कर्नाटक: लिंगायत समुदाय को राज्य सरकार ने दिया अल्पसंख्यक दर्जा
बेंगलुरु। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से पहले लिंगायत समुदाय को अलग धर्म की मान्यता देने के बाद अब इनको अल्पसंख्यकों का भी दर्जा दे दिया है। कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक श्रेणी में रखने की घोषणा की है। हालांकि, अभी केंद्र सरकार ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा नहीं दिया है और राज्य अब केंद्र के फैसला का इंतजार कर रही हैं।

लिंगायत को अलग धर्म की मान्यता देने के लिए कैबिनेट की हुई बैठक में सरकार का मूड फिलहाल कर्नाटक सरकार के खिलाफ गया है। कैबिनेट ने कर्नाटक सरकार के फैसले की आलोचना की। कैबिनेट में कहा गया है कि लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा दिए जाने से दलितों के आरक्षण में कमी आएगी।
राज्य की कुल आबादी में 18 फीसदी के हिस्सेदार लिंगायत समुदाय के लोग यहां की अगड़ी जाति में आते हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस सरकार की ओर से यह फैसला भाजपा को कमजोर करने के लिए लिया गया है। बताया जाता है कि 12वीं सदी में समाज सुधारक बासवन्ना ने हिन्दू धर्म में जाति व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन किया था। उन्होंने वेदों को मानने से इनकार किया और मूर्ति पूजा के भी खिलाफ थे।












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