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Karnataka: रेड्डी बंधुओं के चलते चर्चित बेल्लारी में कभी सोनिया-सुषमा भिड़ी थीं, अभी क्या हाल है? जानिए

कर्नाटक की बेल्लारी सीट पर इस बार भी दिलचस्प मुकाबला हो रहा है। रेड्डी बंधुओं के पारिवारिक सदस्यों के बीच ही मुकाबला हो रहा है। अभी वहां भाजपा का कब्जा है।

Karnatakas Bellary seat, there is a fight between the Reddy brothers family, Janardhana Reddys wife is also in the fray

कर्नाटक की बेल्लारी विधानसभा सीट की पूरे देश में एक अलग पहचान है। यह इलाका रेड्डी बंधुओं के खनन कारोबार की वजह से कुख्यात रहा है तो एक बार कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और भाजपा की दिवंगत नेता सुषमा स्वराज ने लोकसभा में यहां से चुनाव लड़कर इसे चर्चा में ला दिया था।

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जनार्दन रेड्डी की पत्नी अरुणा लक्ष्मी हैं उम्मीदवार
पिछले कुछ दशकों में बेल्लारी खनन कारोबारी जनार्दन रेड्डी और उनके कुनबे की वजह से चर्चा में रहा है। इस बार उनकी पत्नी अरुणा लक्ष्मी यहां से चुनाव लड़ रही हैं और पति के नाम पर एक और मौका देने की मांग कर रही हैं। लक्ष्मी अपने ही परिवार की नई पार्टी कल्याण राज्य प्रगति पक्ष की उम्मीदवार हैं।

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पति के नाम पर वोट मांग रही हैं लक्ष्मी
लक्ष्मी को लगता है कि 2006 से 2010 के बीच जब कर्नाटक की सत्ता में उनके पति का सिक्का चलता था, तब शहर का जो अप्रत्याशित विकास हुआ, वैसा फिर कभी नहीं हो पाया। इसी आधार पर वह 10 मई को लोगों को अपने लिए वोट मांग रही हैं। टीओआई ने कई लोगों से बातचीत के आधार पर कहा है कि वास्तव में काफी लोग आज भी मानते हैं कि रेड्डी के जमाने में शहर का चेहरा चमक गया था।

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'रिपब्लिक ऑफ बेल्लारी' के नाम से हुआ था कुख्यात
हालांकि, बहुत सारे लोग इसे 'रिपब्लिक ऑफ बेल्लारी' के नाम से कुख्यात करने के लिए भी जनार्दन रेड्डी को ही जिम्मेदार समझते हैं। लेकिन, अभी भी क्षेत्र में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो उस जमाने को याद करके उसे फिर से वापस पाने की उम्मीद कर रहे हैं। क्योंकि, उन्हें लगता है कि बेल्लारी का रेड्डी जितना विकास कोई नहीं कर सकता और न ही प्रदेश में वैसा दबदबा कोई बना सकता है।

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जनार्दन रेड्डी ने अपने भाई के खिलाफ पत्नि को उतारा है
लेकिन, अरुणा लक्ष्मी की सबसे बड़ी चुनौती हैं, खुद उनके पति जनार्दन रेड्डी के भाई और सीटिंग विधायक जी सोमशेखर रेड्डी जो भाजपा के टिकट पर फिर मैदान में हैं। लक्ष्मी के चुनाव प्रचार के मुकाबले सोमशेखर का कैंपेन फिलहाल ठंडा दिख रहा है, जो कि एमएलए के तौर पर अपने कार्यों और भाजपा के वोट बैंक के भरोसे हैं।

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कांग्रेस के उम्मीदवार भी दे रहे हैं कड़ी टक्कर
लक्ष्मी को कांग्रेस के 32 वर्षीय उम्मीदवार नारा भारत रेड्डी से भी कड़ी चुनौती मिल रही है, जो पूर्व एमएलए सूर्यनारायण रेड्डी के बेटे हैं। पिछले दो वर्षों से उन्होंने क्षेत्र में डेरा डाल रखा है और महामारी के समय भी लोगों की काफी मदद की कोशिश की थी। उनकी पार्टी को उम्मीद है कि कांग्रेस के बड़े-बड़े वादे और बीजेपी सरकार के खिलाफ नाराजगी उनके प्रत्याशी का काम आसान कर देगी।

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    कांग्रेस की राह में यह भी हो सकते हैं परेशानी
    लेकिन, कांग्रेस की मुश्किल जेडीएस उम्मीदवार अनिल लाड ने बढ़ा दी है। 2018 में वह भाजपा के सोमशेखर से 15 हजार से अधिक वोटों से हारे थे और पार्टी ने इस बार उनका टिकट काट लिया। चुनाव के जानकारों की मानें तो उन्होंने 10 हजार वोट भी जुटा लिए तो कांग्रेस का सपना चकनाचूर हो सकता है।

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    'जो ज्यादा खर्च करेगा, वही जीतेगा'
    वैसे अधिकतर राजनीतिक विश्लेषकों को यकीन है कि बेल्लारी में मनी पावर से ही चुनाव परिणाम तय होंगे। क्षेत्र में लिंगायतों, वाल्मीकि,कुरुबा और दलितों के वोट का मिलाजुला प्रभाव है। एक विश्लेषक के मुताबिक, 'चारों उम्मीदवारों के पास मनीबैग है और चुनाव की तारीख नजदीक आने पर वह अपने पर्स खोल देंगे। इसलिए जो भी अधिक खर्च करेगा, उसकी जीत की संभावना ज्यादा रहेगी।'

    बेल्लारी के चार उम्मीदवार की कुल संपत्ति 800 करोड़
    इन चारों उम्मीदवारों की कुल संपत्ति 800 करोड़ रुपए है। तीन महीने पहले भारत ने अपने जन्मदिन के मौके पर कथित तौर पर 60,000 घरों में गिफ्ट के रूप में कूकर वितरित किए थे। अरुणा लक्ष्मी के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने प्रत्येक वोटर को 2,000 रुपए की सिल्क सारी बांटकर उन्हें टक्कर देने की कोशिश की थी। लेकिन, जबतक वह ऐसा कर पातीं, आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गया।

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    1999 में सोनिया और सुषमा यहां से चुनाव लड़ी थीं
    राष्ट्रीय स्तर पर बेल्लारी 1999 के लोकसभा चुनाव में सुर्खियों में आया था। तब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और भाजपा की दिवंगत नेता सुषमा स्वराज यहां चुनाव लड़ी थीं। सुषमा चुनाव हार गईं, लेकिन उन्होंने क्षेत्र से अपना एक जुड़ाव बना लिया। वह वरमहालक्ष्मी उत्सव के लिए हर साल वहां जाती थीं।

    लेकिन, सोनिया ने अमेठी में भी जीत दर्ज की थी और उसी सीट को बरकरार रखा और बेल्लारी छोड़ दी। 2004 में कांग्रेस वहां ऐसी हारी कि फिर 14 वर्षों का यहां से उसे वोटरों ने वनवास दे दिया। 2019 में भी भाजपा ने यहां से अपना फिर परचम फहराया। (कुछ तस्वीरें सौजन्य:जनार्दन रेड्डी के ट्विटर, यूट्यूब वीडियो,सोशल मीडिया से )

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