Yoga Day: कंगना रनौत ने बताया कैसे बहन रंगोली पर हुए एसिड अटैक के बाद योग ने दी उन्हे जीने की चाह

Yoga Day: कंगना रनौत ने बताया कैसे बहन रंगोली पर हुए एसिड अटैक के बाद योग ने दी उन्हे जीने की चाह

नई दिल्ली, 21 जून: बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने सांतवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर अपनी बहन रंगोली को योग से हुए फायदे के बारे में बताया है। कंगना ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है कि कैसे बहन रंगोली अपने ऊपर हुए एसिड अटैक के बाद टूट गई थीं लेकिन योग करने से उन्हें नई जिंदगी मिली और जीने की फिर से उम्मीद जगी। कंगना रनौत ने इससे पहले बताया था कि किस तरह योग की मदद उनकी मां की हार्ट सर्जरी नहीं करनी पड़ी। कंगना रनौत की बहन रंगोली एक एसिट सर्वाइर रह चुकी हैं। कंगना रनौत ने पहले भी इस बात का जिक्र किया है।

एसिट अटैक के बाद रंगोली की हुई थी 53 सर्जरी

एसिट अटैक के बाद रंगोली की हुई थी 53 सर्जरी

कंगना रनौत ने कहा, ''रंगोली की योग कहानी सबसे ज्याद प्रेरित करने वाली है। 21 साल की उम्र मं एक सड़क छाप रोमियो ने रंगोली पर एसिड फेंक दिया था। वह थर्ड डिग्री जल गई। उसका आधा चेहरा जल गया था, एक आंख की रोशनी चली गई थी, कान पिघल गया था, ब्रेस्ट को गंभीर रूप से नुकसान हुआ था। 2-3 साल में रंगोली को 53 सर्जरी से गुजरना पड़ा। लेकिन रंगोली का मानसिक स्वास्थ्य मेरी सबसे बड़ी चिंता थी, क्योंकि एसिड अटैक के बाद रंगोली ने बिल्कुल बोलना बंद कर दिया था, चाहे कुछ भी हो जाए वो एक शब्द भी नहीं बोलती थी।''

एसिड अटैक के बाद रंगोली के साथ मंगेतर ने तोड़ा रिश्ता

एसिड अटैक के बाद रंगोली के साथ मंगेतर ने तोड़ा रिश्ता

कंगना ने आगे कहा, '' एसिड अटैक के बाद मेरी बहन मानों एक दम खाली सी हो गई थी। उसकी वायु सेना के एक अधिकारी से सगाई हुई थी, लेकिन एसिड अटैक के बारे में जब उसे पता चला तो वह मेरी बहन को छोड़कर चला गया और फिर कभी नहीं लौटा। सगाई टूटने पर भी रंगोली रोई नहीं, उसकी आंखों से आंसू नहीं निकले और कुछ भी नहीं कहा। जब डॉक्टरों से बात की तो पता चला कि वह गहरे सदमे की स्थिति में है, डॉक्टरों ने इलाज किया और रंगोली को मेंटर हेल्थ के लिए दवा भी दी लेकिन उसका कोई खास असर नहीं हुआ।''

कंगना बोलीं- योग ने रंगोली को दी नई जिंदगी

कंगना बोलीं- योग ने रंगोली को दी नई जिंदगी

कंगना रनौत ने आगे कहा, ''उस वक्त मैं मुश्किल से 19 साल की थी, तभी से मैं अपने शिक्षक सूर्य नारायण के साथ योग किया करती थी। लेकिन मुझे उस वक्त ये नहीं पता था कि योग से मानसिक अवसाद और सदमे में गए रोगियों को मदद मिलती है, और आंखों की रोशनी भी वापस आ सकती है। मैं ये चाहती थी कि रंगोली मेरे से बात करें, इसलिए मैं रंगोली को अपने साथ हर जगह ले जाने लगी। यहां तक की रंगोली के साथ ही योगा क्लासेज में भी ले जाने लगीं। उसने योगाभ्यास करना शुरू किया और मैंने उसमें गजब का बदलाव देखा। इसके बाद रंगोली ने न सिर्फ बात करना शुरू किया बल्कि मेरे खराब चुटकुलों का जवाब देना भी शुरू किया। उसकी एक आंख में अपनी खोई रोशनी भी वापस पा ली, योग आपके हर प्रश्न (दुख) का उत्तर है, क्या आपने इसे अभी तक मौका दिया है?''

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