Kangana Ranaut: BJP ने कंगना रनौत पर क्यों लगाया दांव? हिमाचल की मंडी सीट से आगे तक की है सोच!
Kangana Ranaut BJP Candidate from Mandi Lok Sabha: फिल्म स्टार का चुनाव मैदान में उतारना कोई नहीं बात नहीं है। इसलिए कंगना रनौत को अगर बीजेपी ने हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा से टिकट दिया है तो उसमें भी कोई खास बात नहीं है। लेकिन, अगर उनके राजनीतिक बैकग्राउंड को देखें तो वह बीजेपी के लिए हेमा मालिनी और कांग्रेस की उर्मिला मातोंडकर या नगमा से कहीं अलग हैं।
कंगना रनौत भले ही चुनावी राजनीति में नई हों, लेकिन उनके लिए राजनीति नई नहीं है। पूरी तरह से वामपंथी विचारधारा से घिरे बॉलीवुड में उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में खुद को हिंदुत्व की विचारधारा की पैरोकार की तरह पेश करके बहुतों से लोहा लिया है। उन्होंने खुद को एक स्वतंत्र विचारों वाली, छोटे शहर से मायानगरी में स्थापित होने वाली मजबूत महिला के रूप में पेश किया है।

राजनीतिक बयानों की वजह से सुर्खियों में रही हैं कंगना
कंगना रनौत बॉलीवुड की वह शख्सियत हैं, जिन्होंने 'तनु वेड्स मनु' और 'मणिकर्णिका' जैसी हिट फिल्में दी हैं तो जयललिता के जीवन पर आधारित 'थलाइवी' और 'इमरजेंसी' जैसी बायोपिक में इंदिरा गांधी का अभिनय करके अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का भी संकेत दिया है। लेकिन, हाल के दिनों में वे फिल्मों से ज्यादा अपने राजनीतिक बयानों की वजह से सुर्खियों में रही हैं, जिसपर बीजेपी की विचारधारा की छाप दिखाई पड़ी है।
मंडी से आगे की सोच रही है बीजेपी!
अगर हम यह समझ लें कि कंगना को मंडी से टिकट देकर भाजपा ने सिर्फ एक सीट को साधने की कोशिश की है तो शायद हम भूल कर रहे हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मंडी उसी हिमाचल में है, जहां सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी भीतरघात से परेशान है। ऐसे में राजपूत जाति से आने वाली कंगना रनौत पर बीजेपी ने सिर्फ मंडी या हिमाचल को ध्यान में रखकर ही दांव लगाया है, यह पूरी तरह से सही नहीं है।
बहुत बड़ा वोट बैंक हैं महिला वोटर
कंगना को टिकट देकर भाजपा ने पूरे उत्तर भारत में कई तरह के राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है। कंगनी उस आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनके वोटरों को लुभाने के लिए आज हर पार्टी लालायित है। आज की तारीख में महिला वोटर बहुत ही सक्रिय वोट बैंक के रूप में उभरी हैं। कई चुनाव क्षेत्रों में महिला वोटरों की तादाद पुरुष मतदाताओं को पार कर चुकी है।
चुनावी राजनीति में बढ़ रही है महिला वोटरों की दिलचस्पी
अभी जितने नए मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल हुए हैं, उनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा है। 2019 के लोकसभा चुनावों से लेकर कई विधानसभा चुनावों में भी वोट डालने वालों में महिला वोटरों की संख्या ज्यादा रही है। पिछले 5 वर्षों में जिन 23 बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनमें से 18 में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मतदान किया है।
महिला वोटर बदल रही हैं राजनीति की दशा और दिशा
बीजेपी हो या कांग्रेस सभी पार्टी ने अपनी कल्याणकारी योजनाओं में इस वोट बैंक को लुभाने की तमाम कोशिशें की हैं। मध्य प्रदेश में भाजपा तमाम भविष्यवाणियों को नकारते हुए फिर से सत्ता पर काबिज हुई है तो श्रेय लाडली बहना योजना को दिया जाता है। उसी तरह हिमाचल, कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस बाजी पलट पाई ही तो इसमें भी महिलाओं से किए गए वादों को बड़ा फैक्टर माना जाता है।
युवा महिला वोटरों की रोल मॉडल हैं कंगना रनौत!
आज की तारीख में छोटे शहरों की युवा महिला वोटरों में कंगना रनौत ने खुद को एक आइकन की तरह स्थापित किया है। रील लाइफ से लेकर रीयल लाइफ तक में उनका किरदार युवा महिला वोटरों को प्रभावित करने का दम रखता है। उन्होंने ऐसी युवा महिलाओं के मन में खुद को एक सेल्फ-मेड, स्वतंत्र विचारों वाली परफेक्ट स्मॉल टाउन गर्ल के रूप में स्थापित किया है, जो मायनगरी में अपने दम पर ही बॉलीवुड की तमाम बंदिशों को तोड़ने में सफलता पाई है।
उनकी एक ऐसी छवि बनी है, जो बॉलीवुड की नामचीन हस्तियों को चुनौती देती है। बीजेपी के लिए चुनावों के लिहाज से इस परफेक्ट रोल मॉडल से बेहतर क्या हो सकता है।
कंगना रनौत के खून में दौड़ती है राजनीति!
जहां तक 37 वर्षीय कंगना के परिवार का राजनीति से रिश्ते की बात है तो उनके दिवंगत दादा सरजु राम मंडी जिले की ही पुरानी गोपालपुर सीट से कांग्रेस विधायक थे। इसीलिए ये कहें कि राजनीति तो उनके खून में भी दौड़ रही है तो यह गलत नहीं होगा।












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