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Karnataka CM: सिद्दारमैया ने क्यों लिया यू-टर्न? मुस्लिम 'तुष्टिकरण' की ओर लौटने की मजबूरी की 5 बड़ी वजह

Karnataka CM: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मुस्लिम ठेकेदारों को पब्लिक सिविल वर्क में 4% कोटा देने के रोके गए फैसले पर पुनर्विचार का संकेत देकर एक बार फिर उस राजनीति की ओर रुख कर लिया है, जिसे विपक्षी बीजेपी मुस्लिम 'तुष्टिकरण' कहती है और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा देती है।

मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के इस सियासी यू-टर्न के पीछे कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक कारण छिपे हुए हैं।

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आइए, जानते हैं कि आखिर सिद्दारमैया को इस ट्रैक पर लौटने की मजबूरी क्यों महसूस हुई-

Karnataka CM: 1. Ahinda वोट बैंक को मजबूत बनाए रखना

सिद्दारमैया हमेशा से ही Ahinda वोट बैंक पर निर्भर रहे हैं। कन्नड़ में यह शब्द संयुक्त रूप से अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलितों के संक्षेप के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। खुद कुरबा जाति से होने के कारण वे इस समीकरण को अपने पक्ष में बनाए रखना चाहते हैं।

सार्वजनिक सरकारी ठेकेदारी में मुस्लिम ठेकेदारों को 4% कोटा देने का प्रस्ताव उनकी इसी रणनीति का हिस्सा लगता है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय का समर्थन कांग्रेस के साथ-साथ अपने पक्ष में और भी मजबूत किया जा सके।

Karnataka Congress: 2. सीएम सिद्दारमैया पर दिसंबर भारी!

मई 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के समय से ही यह अटकलें हैं कि सिद्दारमैया सिर्फ 2 साल 6 महीने तक मुख्यमंत्री रहेंगे और उसके बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को यह पद सौंप दिया जाएगा। अगर इस बात में जरा भी दम है तो सिद्दारमैया का कार्यकाल इसी साल दिसंबर में पूरा होने वाला है।

हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई। लेकिन, अगर इसमें सच्चाई है तो सिद्दारमैया अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अपने पारंपरिक वोट बैंक को और मजबूत करने में लगे हो सकते हैं, ताकि आलाकमान उनसे सीएम पद छीनने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हो जाए।

Karnataka CM: 3. डीके शिवकुमार से मुकाबला

डीके शिवकुमार न केवल कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, बल्कि पार्टी के संकटमोचक और फंड मैनेजर भी माने जाते हैं। गांधी परिवार में उनकी मजबूत पकड़ है।

हालांकि, जातीय समीकरण की वजह से सिद्दारमैया को न चाहते हुए उन्हें उनके पद से अलग करना कांग्रेस आलाकमान के लिए आसान नहीं है। ऐसे में, मुस्लिमों को आरक्षण देने का फैसला सिद्दारमैया की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ताकि वे अपनी पकड़ बनाए रखते हुए शिवकुमार को चुनौती दे सकें, जो ढाई साल बाद अपनी दावेदारी फिर से जता सकते हैं।

Karnataka CM: 4. वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय की नाराजगी

कर्नाटक में वर्तमान में पब्लिक सिविल वर्क से जुड़ी ठेकेदारी में 24% आरक्षण दलितों (SC) और आदिवासियों (ST) के लिए, 4% ओबीसी(OBC)-श्रेणी 1 और 15% ओबीसी (OBC)-श्रेणी 2ए के लिए तय है, जिससे कुल 43% कोटा पहले से ही आरक्षित है।

यदि मुस्लिमों को ओबीसी-2बी श्रेणी में शामिल किया जाता है, तो यह आरक्षण बढ़कर 47% हो जाएगा। वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय पहले से ही इस कोटे से बाहर हैं, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ सकती है। चूंकि शिवकुमार खुद वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, इसलिए यह फैसला उनकी पकड़ को कमजोर कर सकता है।

Karnataka Muslim: 5. मुसलमानों के नाम पर कांग्रेस को मजबूर करने वाला दांव!

बीजेपी लगातार कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगाती रही है। 2024 के लोकसभा चुनावों से मुसलमानों के एक वर्ग ने कांग्रेस को बीजेपी विरोधी मुख्य विकल्प के रूप में फिर से देखना शुरू किया है। ऐसे में, कांग्रेस नेतृत्व भी सिद्दारमैया को रोकने में असमर्थ हो सकता है, क्योंकि इससे अल्पसंख्यक मतदाताओं में गलत संदेश जा सकता है।

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