कंधार कांड: फारुख अब्दुल्ला नहीं चाहते थे कि आतंवादियों को छोड़ा जाये
नई दिल्ली। भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ(RA&W) के पूर्व प्रमुख एएस दुलत ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि कंधार कांड के वक्त आंतकियों को रिहा करने पर तत्कालीन सीएम फारूक अब्दुल्ला बहुत ज्यादा नाराज हो गये थे। पूर्व प्रमुख ने यह बात अपनी किताब 'कश्मीर-द वाजपेयी ईयर्स' में लिखी है।
अपनी किताब में 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के हाईजैक की बात का जिक्र करते हुए दुलत ने लिखा है कि फारूक अब्दुल्ला बिल्कुल नहीं चाहते थे कि आतंकवादियों को छोड़ा जाये इसलिए उन्होंने बार-बार जृसंवत सिंह को फोन करके अपना गुस्सा प्रकट किया था, वो बार-बार चिल्ला रहे थे कि जिन्हें छोड़ने की बात हो रही है वो कश्मीरियों का हत्यारा है, वो लगातार तीन घंटे तक फोन पर चिल्लाते रहे। इसके बाद वो अपना इस्तीफा भी देने को तैयार थे।
फारूख ने कहा था कि केन्द्र सरकार कमजर पड़ गई है
मालूम हो कि साल 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 को अगवा कर लिया गया था और यात्रियों के बदले तीन खूंखार आतंववादियों को छोड़ने की बात हुई थी। उस समय विमान में 155 यात्री सवार थे।
बात समझने में हुई थी गलती इसलिए विमान उड़ गया था
फारुख अब्दुल्ला को लगा कि केंद्र की बाजपेई सरकार का फैसला एक 'गलती' है और वह इस्तीफे के इरादे से राज्यपाल गिरीश चंद्र सक्सेना के साथ बैठक के लिए पहुंचे थे, हालांकि राज्यपाल ने उन्हें शांत कराया। किताब में यह भी लिखा है कि थोड़ी सी असमंजस और सही वार्तालाप ना हो पाने की वजह से आतंवादियों ने विमान को हाईजैक कर लिया था।
फारूख इस्तीफा देने को तैयार थे
गौरतलब है कि दुलाट साल 2000 तक रॉ के प्रमुख रहे और बाद में अटल बिहारी वाजपेयी के समय प्रधानमंत्री कार्यालय में कश्मीर मुद्दे पर विशेष सलाहकार थे।













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