क्या है 4,000 करोड़ का कथित जमीन घोटाला? जिसपर घिर रहे कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया!
कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने और अतिरिक्त उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस में मचे बवाल के बीच सीएम सिद्दारमैया पर विपक्ष ने 4 हजार करोड़ रुपए के जमीन घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा दिया है।
राज्य सरकार मामले की जांच दो आईएएस अधिकारियों से करवाना चाहती है, लेकिन बीजेपी सीबीआई या हाई कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज से इसकी तफ्तीश करवाने की मांग कर रही है।

क्या है 4,000 करोड़ का कथित जमीन घोटाला?
भाजपा का आरोप है कि मैसुरु अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) ने पहले मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी पार्वती की सस्ती जमीन खरीदी और उसके बदले दूसरी प्राइम लोकेशन पर उन्हें बेशकीमती जमीन आवंटित कर दी। पार्टी का दावा है कि यह 4 हजार करोड़ रुपए का घोटाला है, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं।
मैसुरू के बेशकीमती इलाके में जमीन का आवंटन
नेता विपक्ष आर अशोका का आरोप है कि एमयूडीए ने मूल जमीन के बदले सीएम की पत्नी को जो वैकल्पिक जमीन सौंपी वह मैसुरू के बेशकीमती इलाकों में से है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिया है।
नए लेआउट की जगह प्रीमियम ले आउट में क्यों दी जमीन-विपक्ष का आरोप
उन्होंने कहा, 'किसकी सिफारिश पर एमयूडीए ने इन वैकल्पिक जगहों को प्रीमियम लेआउट में आवंटित किया, जबकि नियम साफ कहता है कि इसे नए लेआउट में दिया जाना चाहिए? मुख्यमंत्री को स्पष्टीकरण देना चाहिए।'
भाजपा कथित जमीन घोटाले का सीएम सिद्दारमैया पर लगा रही है आरोप
भाजपा नेता का दावा है कि जितना बड़ा यह घोटाला है, उससे संकेत मिलता है कि इसमें खुद मुख्यमंत्री की संलिप्तता है। उनके मुताबिक, 'विकसित जमीन आवंटित करने के लिए 50:50 का नया अनुपात किसने फिक्स किया है? यह मुख्यमंत्री के निर्देशों के बगैर नहीं हो सकता।' उन्होंने आईएएस अधिकारियों से जांच कराने की कोशिशों को घोटाले को रफा-दफा करने की कोशिश करार दिया है।
सिद्दारमैया कर रहे हैं आरोपों का खंडन
लेकिन, सिद्दारमैया अपने और अपनी पत्नी के ऊपर लग रहे आरोपों का खंडन कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी पत्नी को उनके साले ने जमीन दी और 50:50 की नीति के मुताबिक उसके बदले वैकल्पिक जगह उपलब्ध करवाई। उनका कहना है कि 50:50 वाली नीति बीजेपी सरकार ने ही बनाई थी।
कैसे कौड़ी के भाव से सोने का मोल बन गई जमीन?
जमीन के पूरे चक्र के बारे में वह दावा कर रहे हैं कि उनके साले मल्लिकार्जुन ने 1996 में तीन एकड़ और 36 गुंटास जमीन खरीदी थी। बाद में उन्होंने अपनी बहन पार्वती को वह गिफ्ट कर दिया। उनका आरोप है कि करीब 4 साल पहले एमयूडीए ने घर बनाने के लिए उस प्लॉट को बिना खरीदे या मुआवजा दिए विकसित किया और बेच दिया।
सिद्दारमैया का दावा है, 'ऐसा नहीं है कि मेरी पत्नी की प्रॉपर्टी अधिग्रहित की गई, बल्कि प्लॉट बनाकर बेचे गए। मैं नहीं जानता कि एमयूडीए ने यह जानबूझकर या अनजाने में किया।' वे कहते हैं, 'जब हमने आवेदन दिया, एमयूडीए हमें मुआवजा देने को राजी हो गया।' 'इसमें गैर-कानूनी कहां है?'
सिद्दारमैया खुद को ही बता रहे हैं पीड़ित!
मुख्यमंत्री का दावा है कि उनकी पत्नी को तो उन्हीं की संपत्ति से वंचित कर दिया गया था। अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर वह सवाल उठा रहे हैं कि 'क्या हमें अपनी प्रॉपर्टी को जाने देना चाहिए? क्या कानूनी रूप से एमयूडीए को हमारी जमीन नहीं देनी चाहिए? जब हमने इसके बारे में एमयूडीए से पूछा तो उन्होंने कहा कि वे हमें 50:50 के अनुपात में जमीन देंगे। हम इसके लिए तैयार हो गए। तब एमयूडीए ने हमें अलग-अलग जगहों पर उतनी ही जमीन दी। इसमें गलत क्या है?'












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