Karnataka election में फूड डिलिवरी वाले क्यों कर रहे हैं वोटरों को कॉल?
कर्नाटक चुनाव में मतदान की जानकारी जुटाने के लिए फूड डिलिवरी कंपनियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसी शिकायतें वह मतदाता कर रहे हैं, जिनके पास इन कंपनियों से ऐसे फोन कॉल आए हैं।

कर्नाटक चुनाव में इसबार कई मतदाताओं के सामने अजीब स्थिति पैदा हो रही है। कुछ फूड डिलिवरी कंपनियां फोन करके पूछ रही हैं कि आपका चुनावों को लेकर क्या कहना है। मतदाताओं को यह समझ में नहीं आ रहा है कि खाने के लजीज व्यंजनों के बारे में बताने की जगह इन्हें क्या हो गया है कि यह चुनावी जायका का मजालूटना चाहते हैं। लेकिन, चुनाव आयोग को इसकी भनक लग चुकी है। कर्नाटक विधानसभा के चुनाव में अब लगभग एक महीने का ही समय रह गया है।

कर्नाटक में वोटरों के पास आ रहे हैं अजीब कॉल
बैंगलोर मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक चुनाव में इसबार कुछ मतदाताओं को अजीब कॉल आ रहे हैं। पूछा जा रहा है कि पिछले चुनाव में आपने किस पार्टी को वोट दिया था? इसबार किसे वोट देने की सोच रहे हैं? लगता है कि ये कॉल किसी चुनावी सर्वे को लेकर आ रहे हैं। लेकिन, यह फोन कॉल कोई राजनीतिक दल की ओर से आधिकारिक तौर पर नहीं किए जा रहे हैं।

फूड डिलिवरी कंपनी से चुनावी कॉल!
कुछ मामलों में वोटरों से उनके मतदान से जुडी जानकारियां मांगने वाले ऐसे फोन फूड डिलिवरी कंपनियों की ओर से आ रहे हैं। 6 अप्रैल को एक शख्स के पास फोन आया। ट्रू कॉलर में यह एक मशहूर फूड डिलिवरी कंपनी का वेरिफाइड नंबर था। जैसे ही फोन रिसिव हुआ, ऑटोमेटेड आवाज में वही सारे सवाल पूछे जाने शुरू हो गए।

बिना खाने के ऑर्डर दिए भी आ रहे हैं कॉल
दिलचस्प बात ये है कि उस शख्स ने खाने के लिए कोई ऑर्डर भी नहीं दिया था। लेकिन, फिर भी उसके पास कॉल आया। हालांकि, उसने कह दिया कि यह फूड डिलिवरी वालों का काम काम नहीं है कि पूछे कि चुनाव को लेकर वह किस तरह से सोच रहे हैं। ऐसे मामले सामने आने के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

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फूड डिलिवरी कंपनियां ऐसा क्यों कर रही हैं?
नियमों के तहत चुनावों के दौरान सर्वे करवाने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, एक्सपर्ट सवाल उठा रहे हैं कि फूड डिलिवरी कंपनियां ऐसा क्यों कर रही हैं? सवाल यह भी है कि क्या फूड डिलिवरी कंपनियां अपने कस्टमर्स का डेटा शेयर कर रही हैं? सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर ऐसा है तो उसका इस्तेमाल कौन और किसके लिए कर रहा है?

इस तरह के कॉल के पीछे कौन सी एजेंसी हैं?
राजनीतिक एक्सर्ट मेजर जनरल अनिल वर्मा (रिटायर्ड) ने कहा है हाल के समय में सियासी दल सर्वे के लिए सोशल मीडिया और आईटी सेल का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह अपना वोट बैंक समझने के लिए ऐसा करते हैं। लेकिन, कई बार इसका तरीका अनैतिक हो जाता है। उन्होंने कहा, 'संदेहास्पद विषय ये है कि आदमी इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकता, क्योंकि उसे नहीं पता कि यह कौन कर रहा है या इस तरह के कॉल के पीछे कौन सी एजेंसी हैं।'

ऐसे मामलों में क्या किया जा सकता है?
संयुक्त मुख्य चुनाव अधिकारी टी योगेश ने कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसे प्रचार से पहले पूर्व अनुमति लेने की जरूरत है। उनका कहना है, 'अगर लोगों के सामने ऐसे मामले आते हैं तो वह डीओ या रिटर्निंग ऑफिसर से संपर्क कर सकते हैं। अगर वह कोई चुनावी प्रचार कर रहे हैं तो उन्हें अनुमति लेनी होगी; अगर वह बिना इजाजत के कुछ कर रहे हैं तो उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की जा सकती है।' कर्नाटक में 10 मई को मतदान होना है।













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