JP Nadda: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जेपी नड्डा का कार्यकाल क्यों बढ़ाया गया ? 5 कारण जानिए
बीजेपी ने जेपी नड्डा का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का कार्यकाल अगले साल जून तक बढ़ाया है, जिसके पांच मूल कारण माने जा सकते हैं। इनमें से एक ये है कि नए अध्यक्ष के लिए आने वाले चुनाव की तैयारियों के लिए ज्यादा वक्त नहीं था।

BJP National President JP Nadda: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को करीब डेढ़ साल का कार्यकाल विस्तार मिल गया है। वह 2019 से ही इस पद पर कार्यरत हैं। भाजपा ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी उन्हीं के नेतृत्व में अगला लोकसभा चुनाव लड़ेगी। इस लिहाज से उनका कद पार्टी में और बढ़ गया है। 2014 में जब भाजपा की पहली पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी तो राजनाथ सिंह पार्टी अध्यक्ष थे। 2019 में बीजेपी ने अमित शाह की अध्यक्षता में चुनाव लड़ा और लोकसभा में पार्टी के सांसदों का आंकड़ा 300 के पार कर गया था। अगली बार पार्टी इससे भी ज्यादा सीटें जीतने का टारगेट लेकर चल रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वे कौन से 5 कारण रहें हैं, जिसकी वजह से भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने जेपी नड्डा के नाम सर्वसम्मति से मुहर लगाई है।
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बीजेपी जेपी नड्डा के नेतृत्व में ही लड़ेगी 2024 का लोकसभा चुनाव
बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के जेपी नड्डा को ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले के बारे में जानकारी देकर गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी के अंदर और बाहर चल रही सारी संभावनाओं और अटकलों पर विराम लगा दिया है। शाह ने साफ किया है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से निर्णय किया है कि जून, 2024 तक जगत प्रकाश नड्डा ही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहेंगे। एक लाइन में साफ हो गया है कि 2024 का लोकसभा चुनाव बीजेपी जेपी नड्डा के नेतृत्व में ही लड़ेगी। जेपी नड्डा अमित शाह के गृहमंत्री बनने के बाद से 2019 से ही राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं। यानि करीब साढ़े तीन साल से और वह करीब पूरे पांच साल तक इस पद पर रहेंगे। प्रश्न है कि पार्टी ने यह फैसला क्यों लिया है ?

भाजपा अध्यक्ष के तौर पर जेपी नड्डा का प्रदर्शन कैसा है ?
आगे बढ़ने से पहले भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर जेपी नड्डा की परफॉर्मेंस पर एक सरसरी नजर डाल लेना आवश्यक है। खुद अमित शाह के मुताबिक नड्डा के कार्यकाल में बिहार में बीजेपी का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा रहा। महाराष्ट्र में भी एनडीए ने बहुमत के साथ चुनाव जीता था। उत्तर प्रदेश में भी पार्टी को फिर से जीत मिली। पश्चिम बंगाल में पार्टी एमएलए की संख्या काफी बढ़ी। उत्तर-पूर्व में भी बेहतर काम हुआ। गुजरात में तो प्रचंड जीत हासिल हुई। यह वो कामयाबी है, जो नड्डा के रहते पार्टी को मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, हिमाचल प्रदेश में भाजपा को मिली हार नड्डा के करियर के लिए सबसे बड़ा दाग माना जा सकता है। यह उनका गृहराज्य भी है। यहां चुनाव के दौरान बागियों ने उनपर निजी तौर पर आरोप भी लगाए थे। लेकिन, ओवरऑल उनका प्रदर्शन वाकई वैसा ही सफल रहा है, जैसा शाह बता गए हैं।

जेपी नड्डा का कार्यकाल बढ़ाने के 5 कारण
वन इंडिया ने जेपी नड्डा के कार्यकाल में करीब डेढ़ साल के विस्तार के बारे में भाजपा के कुछ सूत्रों से बात की है। इस बातचीत के मुताबिक नड्डा को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए रखने के मुख्य तौर पर 5 वजहें मानी जा रही हैं।
1) 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव, जिसकी तैयारी के लिए नए अध्यक्ष को कम समय मिलता।
2) नए अध्यक्ष को संगठन रीस्ट्रक्चर करने में 4-5 महीने लग जाते।
3) मौजूदा समय में नड्डा से बेहतर विकल्प सिर्फ अमित शाह ही हो सकते थे।
4) संगठन का लंबा अनुभव, जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए सुलभ।
5) मृदुभाषी

नड्डा सभी 9 राज्यों में जीत सुनिश्चित करने का कर चुके हैं आह्वान
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक जब राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने उन्हें औपचारिक तौर पर 2024 के लोकसभा चुनाव करवाने तक की जिम्मेदारी सौंपी है, उससे पहले ही उन्होंने 9 राज्यों में पार्टी को जिताने का चैलेंज खुद स्वीकार करके चुनाव जीतने के प्रति अपना मनोबल दिखाने का काम किया है। नड्डा ने सोमवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया था, '2023 बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण वर्ष है, क्योंकि उसे 9 राज्यों में चुनाव लड़ना है...' उन्होंने कहा, 'सभी विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत सुनिश्चित करना है, जो कि 2024 के आम चुनावों से पहले होने हैं।'

पीएम मोदी के भी भरोसेमंद रहे हैं जेपी नड्डा
भाजपा सूत्रों का कहना है कि देश के मौजूदा राजनीतिक हालात में नड्डा से बेहतर विकल्प शायद गृहमंत्री अमित शाह ही हो सकते थे। शाह ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। अगली बार पार्टी उससे भी बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य लेकर चल रही है। सबसे बड़ी बात कि नड्डा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत ही भरोसेमंद माने जाते हैं। दोनों ही नेता ऐसे हैं, जो भारतीय जनता पार्टी में मामूली कार्यकर्ता से उठकर शीर्ष तक पहुंचे हैं। पिछले कई चुनावों से दोनों में अच्छा तालमेल बना हुआ है। शायद यही सारे कारण रहे कि बीजेपी ने चुनाव के मुहाने पर आकर कोई नया प्रयोग करने का जोखिम नहीं लिया है।
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