कानपुर एनकाउंटर: मोस्‍टवांटेड विकास दुबे लगाता था खुद की 'कचहरी', दूर-दूर से सेटलमेंट के लिए आते थे लोग

कानपुर एनकाउंटर: मोस्‍टवांटेड विकास दुबे लगाता था खुद की 'कचहरी', दूर-दूर से सेटलमेंट के लिए आते थे लोग

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में कानपुर देहात के बिठूर थाना क्षेत्र में गुरुवार रात एक बजे दबिश देने गई पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग करने वाले हिस्‍ट्री सीटर का उसके इलाके में जबरदस्‍त खौफ हैं। यूपी के इस शाति अपराधी के खिलाफ 60 आपराधिक मामले दर्ज हैं। गुरुवार को हुई 8 पुलिसकर्मियों की हत्‍या की घटना के बाद हिस्‍ट्रीसीटर विकास दूबे के खौफ से जुड़े कई किस्‍से हैं। कानपुर में कुख्यात अपराधी विकास दुबे अपने घर पर कचहरी लगाता था और , दूर-दूर से सेटलमेंट के लिए आते थे। अभी हाल ही कोरोना काल में हुए लॉकडाउन का विकास दूबे से जुड़ी बात सामने आई हैं। जिसे सुनकर आप स्‍वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि उसका उसके क्षेत्र में कितनी दबंगई चलती हैं।

मोस्‍टवांटेड विकास दुबे लगाता था खुद की 'कचहरी'

मोस्‍टवांटेड विकास दुबे लगाता था खुद की 'कचहरी'

हिस्‍ट्री सीटर का उसके क्षेत्र में इतना खौफ है कि लोग अपने आपसी विवाद और समस्‍याएं सुलझाने के लिए पुलिस और कोर्ट जाने के बजाए विकास दूबे के दरबार में जाते हैं और विकास दूबे जो फैसला सुनाता है मजाल है कि कोई उसको न माने। मालूम हो कि लॉकडाउन में विकास दूबे के क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी को घाटा होने के कारण कई लोगों की छंटनी करनी पड़ी। लेकिन इस फैसले को लागू करने से पहले कंपनी को विकास दुबे से इजाजत लेनी पड़ी। एक व्‍यक्ति ने नाम न छापने की शर्त बताया कि कंपनी के कर्मचारी इसकी शिकायत लेकर विकास दुबे के पास पहुंच गए थे। जिसके बाद कंपनी की ओर से विकास दुबे के सामने कंपनी ने गुहार लगाई और भरोसा दिया कि बाद में आप जैसा चाहेंगे वैसी ही कर लेंगे।

 विकास दूबे के खिलाफ दर्ज हैं ये सारे केस

विकास दूबे के खिलाफ दर्ज हैं ये सारे केस

बता दें अपराधी हिस्टीशीटर विकास दुबे के अपराधों की लंबी फेहरिस्‍त है। 19 साल पहले साल 2001 में यूपी में राजनाथ सरकार के समय में विकास दूबे ने कानपुर देहात के शिवली थाने के अंदर घुस कर इंस्पेक्टर रूम में बैठे तत्कालीन श्रम संविदा बोर्ड के चैयरमेन, राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त भाजपा नेता संतोष शुक्ल पर गोलियों की बौछार करते हुए गोलियों से भून दिया था।इस हाई-प्रोफाइल मर्डर के बाद उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया और कुछ माह के बाद जमानत पर बाहर आ गया था। बताया जाता है कि थाने में घुसकर राज्यमंत्री की हत्या का आरोप लगने के बावजूद भी उसका कुछ नहीं हुआ। इस बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद भी किसी पुलिसवाले ने विकास के खिलाफ गवाही नहीं दी। कोई गवाह न मिलने के कारण केस से बरी हो गया। यहां से विकास दुबे का नाम उत्तर प्रदेश के खतरनाक अपराधियों में शामिल हुआ। वर्ष 2004 में केबिल व्यवसायी दिनेश दुबे की हत्या के मामले में भी विकास आरोपी है।

राजनीति संरक्षण के कारण अब तक नहीं कस सका कानून का शिकंजा

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बता दें ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र में पिछड़ों का दबदबा कम करने के लिए हिस्‍ट्री सीटर विकास दूबे को सत्‍ताधारी पार्टियों का राजनीतिक संरक्षण मिलता गया। जिसके संरक्षण में विकास क्षेत्र में दबंगई के साथ मारपीट करता रहा, थाने पहुंचते ही नेताओं के फोन आने शुरू हो जाते थे।कुछ दिनों बाद विकास का कद इतना बढ़ा हो गया कि पुलिस ने भी उसे सलाम ठोकना शुरु कर दिया। विकास दूबे का राजनीति में अच्‍छी पकड़ हैं कहां जाता हैं कि कई कैबिनेट मंत्रियों से उसके ताल्‍लुक रहे हैं। यहीं कारण है कि विकास दुबे को नेताओं को संरक्षण प्राप्‍त है यही कारण है कि उसका अभी तक कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाया है। यहीं कारण है कि राज्य में जिस किसी की भी पार्टी की सरकार होती वह उसका साथी बन जाता हैं। उत्‍तर प्रदेश की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के साथ वह हाथ मिला चुका है।

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