कर्नाटक विधानसभा चुनाव: इस चुनाव में भाजपा की ताकत और कमजोरी
नई दिल्ली। कर्नाटक में चुनाव प्रचार थम गया है। राज्य में शनिवार को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। ये चुनाव भले ही एक राज्य का है लेकिन इस पर निगाह पूरे देश की लगी है। इसकी बड़ी वजह है कि इसे 2019 लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल की तरह से देखा जा रहा है। इस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार है लेकिन भाजपा राज्य की सत्ता पाने के लिए तमाम कोशिश कर रही है। जहां अमित शाह ने लगातार कर्नाटक के दौरे किए हैं तो वहीं पीएम मोदी ने बीते एक हफ्ते में कर्नाटक में अपनी पार्टी भाजपा का तगड़ा प्रचार किया है। मोदी ने यहां 21 रैलियों को संबोधित किया है। भाजपा के सीएम कैंडिडेट बीएस येदुरप्पा भी लगातार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। आइए बताते हैं कि इस चुनाव में भाजपा की कौन सी कमजोरियां है, जो उसकी हार की वजह बन सकती हैं और पार्टी की वो मजबूती क्या है, जो उसे सत्ता तक पहुंचा सकती है।

ये हैं भाजपा के कमजोर पक्ष
- बीएस येदुरप्पा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, इन मामलों में जेल जाना और उनकी 75 साल से ज्यादा की उम्र।
- खनना माफिया कहे जाने वाले रेड्डी भाईयों और उनके रिश्तेदारों को आठ टिकट। येदुरप्पा का रेड्डी भाईयों की तारीफ करना।
- शोभा करंदलेजे और येदुरप्पा के बेटे को टिकट ना मिलने से कार्यकर्ताओं में असंतोष।
- जेल जा चुके सुब्रमण्यम नायडू और रेणुकाचार्य को टिकट देना।विधानसभा में पोर्न देखने वाले नेताओं को टिकट।
- स्थानीय तौर पर येदुरप्पा को छोड़ कोई बड़ा चेहरा नहीं।
- अनंत कुमार हेगड़े जैसे सीनियर नेताओं की गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी।
- नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हिन्दी में भाषणों के साथ जनता का ना जुड़ जाना।
- कर्नाटक दक्षिण का इकलौता राज्य है, जहां भाजपा अपने दम पर पांच साल तक सरकार चला चुकी है। पांच साल में येदुरप्पा, जगदीश शट्टर और सदानंद गौड़ा मुख्यमंत्री रहे।
- मोदी के केंद्र में चार साल होने के बावजूद उनका प्रभाव कर्नाटक के शहरी मतदाता पर काफी है।
- पिछली भाजपा सरकार के दौरान अच्छी कानून व्यवस्था भी पार्टी के पक्ष में।
- बीएस येदुरप्पा की अच्छे प्रशासक की छवि।
- ब्यूरोक्रेसी भाजपा की सरकार में खुश थी, नेताओं का दखल कम था।

मोदी-शाह के हिन्दी में भाषण













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