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दूसरे नेटवर्क पर कॉलिंग के लिए जियो को इसलिए वसूलने पड़ रहे हैं अतिरिक्त शुल्क!

बेंगलुरू। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 10 अक्टूबर कौ जियो मोबाइल यूजर्स को दूसरे नेटवर्क पर बात करने के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया है, जिससे अब जियो ग्राहकों को जियो नेटवर्क से इतर दूसरे नेटवर्क पर बात करने के लिए इंटरकनेक्शन यूजेज चार्ज (आईयूसी) के नाम पर 6 पैसे प्रति मिनट चुकाने पड़ रहे हैं। जियो ग्राहकों के लिए नए स्यापे के लिए टेलीकॉम रेग्यूलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की हीलाहवाली को जिम्मेदार माना जा रहा है। जियो ग्राहकों पर गिरे ताजा गाज के लिए भारत की शीर्षस्थ टेलीकॉम कंपनी एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया की भूमिका का भी खुलासा हुआ है।

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दरअसल, जियो ग्राहकों को ट्राई द्वारा निर्धारित मोबाइल टर्मिनेशन चार्ज दर 6 पैसे प्रति मिनट इसलिए चुकाने पड़ रहे हैं, क्योंकि ट्राई (TRAI) द्वारा अभी तक मोबाइल टर्मिनेशन चार्ज (MTC) पर कोई फैसला नहीं जा सका है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ट्राई द्वारा दायर एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2011 में ट्राई के चेयरमैन रहे जेएस सरमा ने अक्टूबर, 2011 को सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को सूचित किया था कि 1 अप्रैल, 2014 से मोबाइल टर्मिनिशेन चार्ज जीरो कर दिया जाएगा और सभी ऑपरेटर्स को उनके व्यवसाय और नेटवर्क के हिसाब से इंटरकनेक्शन यूजेज चार्ज को समायोजित करने के लिए निर्देशित किया था, लेकिन सहमति के बावजूद शीर्षस्थ सभी टेलीकॉम कंपनियों द्वारा तीन वर्ष के लंबे अंतराल भी कोई पहल नहीं की गई।

जेएस सरमा के बाद ट्राई के चेयरमैन बनाए गए राहुल खुल्लर ने मोबाइल टर्मिनेशन चार्ज को पहली बार एसएमएस सर्विस के लिए लागू किया जबकि पूर्व ट्राई चेयरमैन जेएस सरमा ने मोबाइल टर्मिनेशन चार्ज को शून्य करने का प्रस्ताव किया था, लेकिन राहुल खुल्लर ने ऐसा नहीं किया। खुल्लर ने मोबाइल टर्मिनेशन चार्ज को 20 पैसे प्रति मिनट से घटाकर 14 पैसे प्रति मिनट पर कर दिया। खुल्लर के बाद ट्राई के चेयरमैन बनाए गए आरएस शर्मा (वर्तमान में ट्राई के चेयरमैन हैं), जिन्हें ग्राहकों का शुभचिंतक का माना जाता है। फिलहाल, वर्तमान में संशोधित एमटीसी चार्ज 6 पैसे प्रति मिनट निर्धारित है।

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ट्राई में चेयरमैन का पद संभालते ही जेएस शर्मा ने सबसे पहले कॉल ड्रॉप समस्या के निदान के लिए टेलीकॉम कंपनियों पर दंड लगाने का कड़ा फैसला लिया। इसके अलावा ग्राहकों की सुविधा के लिए वो माय कॉल, डीएनडी और माय स्पीड जैसे मोबाइल एप्लीकेशन लेकर आए। उनके ही कार्यकाल में ई-आधार के जरिए टेलीकॉम कंपनियों के मोबाइल सिम कार्ड खरीदना ग्राहकों के लिए बेहद आसान हुआ। यही नहीं, अगस्त, 2018 में जेएस शर्मा के नेतृत्व में ट्राई ने मोबाइल टर्मिनेशन चार्ज को लेकर एक कंसल्टेशन पत्र भी जारी किया।

