4,000 करोड़ रुपए के कथित घोटाले ने विपक्षी बीजेपी को बड़ा मुद्दा थमा रखा है। पार्टी ने मुख्यमंत्री सि्ददारमैया के खिलाफ अभियान चलाने के लिए एक प्रदर्शन समिति बनाने पर काम कर रही है। इसके लिए प्रदेश इकाई को राष्ट्रीय महासचिव राधा मोहन दास अग्रवाल की ओर से निर्देश दिए गए हैं।
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लोकसभा चुनावों के बाद कर्नाटक में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को देखकर सिद्दारमैया कैबिनेट के कुछ मंत्रियों ने डीके शिवकुमार के साथ-साथ तीन अतिरिक्त उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग छेड़ी थी। राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा था कि यह सब मुख्यमंत्री के इशारे पर हो रहा है, ताकि शिवकुमार के पर कतरे जा सकें। लेकिन, इसी दौरान जमीन घोटाले ने सीएम को खुद बैकफुट पर आने को मजबूर कर दिया है।












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