हिंदी को ग्रांट, कन्नड़ को नहीं! भाषाई राजनीति पर फिर भड़के CM सिद्धारमैया, केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
CM Siddaramaiah language Row: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक बार फिर केंद्र की भाजपा सरकार पर भाषाई भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हिंदी और संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए फंड दे रही है, लेकिन देश की बाकी भारतीय भाषाओं की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।
सिद्धारमैया ने यह बयान शनिवार को बेंगलुरु में कर्नाटक राज्योत्सव के 70वें स्थापना दिवस (Karnataka Rajyotsava) के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि कर्नाटक को न सिर्फ भाषा के मामले में, बल्कि विकास फंड के बंटवारे में भी सौतेला व्यवहार झेलना पड़ रहा है।
"हिंदी थोपने की कोशिश जारी है"
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि देश में लगातार हिंदी थोपने की कोशिश हो रही है। हिंदी और संस्कृत के प्रचार के लिए अनुदान दिए जा रहे हैं, लेकिन बाकी भारतीय भाषाओं की कोई सुध नहीं ली जा रही। यह बात बहुत दुखद है। उन्होंने आगे कहा कि कन्नड़ जैसी प्राचीन भाषा, जिसे भारत की क्लासिकल लैंग्वेज (शास्त्रीय भाषा) का दर्जा मिला है, उसे उसके विकास के लिए पर्याप्त फंड नहीं दिए जा रहे। सिद्धारमैया ने कहा कि कन्नड़ भाषा के विकास के लिए लगातार अनदेखी की जा रही है। यह हमारे राज्य और हमारी संस्कृति के साथ अन्याय है।
"केंद्र से मिलता है सिर्फ छोटा हिस्सा"
सिद्धारमैया ने केंद्र पर यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक को उसके योगदान के मुताबिक फंड नहीं दिया जा रहा। हम हर साल केंद्र सरकार को लगभग ₹4.5 लाख करोड़ का राजस्व देते हैं, लेकिन हमें उसका बहुत ही छोटा हिस्सा वापस मिलता है। हमारे राज्य के विकास के लिए जरूरी धनराशि से वंचित रखा जा रहा है। सीएम ने लोगों से अपील की कि वे कन्नड़ विरोधी ताकतों का विरोध करें और अपनी भाषा व संस्कृति की रक्षा करें।
"अंग्रेजी और हिंदी कमजोर कर रही हैं बच्चों की प्रतिभा"
सिद्धारमैया ने शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाना जरूरी है, क्योंकि अंग्रेजी और हिंदी में शिक्षा देने से उनकी रचनात्मक सोच कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा, विकसित देशों के बच्चे अपनी मातृभाषा में सोचते, सीखते और सपने देखते हैं। लेकिन हमारे देश में अंग्रेजी और हिंदी के दबाव से बच्चों की प्रतिभा कमजोर हो रही है। हमें ऐसा कानून बनाना चाहिए जिससे मातृभाषा में ही पढ़ाई हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार कन्नड़ भाषा के साथ न्याय नहीं कर रही। कन्नड़ को उसका हक नहीं मिल रहा। इसे क्लासिकल लैंग्वेज का दर्जा मिला है, फिर भी इसके विकास के लिए जरूरी फंड नहीं दिए जा रहे। यह कन्नड़ की गरिमा के खिलाफ है।
कर्नाटक राज्योत्सव का महत्व
1 नवंबर को हर साल कर्नाटक राज्योत्सव मनाया जाता है। इसी दिन 1956 में कन्नड़ भाषी इलाकों को मिलाकर कर्नाटक राज्य (पहले मैसूर राज्य) की स्थापना हुई थी। इस दिन केरल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी अपने गठन दिवस मनाते हैं। पुडुचेरी भी इसी दिन फ्रेंच शासन से मुक्ति दिवस (Liberation Day) मनाता है।
सिद्धारमैया का यह बयान कर्नाटक में एक बार फिर 'कन्नड़ बनाम हिंदी' की बहस को गरमा सकता है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, केंद्र सरकार हिंदी को बढ़ावा देकर बाकी भाषाओं की अनदेखी कर रही है, जो देश की विविधता के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि कन्नड़ को उसका सम्मान और हक दिलाने के लिए राज्य की जनता को एकजुट होना होगा।












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