Karnataka Election 2023: खत्म हुआ धुआंधार प्रचार, कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस में आगे कौन?
Karnataka Election 2023: कर्नाटक में प्रचार अभियान के अंतिम दिन तक कांग्रेस और बीजेपी ने जोरदार लड़ाई लड़ी है। जेडीएस इन दोनों दलों के मुकाबले नहीं दिखी है, लेकिन किंगमेकर बनने की आस में है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए आज शाम प्रचार अभियान खत्म हो गया। प्रचार का अंत होते-होते इसने काफी समां बांध दिया। सभी दलों की ओर से बड़े नेता की जोरदार रैलियां और चुनाव सभाएं आयोजित की गईं। प्रचार अभियान के हिसाब से देखें तो बीजेपी और कांग्रेस में ही मुख्य मुकाबला नजर आ रहा है और तीसरे स्थान पर जेडीएस ने भी अपने हिसाब से काफी मेहनत करने की कोशिश की है।

खत्म हुआ प्रचार, 10 मई को मतदान
224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा के लिए बुधवार यानि 10 मई, 2023 को मतदान होना है। चुनाव पूर्व कुछ सर्वे सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस में नजदीकी लड़ाई दिखा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर सर्वेक्षण में कांग्रेस को बढ़त दिखाई गई है। जेडीएस अपने दम पर सत्ता में आने की तो शायद ही सोच रही है।

बीजेपी के लिए पीएम मोदी ने संभाली कमान
कांग्रेस के पक्ष में आए चुनाव पूर्व के कुछ सर्वे के बाद बीजेपी ने बाद के दिनों में प्रचार अभियान में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे राज्य में 20 से ज्यादा रैलियां की। दो दिनों तक उन्होंने बेंगलुरु में काफी प्रभावशाली मेगा रोड शो भी किया। उन्होंने करीब 25 सीटों को कवर किया।

कांग्रेस की दो 'गलतियों' पर आक्रामक हुई बीजेपी
पीएम मोदी ने कांग्रेस को बैकफुट में लाने के लिए मुख्य रूप से दो तीर चलाए। एक तो उनके खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन की आपत्तिजनक टिप्पणी और दूसरा बजरंग दल को कथित तौर पर बैन करने का उसका दावा। इन दोनों मुद्दों पर उन्होंने कांग्रेस को बैकफुट पर जाने को मजबूर किया।

आरक्षण को भी बीजेपी ने बनाया बड़ा मुद्दा
बीजेपी की ओर से खासकर गृहमंत्री अमित शाह ने 4% मुस्लिमों के आरक्षण कोटा समाप्त करने के बहाने भी कांग्रेस को घेरने की कोई कोशिश नहीं छोड़ी। लिंगायत, वोक्कालिगा, दलित और आदिवासियों को अतिरिक्त आरक्षण देने को भी भाजपा की ओर से बड़ा मुद्दा बनाया गया।

5 गारंटी और एंटी-इंकंबेंसी के भरोसे कांग्रेस
भाजपा के हाई-प्रोफाइल प्रचार के जवाब में कांग्रेस को अपनी चुनाव से पहले की 5 गारंटी और एंटी-इंकंबेंसी फैक्टर पर ज्यादा भरोसा है। पार्टी ने आखिरकार सोनिया गांधी से भी प्रचार कराकर चुनावी फिजा को अपने पक्ष में बनाए रखने की भरपूर कोशिश की है।

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कांग्रेस ने भ्रष्टाचार को भी बनाया बड़ा मुद्दा
कांग्रेस की ओर से भाजपा सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार को भी बड़े मुद्दे की तरह पेश किया गया है और महंगाई को लेकर भी मतदाताओं की नाराजगी भुनाने की कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। शुरू से पार्टी की स्थानीय मुद्दों को हवा देने की रणनीति काफी कारगर नजर आ रही थी।

कांग्रेस इन मसलों पर बैकफुट पर नजर आई
लेकिन, पीएम मोदी को जहरीला सांप बता देना और बजरंग दल जैसे संगठन पर बैन की बात कहकर पार्टी ने बीजेपी को अपने ही खिलाफ गैर-जरूरी हथियार थमा दिया। बीजेपी नेताओं ने इन भावनात्मक मुद्दों पर उसी तरह से धुआंधार बैटिंग की है, जैसे क्रिकेट में आखिरी ओवरों में किए जाते हैं।
सोनिया की सभा से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है
वैसे एक्सपर्ट की राय इन मुद्दों का चुनाव परिणाम पर पड़ने वाले असर को लेकर बंटी हुई है। बैन वाले बयान से तो पार्टी के बड़े नेताओं ने सीधे यू-टर्न ही ले लिया है। वैसे कहते हैं कि चार साल बाद सोनिया की हुबली रैली से पार्टी कार्यकर्ताओं को मनोबल बढ़ गया है।

चुनाव प्रचार में जेडीएस पूरा दम नहीं दिखा सकी
कर्नाटक चुनाव में इस बार भी जेडीएस तीसरी प्रमुख पार्टी की भूमिका में नजर आई है। पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा और उनके बेटे एचीडी कुमारस्वामी ने चुनाव की तैयारियां काफी पहले से शुरू कर दी थीं। लेकिन, जब वास्तविक चुनाव अभियान ने रफ्तार पकड़ी तो कांग्रेस-बीजेपी के मुकाबले यह थोड़ी पिछड़ी हुई नजर आई।
भाजपा-कांग्रेस से बनाई बराबर दूरी
पार्टी के साथ सबसे बड़ी दिक्कत इसके दोनों नेताओं की सेहत रही। इसका परिणाम यह हुआ कि उत्तर कर्नाटक में यह उस तरह से जोर नहीं लगा सकी, जहां इसकी संभावनाएं अच्छी बन रही थी। वैसे प्रचार अभियान के दौरान जेडीएस ने खुद को कांग्रेस और भाजपा दोनों से बराबर ही दूरी बनाई रही।

किंगमेकर की भूमिका में हो सकती है जेडीएस?
हालांकि, कई सर्वेक्षणों में इस पार्टी को इतनी सीटें दी गई हैं, जिससे त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में यह किंगमेकर की भूमिका में आ सकती है। कुछ मौकों पर पार्टी के दिग्गज नेताओं की ओर से भी यही भावनाएं जाहिर की गई हैं। (जेडीएस नेताओं की तस्वीर-फाइल)












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