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JNU Student Union Polls: जेएनयू का बदला राजनीतिक नक्शा, लाल सलाम के गढ़ में एबीवीपी की सेंध

JNU Student Union Polls: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रसंघ चुनावों में इस बार एक बड़ा और ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए वामपंथ के गढ़ में पहली बार बढ़त बनाते हुए दिख रही है।

27 अप्रैल को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटि में छात्रसंघ का चुनाव हुआ जिसमें यहां ABVP ने 42 में से 23 काउंसलर सीटों पर जीत दर्ज की है। वर्षों से वामपंथी दलों का मजबूत गढ़ रहे इलाकों में एबीवीपी ने जबरदस्त सेंध लगाई है, जिससे छात्र राजनीति में एक नया समीकरण बनता नजर आ रहा है।

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JNU Student Union Polls: 25 साल बाद ABVP का कमबैक

चुनाव परिणामों के अनुसार, एबीवीपी छात्रसंघ के चारों प्रमुख केंद्रीय पदों-अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिवपर भी बढ़त बनाए हुए है। मतगणना का कार्य अभी जारी है, लेकिन शुरुआती रुझान एबीवीपी के पक्ष में बेहद उत्साहजनक रहे हैं।

सबसे बड़ी बात यह रही कि पिछले 25 वर्षों में पहली बार एबीवीपी ने जेएनयू के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (एसएसएस), में दो सीटें जीत ली हैं। एसएसएस को अब तक वामपंथी छात्र संगठनों का अभेद्य किला माना जाता था। इसके अलावा, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस) में भी एबीवीपी ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए महत्वपूर्ण बढ़त हासिल की है।

JNU Student Union: छात्रों में बदला राजनीतिक माहौल!

इस बार के छात्र चुनावों में इस बदलाव को ऐतिहासिक सफलता के रुप में देखा जा रहा है और विश्विद्यालय परिसर में बदलते राजनीतिक समीकरणों और माहौल का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। दरअसल, जेएनयू लंबे समय से वामपंथी विचारधारा का गढ़ रहा है लेकिन जिस तरह से इस बार विश्वविद्यालय में एबीवीपी का प्रदर्शन रहा है उसे JNU परिसर में छात्र राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

JNU छात्र राजनीति के जानकारों का मानना है कि विश्वविद्यालय परिसर में बदले इस समीकरण के पीछे न केवल एबीवीपी के संगठित प्रयास हैं, बल्कि छात्रों की बदलती सोच और राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी जागरूकता भी एक बड़ी वजह रही है।

एबीवीपी की इस शानदार जीत पर संगठन के नेताओं ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सफलता छात्रों के विश्वास और संगठन के निरंतर परिश्रम का परिणाम है। एक वरिष्ठ एबीवीपी नेता ने कहा कि यह केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि विचारों की जीत है। छात्रों ने राष्ट्रवाद, विकास और सकारात्मक छात्र राजनीति को समर्थन दिया है। हम जेएनयू को एक शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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