Karnataka elections 2018: कांग्रेस के टीपू सुल्‍तान बनाम बीजेपी के हनुमान के बीच कर्नाटक में अहम है वोटर मुसलमान

नई दिल्‍ली। कर्नाटक में चुनाव प्रचार जोरों पर है। कभी नरेंद्र मोदी तो कभी राहुल गांधी, दोनों अपने-अपने तरकश में रखे तीरों को कमान पर चढ़ा रहे हैं। इसमें शक नहीं कि कर्नाटक में मुख्‍य मुकाबला पीएम मोदी और राहुल गांधी यानी कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही है, लेकिन चर्चा में एक और शख्‍स भी है- एचडी देवगौड़ा, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, जिनकी पार्टी का नाम है- जेडी-एस (जनता दल-सेक्‍युलर)। राहुल गांधी ने हाल में जेडी-एस को बीजेपी की बी टीम बताया। देवगौड़ा कुछ दिनों पहले पीएम नरेंद्र मोदी मिले भी थे। उधर, पीएम मोदी भी देवगौड़ा पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। चुनाव पूर्व सर्वे में हंग असेंबली के संकेतों के बाद से कांग्रेस और बीजेपी दोनों जेडी-एस पर करारा प्रहार कर रहे हैं। दरअसल, मसला मुस्लिम वोट बैंक का है। कर्नाटक में मुस्लिम वोटर बाजी किसी भी तरफ पलट सकता है।

कांग्रेस के टीपू सुल्तान बनाम बीजेपी के हनुमान

कांग्रेस के टीपू सुल्तान बनाम बीजेपी के हनुमान

यह सच है कि कर्नाटक चुनाव में हनुमान सुर्खियां बटोर रहे हैं, लेकिन इस राज्‍य में टीपू सुल्‍तान की भी खासी अहमियत है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि टीपू सुल्‍तान कर्नाटक के 12.91% मुसलमानों के लिए गौरव का प्रतीक हैं। सीएम सिद्धारमैया टीपू सुल्‍तान के प्रति श्रद्धावान बने हुए हैं तो दूसरी ओर बीजेपी हनुमान के नाम जप कर रही है। राज्‍य में मुसलमानों के राजनीतिक प्रभाव की बात पर लौटते हैं। कर्नाटक की करीब 20 शहरी सीटों पर मुसलमान बेहद प्रभावी हैं। यदि पूरे राज्‍य की बात करें तो 224 विधानसभा सीटों में से करीब 90 पर मुसलमान वोटरों का असर है। इनमें कई पर तो वह सीधा प्रभाव छोड़ते हैं, लेकिन अधिकतर सीटें ऐसी हैं, जहां जहां वे खेल बना भले ही न बनाएं, लेकिन बिगाड़ जरूर सकते हैं।

 मुस्लिम वोटों के लिए जेडी-एस की कांग्रेस से 'सेक्‍युलर जंग'

मुस्लिम वोटों के लिए जेडी-एस की कांग्रेस से 'सेक्‍युलर जंग'

बरसों से मुसलमान कांग्रेस का कोर वोटर रहा, लेकिन क्षेत्रीय दलों के उदय के बाद भारत की इस सबसे पुरानी पार्टी को सबसे ज्‍यादा मुस्लिम वोट बैंक ही गंवाना पड़ा। यूपी में सपा मुस्लिम की खैर-ख्‍वाह बन बैठी तो बिहार में लालू। कर्नाटक की बात करें तो यहां भी कांग्रेस को मुस्लिम वोट बंटने का डर है। जेडी-एस वो पार्टी है, जो कांग्रेस के मुस्लिम वोट काट सकती है। बीजेपी की रणनीतिक कोशिश भी यही है कि मुस्लिम वोट बंटे और हिंदू वोट एकजुट हो। यही कारण रहा कि राहुल गांधी ने जेडी-एस को बीजेपी की बी टीम बता डाला।

सिर्फ टीपू सुल्‍तान तक सीमित नहीं कांग्रेस और बीजेपी की जंग

सिर्फ टीपू सुल्‍तान तक सीमित नहीं कांग्रेस और बीजेपी की जंग

कर्नाटक में टीपू सुल्‍तान को लेकर 2015 से ही चर्चा हो रही है। कभी उनकी बर्थ एनिवर्सरी मनाए जाने को लेकर तो कभी इस बात पर कि क्‍या वह भी अन्‍य मुस्लिम शासकों की तरह क्रूर थे। आरएसएस के विचारकों ने अपने-अपने हिसाब से जनता के समक्ष इतिहास प्रस्‍तुत किया तो उदारवादियों अपने हिसाब से। बहरहाल, टीपू सुल्‍तान के नाम पर बीजेपी और कांग्रेस की झोली में क्‍या आता है, यह तो वक्‍त ही बताएगा, लेकिन मुस्लिम वोटों की जंग सिर्फ यही तक सीमित नहीं है। उदारहण के तौर पर- कर्नाटक में एक स्‍कीम है- शादी भाग्‍य योजना। इसके तहत हर मुस्लिम लड़की शादी के लिए 50,000 रुपए दिए जाते हैं। बीजेपी को इस पर कड़ी आपत्ति है। पार्टी ने इस स्‍कीम को काउंटर करने के लिए विवाह मंगल स्‍कीम लाने का वादा किया है।

 जेडी-एस का AIMIM दांव और कांग्रेस के साथ मुसलमानों की जुगलबंदी

जेडी-एस का AIMIM दांव और कांग्रेस के साथ मुसलमानों की जुगलबंदी

कर्नाटक की राजनीति पर पकड़ रखने वाले जानकारों की मानें तो सिद्धारमैया के नेतृत्‍व वाली कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक में ऐसा कुछ नहीं किया है, जिससे यहां के मुस्लिम बेहद खुश हों। लेकिन ज्‍यादातर विश्‍लेषकों की राय में कांग्रेस को इस बात का फायदा मिल सकता है कि मुस्लिम अब अपनी सुरक्षा को लेकर पहले से ज्‍यादा चिंतित हैं।
दूसरी ओर जेडी-एस की बात करें तो उसे ऑल इंडिया मजलिस ए इत्‍तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का समर्थन मिल रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी अब तक जहां-जहां गई है, वहां-वहां मुस्लिम वोट कटुआ पार्टी के तौर पर उसकी पहचान रही है। देखना रोचक होगा कि कांग्रेस को जेडी-एस और AIMIM की चुनौती से कितना नुकसान होता है? कर्नाटक चुनाव को लेकर किए गए सर्वे में हंग असेंबली की बात सामने आई है और जेडी-एस का दांव चला तो हंग असेंबली आ भी सकती है।

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