तो नीतीश के लिए खतरा बन सकती है मांझी-मोदी की मुलाकात!
नई दिल्ली। एक तरफ बिहार में राजनीतिक उबाल आया हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ मौजूदा सीएम जीतन राम मांझी ने दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात करके इस उबाल को नया मोड़ दे दिया है। नीति आयोग की पहली बैठक में शामिल होने आये जीतन राम मांझी ने रविवार को पीएम मोदी से चालीस मिनट बात-चीत की है वो भी अकेले में।
जिसके बाद नीतीश खेमे में खलबली मची हुई है, हालांकि जीतन राम मांझी ने मुलाकात के बाद कहा कि उनकी पीएम मोदी से किसी राजनीतिक मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई है। मोदी जी ने बिहार के लिए कुछ अच्छा काम किया और हमने बस उन्हें उसके लिए धन्यवाद दिया।
मांझी मिले मोदी से लेकिन पत्ते नहीं खोले
मांझी ने स्पष्ट कहा कि वो बिहार विधानसभा में 20 फरवरी को बहुमत साबित करेंगे और सीएम पद से इस्तीफा नहीं देंगे और हां सदन में जो भी हमें समर्थन देगा उसे हम स्वीकार करेंगे। मांझी की इस बात का यही मतलब निकाला जा रहा है कि शायद वो बीजेपी से समर्थन लेने के चक्कर में हैं। हालांकि बीजेपी और मांझी ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है लेकिन जिस तरह से बीजेपी इस बवाल पर मांझी का साथ दे रही है उससे अगर आने वाले दिनों में मांझी और बीजेपी की दोस्ती सामने आ जाये तो किसी को अचरज नहीं होना चाहिए।
मांझी ने सीएम पद छोड़ने से इंकार किया
आपको बता दें कि पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था और अपने सबसे पसंदीदा मंत्री मांझी को सीएम बना दिया था लेकिन मांझी के लगातार विवादित बयानों के कारण और बीजेपी की वाहवाही करने के कारण जेडीयू उनसे नाराज हो गया जिसके चलते नीतीश कुमार के समर्थक जदयू विधायकों ने अलग बैठक कर नीतीश को फिर से अपना नेता चुन लिया। मांझी ने इसके बाद खुलकर बगावत दिखानी शुरू कर दी है।
मांझी ले सकते हैं बीजेपी का समर्थन
गौरतलब है कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में वर्तमान में 10 सीटें खाली हैं और सदस्यों की संख्या 233 है। ऐसे में बहुमत के लिए कम से कम 122 विधायकों का समर्थन चाहिए। 115 विधायकों वाले जदयू के अधिकांश विधायक नीतीश के समर्थन में हैं और उन्हें राष्ट्रीय जनता दल के 24, कांग्रेस के पांच, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक और दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है। अपने और समर्थक विधायकों के हिसाब से उनका कुल संख्या बल 147 बैठता है जो सामान्य बहुमत से काफी आगे है।
नीतीश के लिए खतरा बन सकती है मोदी-मांझी की दोस्ती
मांझी गुट एक दर्जन से ज्यादा जदयू विधयकों के समर्थन होने का दावा कर रहा है। उनकी निगाह भाजपा पर टिकी है। हालांकि उसके पास 88 विधायक और तीन निर्दलीयों का समर्थन है। अगर बीजेपी, मांझी का साथ देती है तो निश्चित तौर पर यह नीतीश के लिए खतरा साबित हो सकती है फिलहाल तो लड़ाई काफी चोखी है देखते हैं कि इस जंग में कौन जीतता है?













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