Kamal Haasan News: "तमिलों ने अपनी भाषा के लिए जानें दी हैं, इसके साथ खेलो मत" कमल हसान ने ऐसा क्यों कहा?
Kamal Haasan News: अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने शुक्रवार,20 फरवरी को तमिलों के बीच भाषा के महत्व को बताया और ऐसे मामलों को हल्के में न लेने की चेतावनी दी। साउथ सुपरस्टार की यह टिप्पणी दक्षिणी राज्य में केंद्र और एमके स्टालिन की डीएमके सरकार के बीच चल रहे भाषा विवाद के बीच आई है।
तमिलनाडु में नई शिक्षा नीति (NEP) को लेकर भाजपा और डीएमके के बीच तीखी राजनीतिक तनातनी चल रही है।
कमल हासन अपनी पार्टी मक्कल नीधि मैयम (MNM) के 8वें स्थापना दिवस पर एक भाषण के दौरान कहा, "तमिलों ने एक भाषा के लिए अपनी जान गंवाई है। उन चीजों के साथ मत खेलो। तमिल लोगों और यहां तक कि बच्चों को भी पता है कि उन्हें किस भाषा की जरूरत है। उन्हें इस बात का ज्ञान है कि उन्हें किस भाषा की जरूरत है।"

कमल हसान ने ये बात अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा है। बता दें कि, साउथ सुपरस्टार हसान की पार्टी MNM ने 2024 लोकसभा चुनावों के दौरान तमिलनाडु में डीएमके और इंडिया ब्लॉक का समर्थन किया था।
फिर से क्यों शुरु हुआ ये विवाद
दक्षिणी राज्यों में हिंदी बनाम दक्षिणी भाषा को लेकर कई सालों से विवाद चलता आ रहा है और ये विवाद तब फिर से शुरू हो गया जब तमिलनाडु में नई शिक्षा नीति (NEP) लागू करने की बात कही गई। इस नीति के विरोध में राज्य के हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए और इसके खिलाफ प्रदर्शन करने लगे। वहीं, सीएम स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के तहत 2,152 करोड़ रुपये की धनराशि तत्काल जारी करने की मांग करते हुए एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उस टिप्पणी पर चिंता व्यक्त की जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर तमिलनाडु एनईपी को लागू नहीं करता है तो उसे ये धनराशि नहीं दी जाएगी।
तमिलनाडु सीएम ने पीएम को लिखी चिट्ठी
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा, "इससे हमारे राज्य के छात्रों, राजनीतिक दलों और आम जनता में भारी चिंता और अशांति पैदा हो गई है।" उन्होंने इस मामले में पीएम मोदी से सीधे हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। शिक्षा मंत्री प्रधान ने स्टालिन के इस पत्र पर पलटवार करते हुए सभी दक्षिणी राज्यों से छात्रों के लाभ के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री मोदी को स्टालिन द्वारा लिखे गए इस पत्र का जवाब देते हुए प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि एनईपी भारत की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों तक बढ़ाने का प्रयास करती है जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाना है। शिक्षा मंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि ये नीति किसी विशेष भाषा को लागू नहीं करती है।
शिक्षा मंत्री के दावे पर स्टालिन का पलटवार
शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया का स्टालिन ने एक और जवाब दिया, जिन्होंने केंद्र को "तमिलों की पहचान को चुनौती देने" के खिलाफ चेतावनी दी।उन्होंने कहा "मैं केंद्र सरकार को चेतावनी देता हूं कि मधुमक्खी के छत्ते को मत छेड़ो। तमिलों की पहचान को चुनौती मत दो। जब तक मैं यहां हूं, जब तक डीएमके यहां है, इस धरती पर तमिल, तमिलनाडु या तमिलों के खिलाफ कुछ भी नहीं होने दिया जाएगा।"
शिक्षा मंत्री प्रधान के प्रधान के दक्षिणी राज्यों द्वारा शिक्षा का राजनीतिकरण करने के दावे पर मुख्यमंत्री ने कहा, "हम लोगों के कल्याण के लिए धन का उपयोग करते हैं। आप इसका उपयोग धार्मिक विभाजन पैदा करने और हिंदी थोपने के लिए करते हैं। (एनईपी) शिक्षा में सुधार के लिए नहीं बल्कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए पेश किया गया है। सीधे तौर पर लागू करने पर इसका कड़ा विरोध होगा, इसलिए इसे नई शिक्षा नीति के रूप में पेश किया गया है।
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