कर्नाटक में वोटरों को UPI से रिश्वत देकर लुभा रहे हैं उम्मीदवार? चुनाव आयोग यूं रख रहा है नजर
Karnataka elections:कर्नाटक चुनाव में वोटरों को रिश्वत देने के लिए यूपीआई का भी इस्तेमाल हो सकता है। इस आशंका ने चुनाव आयोग की जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं। ऐसे उम्मीदवारों की निगरानी के लिए वह खास तैयारी कर रहा है।

कर्नाटक चुनाव में मतदाताओं को वोट के बदले नोट देने के लिए उम्मीदवार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। ऐसी आशंका के बाद चुनाव आयोग अलर्ट है। उसकी ओर से बल्क में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर भी नजर रखी जा रही है। क्योंकि, उसके पास उम्मीदवारों द्वारा ऐसे हथकंढे अपनाए जाने की आशंका को लेकर सूचनाएं पहुंची हैं। इससे पहले ट्रेनों में टीटीई की ओर से घूस लेने के लिए यूपीआई का इस्तेमाल किए जाने की भी खबरें आ चुकी हैं। यही वजह है कि कर्नाटक में चुनाव आयोग उम्मीदवारों की इस तरह की हरकतों पर बहुत ही सख्त नजर रख रहा है।

वोटरों को यूपीआई से रिश्वत दिए जाने की आशंका
कर्नाटक चुनाव में हाल में कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिसमें वोटरों पर बड़े नेता की ओर से कैश उछालते देखा जा रहा है। चुनाव आयोग की ओर से हुई कार्रवाइयों में करोड़ों रुपए की नकदी, शराब और बाकी चीजें जब्त भी की गई हैं। लेकिन, टेक्नोलॉजी के विकास ने चुनाव आयोग की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी है। कर्नाटक में उसे इस बात की चिंता सता रही है कि नेताओं की ओर से कैश पकड़े जाने के डर से वोटरों को रिश्वत में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) से पैसे देकर लुभाने की कोशिश हो सकती है। चुनाव आयोग इन हथकंडों को रोकने के लिए यूपीआई की सुविधा देने वाले कई तरह की ऐप पर नजर रख रहा है। हालांकि, फिर भी कुछ राजनेताओं की ओर से बेंगलुरु में टेक-सेवी वोटरों तक पहुंचने के लिए ऐसी टेक्नोलॉजी का सहारा लिए जाने की खबरें हैं।

वोटरों को लुभाने के तरह-तरह के हथकंडे जारी
यूपीआई को छोड़ दें तो चुनाव कार्य से जुड़े अधिकारियों ने अब तक 39.38 करोड़ रुपए मूल्य के कैश, सामान और ड्रग्स बरामद किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्लाइंग स्क्वाड, स्टैटिक सर्विलांस टीम और पुलिस लगातार इन हरकतों पर नजर रख रहीं हैं। करीब 10 करोड़ रुपए के तो ऐसे सामान पकड़े गए हैं, जो वोटरों के बीच वितरित किए जाने थे। जबकि, 7.07 करोड़ नकदी पकड़ी हई है।

चुनाव आयोग यूं रख रहा है नजर
लेकिन, जबसे यूपीआई से वोटरों को सीधे उनके खाते में पैसे भेजने की आशंका पैदा हुई है, चुनाव आयोग के कान खड़े हो गए हैं। बेंगलुरु के जिला चुनाव अधिकारी तुषार गिरि नाथ के मुताबिक, ' जब भी कोई व्यक्ति एक खास रकम, बड़ी संख्या में लोगों को भेजता है तो हमारी टीमें ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए प्रशिक्षित हैं। अगर ऐसे मामलों की पहचान रिश्वत के तौर पर होती है, तो हम उनके खिलाफ भ्रष्ट आचारण के तहत मुकदमा करेंगे।' वे बृहत बेंगलुरु महानगर पालिके के चीफ कमिश्नर भी हैं। सूत्रों का कहना है कि 10 मई के मतदान से पहले कई उम्मीदवारों की ओर से वोटरों को लुभाने के लिए हर हथकंडे अपनाए जाएंगे। इनमें से कई तो ऐसे हैं, जो मान बैठे हैं कि इस तरह की टेक्नोलॉजी की वजह से उनकी कोशिशों के बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता चल पाएगा।
Recommended Video

सोशल मीडिया पर भी नजर
चुनाव आयोग की नजर सिर्फ यूपीआई पेमेंट पर ही नहीं है, बल्कि वह यह भी देख रहा है कि उम्मीदवार अपने चुनाव अभियान के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं। हाल ही में मदिकेरी के एक कांग्रेस नेता के खिलाफ ऐसे मामले में जिला चुनाव अधिकारी की ओर से नोटिस भी जारी किया गया है। उनपर आरोप है कि उन्होंने रामनवमी के अवसर पर लोगों को शुभकामाएं देने के लिए जो व्हाट्सऐप मैसेज भेजा, उसमें कांग्रेस पार्टी के चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल किया गया था। नोटिस में साफ कहा गया है कि पार्टी का नाम या चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने से पहले ऐसे मामलों में जिला स्तरीय समिति से पूर्व अनुमति लेना जरूरी है।

नोडल अफसरों को दी जा रही है विशेष ट्रेनिंग
जिला चुनाव अधिकारियों की ओर से नोडल अफसरों यह भी ट्रेनिंग दी जा रही है कि फेसबुक, ट्विटर या बाकी प्लेटफॉर्म का चुनाव अभियान के लिए किस तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है, उसकी निगरानी किस तरह से करनी है। एक अधिकारी ने इस संबंध में जानकारी दी है कि 'सभी तरह का प्रचार निश्चित तौर पर निर्धारित फ्रेमवर्क के आधार पर ही होना चाहिए।'













Click it and Unblock the Notifications