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Karnataka: हाई कोर्ट ने निकिता सिंघानिया के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार, कहा-'आप जांच क्यों नहीं चाहते'

Karnataka News: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बेंगलुरु के निवासी और ऑटोमोटिव कंपनी में कार्यरत तकनीकी विशेषज्ञ अतुल सुभाष की आत्महत्या के मामले में उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। यह मामला वैवाहिक विवाद और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है।

न्यायमूर्ति एसआर कृष्ण कुमार की अगुवाई वाली एकल पीठ ने एफआईआर को रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए जांच जारी रखने के आदेश दिए।अदालत ने कहा कि शिकायत में अपराध के प्रथम दृष्टया तत्व स्पष्ट हैं। जांच क्यों न की जाए।

karnataka high court

क्या है पूरा मामला

अतुल सुभाष ने 9 दिसंबर को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले अतुल ने अपने सुसाइड नोट और परिवार को दिए गए बयान में आरोप लगाया कि निकिता और उनके परिवार ने उनसे 3 करोड़ रुपये की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने झूठे मामलों और कोर्ट में सार्वजनिक अपमान का भी उल्लेख किया। जिसने उन्हें आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया। अतुल के भाई विकास कुमार ने मराठाहल्ली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराते हुए निकिता और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए।

निकिता सिंघानिया के तर्क

निकिता के वकील ने अदालत में दलील दी कि शिकायत में एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। आत्महत्या के लिए उकसाने के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं। निकिता का अपने पति के खिलाफ कानूनी शिकायत करने का अधिकार है।

उच्च न्यायालय का फैसला

अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि एफआईआर के विवरण आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध की संभावना को दर्शाते हैं। जांच रोकने का कोई औचित्य नहीं है।

निकिता और उनके परिवार को मिली जमानत

बेंगलुरु की एक अदालत ने 4 जनवरी को निकिता उनकी मां निशा और बहनोई अनुराग को जमानत दे दी। अतुल के परिवार ने इस जमानत आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का इरादा व्यक्त किया है।

अतुल सुभाष का परिवार और बच्चे की कस्टडी का मामला

अतुल के पिता पवन कुमार मोदी ने निकिता पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपने पोते की कस्टडी की मांग की है। उनका कहना है कि अगर निकिता ने उनके बेटे को आत्महत्या के लिए मजबूर किया तो बच्चा भी खतरे में हो सकता है। मोदी परिवार ने सुप्रीम कोर्ट से कस्टडी के लिए हस्तक्षेप की मांग की है।

निकिता के परिवार के आरोप

निकिता के परिवार ने भी अतुल पर दहेज मांगने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि अतुल की अत्यधिक मांगों के कारण निकिता के पिता का निधन हो गया।

आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया

अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया है कि वे जांच में एकत्र की गई सामग्री प्रस्तुत करें। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है।

अतुल सुभाष की आत्महत्या से जुड़े आरोप और प्रत्यारोप इस मामले को जटिल बनाते हैं। कर्नाटक उच्च न्यायालय का फैसला इस बात पर जोर देता है कि ऐसे मामलों में जांच आवश्यक है। यह घटना वैवाहिक कलह, उत्पीड़न और अत्यधिक धन की मांग से जुड़े कानूनी और सामाजिक मुद्दों को उजागर करती है।

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