JNU देशद्रोह केस: दिल्ली सरकार का आरोप-पुलिस ने जल्दीबाजी में दाखिल किया आरोपपत्र
नई दिल्ली। जेएनयू देशद्रोह मामले में दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल कर दिया। दिल्ली सरकार की ओर से दाखिल किए गए जवाब में दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि, पुलिस ने गुपचुप तरीके से और जल्दीबाजी में आरोपपत्र दाखिल किया है और कन्हैया कुमार तथा अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने के संबंध में फैसला लेने के लिए सरकार को एक महीने से ज्यादा वक्त लगेगा।

AAP सरकार ने मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दीपक शेरावत के समक्ष पेश किए अपने जवाब में पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस ने सक्षम अधिकारी से आवश्यक मंजूरी प्राप्त किए बिना चुपके से और जल्दबाजी में चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने इससे पहले राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मुकदमा चलाने की अनुमति देने के संबंध में स्पष्ट समय सीमा के साथ उचित जवाब दाखिल करे।
इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होनी तय हुई है। दिल्ली सरकार ने पटियाला हाउस कोर्ट में कहा, चार्जशीट पर फैसला स्टैंडिंग काउंसिल की सलाह मिलने के एक महीने के भीतर लिया जाएगा। इस मामले पर अभी दिल्ली सरकार की सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल की सलाह नहीं ली गई है जिसका इंतजार है। दिल्ली सरकार ने इस अपने इस जवाब में यह भी कहा कि, अभी तक यह भी तय नहीं किया है कि जो कथित नारे लगाए गए वो देशद्रोही थे या नहीं।
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गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा के डीसीपी प्रमोद कुशवाह ने इससे पहले अदालत से कहा था कि एजेंसी ने पहले ही अनुमति के लिए दिल्ली सरकार को अनुरोध भेज दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि मंजूरी लेना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसके बिना भी आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है। 14 जनवरी को, पुलिस ने कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ अदालत में एक आरोप पत्र दायर किया था, जिसमें कहा गया था कि वह 9 फरवरी, 2016 को एक कार्यक्रम के दौरान जेएनयू परिसर में देशद्रोही नारे लगाए गए थे।












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