karnataka election: महिलाओं को टिकट देने में सबसे फिसड्डी रही कांग्रेस, जानें कितनी महिलाएं हैं मैदान में
Karnataka Election 2023, इस चुनाव में भी सभी प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा, कांग्रेस और जद (एस) महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने में विफल रहे हैं।

Karnataka Election 2023, कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनावों में केवल 9 दिन बचे हैं। पार्टियां पूरे दमखम से प्रचार में जुटी हुई हैं। 10 मई को होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए कुल 2,613 उम्मीदवार मैदान में हैं।
चुनाव आयोग द्वारा साझा की गई उम्मीदवारों की अंतिम सूची के मुताबिक, 2,613 उम्मीदवार में से 185 महिला उम्मीदवार और एक 'अन्य' श्रेणी से चुनाव लड़ रही हैं। इस बार महिला कैंडिडेट्य का आंकड़ा पिछले चुनावों के मुकाबले कम हुआ है।
2018 के चुनाव में कुल 219 महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में थी। जिसमें से सिर्फ 7 महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंची थीं। महिला कैंडिडेट्स के जीत के आंकड़े में आई गिरावट के चलते पार्टियों ने इस बार टिकट देने में परहेज किया है।

महिलाओं के लेकर बड़े-बड़े वादे करने वाली कांग्रेस और बीजेपी प्रतिनिधित्व के मामले में काफी पिछड़ी नजर आती हैं। राजनीति में महिलाओं की 33 फीसदी की हिस्सेदारी की वकालत करने वाली कांग्रेस ने इस बार सिर्फ 11 महिलाओं को और 2014 और 2019 के चुनावी घोषणापत्र में महिला प्रतिनिधित्व विधेयक की बात करने वाली बीजेपी ने 12 महिलाओं को टिकट दिए हैं।
ऐसा ही कुछ हाल कर्नाटक की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी जेडीएस का रहा है। जेडीएस ने 13 महिलाओं को टिकट दिए हैं। हालांकि राज्य में महिलाओं को सबसे अधिक टिकट इसी पार्टी द्वारा दिए गए हैं। 2018 की बात करें तो कांग्रेस ने 15 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, भाजपा ने 6 उम्मीदवारों को और जेडीएस ने तब केवल 4 महिलाओं को टिकट दिए थे।

2013 में 175 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। बीजेपी, कांग्रेस और जेडीएस ने कुल मिलाकर 25 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिए थे। उनमें से 159 महिला उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। जबकि छह महिलाएं विधानसभा पहुंची थी। जिसमें से सिर्फ दो महिलाओं को कैबिनेट में जगह दी गई थी।
कर्नाटक में महिला प्रतिनिधित्व का हाल इतना बुरा है कि, चामराजनगर जिले की चार विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रहे 61 उम्मीदवारों में सिर्फ एक महिला उम्मीदवार है। वह भी एक निर्दलीय उम्मीदवार हैं। कोटेकेरे गांव की पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य जयश्री जिले की एकमात्र महिला उम्मीदवार हैं। वह गुंडलुपेट विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रही हैं।

अन्य तीन निर्वाचन क्षेत्रों चामराजनगर, कोल्लेगल और हनूर में कोई महिला उम्मीदवार नहीं हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि, सीमावर्ती जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में चामराजनगर में महिला मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। इस विधानसभा में कुल 4,31,226 महिला वोटर हैं। जिनकी संख्या पुरुष मतदाताओं से 9,001 अधिक है। हनूर विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर अन्य तीनों विधानसभा क्षेत्रों में महिला मतदाता पुरुष मतदाताओं से अधिक हैं।
कर्नाटक का महिला प्रतिनिधि चुनने में रिकॉर्ड देश में सबसे खराब रहा है। कर्नाटक राज्य बनने के बाद से सिर्फ एक चुनाव में जीती हुई महिला का आंकड़ा दोहरे अंकों में पहुंचा। 1989 में 78 महिला प्रत्याशियों में 10 ने जीत हासिल की थी। इसके बाद कभी भी 10 महिलाएं नहीं चुनी गई हैं। 1987 से 2018 तक राज्य में सिर्फ 102 महिला विधायक बनी हैं।
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लगभग 50% मतदाता महिलाएं होने के बावजूद राज्य में महिलाओं के प्रतिनिधित्व सबसे कम है। 1952 से लेकर 2019 तक कर्नाटक से लोकसभा में सिर्फ 13 महिलाएं जीतक पहुंची हैं।कर्नाटककी साक्षरता दर 75.36% (2011 की जनगणना) है। लेकिन महिलाओं को चुनने के मामले में उसका रिकॉर्ड बहुत ही खराब है।
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