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माना जाता है भारत की तीनों शीर्ष टेलीकॉम कंपनियां ग्राहकों पर मोबाइल टर्मिनेशन चार्ज के नाम पर पड़ रहे अतिरिक्त बोझ के लिए जिम्मेदार हैं, क्योंकि अक्टूबर, 2011 में ट्राई ने तीनों शीर्ष कंपनियों को वर्ष 1 अप्रैल, 2014 से एमटीसी को शून्य करने के प्रस्ताव दिया था, लेकिन तीन वर्ष बाद भी उन्होंने कोई नहीं निर्णय लिया और वर्ष 2016 में लांचिंग के बाद जब जियो कंपनी ने उनके अंधी लूट पर लगाम लगा दिया, तो हिडेन चार्ज के रूप में तीनों कंपनियां अब ग्राहकों से एमटीसी के नाम पर 35 पैसा प्रति मिनट उगाही कर रही हैं और ट्राई पर एमटीसी पर कोई फैसला नहीं लेने के लिए भी दवाब बना रही हैं।

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गौरतलब है वर्तमान समय में ग्राहकों को 8 मिनट वॉयस कॉल के लिए महज 1 पैसा चुकाना पड़ रहा है, लेकिन एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया कंपनियां अपने ग्राहकों से एमटीसी के नामर जबरन प्रति मिनट कॉल पर 35 पैसा वसूल रही हैं जबकि ट्राई ने एमटीसी 14 पैसे प्रति मिनट रखा हुआ है। यही नहीं, उक्त कंपनियां ट्राई को अपने टॉवर्स ग्रामीण इलाकों से हटाने की धमकी दे रही है ताकि एमटीसी के नाम पर उनके द्वारा वसूले जा रहे पैसे में कोई रूकावट न आने पाए। यही कारण है कि शीर्ष कंपनियों ने ट्राई के टीएमसी शून्य करने के प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया और पिछले 8 वर्षों से अपने ग्राहकों से हिडेन कॉस्ट के रूप में जबरन पैसे वसूल रही हैं।

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इतना ही नहीं, वोडाफोन कंपनी ने ट्राई को टीएमसी मामले पर जल्द फैसला नहीं लेने देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिससे टीएमसी को शून्य करने के फैसले मे जितनी देरी होगी उसका उतना ही फायदा शीर्ष टेलीकॉम कंपनियों को होगा। पहले इसका लाभ भारती एयरेटल और वोडाफोन-आइडिया को मिल रहा था, लेकिन जियो को मजबूरन अब इसका हिस्सा बनना पड़ा है।

याद कीजिए, पिछले 20 वर्ष से भारत में मोबाइल सेवा दे रहीं भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया कंपनियों ने मोबाइल ग्राहकों को डेटा और वॉयस कॉल कितने मंहगे कीमत पर पर बेचे थे। वर्ष 2013 से अगस्त, 2016 तक एयरटेल और वोडाफोन कंपनिया ग्राहकों से 1 जीबी डेटा के लिए 255 रुपए वसूलती थीं, लेकिन जियो के आने के बाद इनकी दुकानें बंद हो गईं। रिलायंस जियों के मार्केट में आते ही डेटा टैरिफ गिरकर वर्तमान समय में 5 रुपए प्रति जीबी हो चुका है।

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तीनों शीर्ष कंपनियों ने अब तक उन सभी तरीकों को अपना कर खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले ग्राहकों को अधिक चूना लगाया है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, क्योंकि धनी और अन्य तकनीकी साधनों से लैस ग्राहक विभिन्न मोबाइल एप्लीकेशन जरिए अपनी सुविधानुसार पैसे बचाने में कामयाब हो जाते हैं। इनमें डेटा टैरिफ की कीमत पर व्हाट्सएप मैसेंजर के जरिए वॉयस कॉलिंग प्रमुख हैं, लेकिन एयरटेल और वोडाफोन कंपनियां वर्तमान में भी ग्रामीण मोबाइल ग्राहकों से एमटीसी के नाम पर मोटा पैसा छाप रही है। खासकर उन ग्राहकों से जो आज भी सामान्य मोबाइल फोन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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हालांकि सरकार ने हाल ही में सरकार ने एमटीसी पर फैसला करने किए एक अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-ministrial group)का गठन किया है, जो टेलीकॉम कंपनियों के मनमाने वसूली पर निगरानी करेगी। बताया जा रहा है कि अंतर-मंत्रालयी समूह जल्द अपना रिपोर्ट पेश कर सकती है और एमटीसी को शून्य करने के फैसले को लागू करने के बारे में सरकार को ग्रीन सिग्नल दे सकती है, लेकिन अभी भी भारती एयरेटल एमटीसी शुल्क को जारी रखने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है।

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