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इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर कपिल सिब्बल का पीएम पर हमला, क्या ऐसे ही आता है हाऊडी मोदी का पैसा

इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर कपिल सिब्बल का सरकार पर हमला, क्या ऐसे ही आता है हाउडी मोदी का पैसा

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर मोदी सरकार को घेरा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने गुरुवार को सवाल किया कि इस व्यवस्था के बाद निजी कंपनियों से आए कुल राजनीतिक चंदे का 95 फीसदी भाजपा को गया है बाकी 5 में सब हैं। ऐसा आखिर कैसे मुमकिन हुआ, इसकी जांच की जानी चाहिए। सिब्बल ने कहा ये कोई छोटा घपला नहीं है, मोदी खुद इस मामले में संसद के भीतर जवाब दें।

हाऊडी मोदी का पैसा क्या यहीं से आया?

हाऊडी मोदी का पैसा क्या यहीं से आया?

कपिल सिब्बल ने इलेक्टॉरेल बांड से आए पैसे को लेकर कहा कि हाऊडी मोदी का पैसा कहां से आया। पीएम मोदी विदेशों में जाकर लगातार बड़े कार्यक्रम करते हैं उन सबका पैसा कहां से आता है, क्या इन सब इवेंट के लिए इसी तरह से पैसा आ रही है। सिब्बल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी किसी भी मुद्दे पर जवाब नहीं देते। हमने जनता के सामने तथ्य रखे हैं,अब कुछ छुपा नहीं है। मोदी को जवाब देना चाहिए।

ससंद में भी हंगामा

ससंद में भी हंगामा

गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में भी इलेक्टोरल बॉन्ड का मुद्दा उठा। कांग्रेस का आरोप है कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सबसे ज्यादा पैसा भाजपा को जा रहा है और यह भ्रष्टाचार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चैधरी की अगुवाई में प्रश्नकाल के दौरान यह मामला उठाया और वेल में जाकर हंगामा किया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर और मनीष तिवारी ने भी मामले को उठाया। कांग्रेस का कहना है कि ये बहुत बड़ा स्कैम है।

गुलाम नबी आजाद ने भी उठाया मामला

गुलाम नबी आजाद ने भी उठाया मामला

राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने भी इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की है। आजाद ने कहा, इलेक्टोरल बॉन्ड इस वादे के साथ जारी किया जाता है कि देने वाले को अपनी पहचान उजागर नहीं करनी होगी। राजनीतिक पार्टियां भी उसकी पहचान नहीं बता सकती। इस योजना में राजनीतिक पार्टियों को फंड देने वाले का खुलासा नहीं होता। पैसे कोई गैंगस्टर, माफिया भी दे सकता है। चुनाव आयोग ने भी इसका विरोध किया था और आरबीआई ने भी। आरबीआई ने कहा था कि इससे मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिलेगा। इसके बावजूद प्रधानमंत्री कार्यालय ने दखल देकर इसमें बदलाव किया।

इलेक्टोरल बॉन्ड पर हाल ही में एक न्यूज वेबसाइट ने खुलासा किया है कि 2017 के बजट से ठीक पहले खुद आरबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड का विरोध किया था लेकिन मोदी सरकार ने आरबीआई की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए इलेक्टोरल बॉन्ड की घोषणा कर दी। इससे राजनीतिक पार्टियों को बिना पहचान बताए चंदा देने का रास्ता साफ हुआ और सबसे ज्यादा चंदा भाजपा को मिला। इसके बाद 95 फीसदी चंदा भाजपा को मिला।

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