जीतनराम मांझी की राष्ट्रपति कोविंद को चिट्ठी, रामविलास पासवान को भारत रत्न देने की मांग
नई दिल्ली। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने मरहूम केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के भारत रत्न दिए जाने की मांग की है। मांझी ने इसको लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखी है। मांझी ने कहा है कि भारतीय राजनीति में एक लंबे समय तक जिस तरह से पासवान ने काम किया और कमजोर वर्गों की आवाज उठाई, उसे देखते हुए उनको भारत रत्न मिलना चाहिए।
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भाजपा नेता और बिहार सरकार में कृषिमंत्री डॉ प्रेम कुमार ने भी रामविलास पासवान को भारत रत्न देने की मांग की है। प्रेम कुमार ने ट्वीट कर रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा- शोषितों, वंचितों, दलितों के उत्थान के लिए हमेशा मुखर रहने वाले तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए आजीवन कार्य करने वाले महान राजनीतिज्ञ परम आदरणीय स्व. रामविलास पासवान जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।
एलजेपी प्रवक्ता असरफ ने प्रेम कुमार की मांग पर कहा है कि एलजेपी इस मांग को सहज स्वीकार करती है। इस सदी की राजनीति ने एक महानायक को खोया है अगर भारत सरकार ये उपाधि उन्हें देती है, तो ये उनकी एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
लोकजन शक्ति पार्टी के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार शाम निधन हो गया था। शुक्रवार शाम पासवान का पार्थिव शरीर वायुसेना के विशेष विमान से पटना पहुंचा। जिसके बाद आज (शनिवार) पटना के दीघा स्थित जनार्दन घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ। बेटे चिराग पासवान ने मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं।
74 साल के रामविलास पासवान केंद्र और बिहार की राजनीति में करीब 5 दशकों तक अहम चेहरा रहे। 1969 में वो पहली बार विधायक बने, फिर सांसद और मंत्री रहे। राम विलास पासवान के नाम छह प्रधानमंत्रियों के साथ मंत्री रहने का रिकॉर्ड है। वे वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल रहे हैं। बीते तीन दशकों में वो काफी समय केंद्र में मंत्री रहे हैं।












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