क्या कांग्रेस को झारखंड में भी लग गया बगावत का 'करंट'? शीर्ष नेतृत्व तक झटके की आहट!

झारखंड में भी कांग्रेस के अंदर बगावत के बिगुल फूंके जा रहे हैं। आलम ये है कि कांग्रेस समर्थित सरकार की अगुवाई कर रहे जेएमएम नेता और मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भी खतरे की आहट भांपकर आनन-फानन में दिल्ली पहुंचे हैं।

रविवार को मुख्यमंत्री सोरेन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की है, जिसे पार्टी की ओर से शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है।

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कांग्रेस के 17 में से 12 विधायक नाराज
झारखंड में कांग्रेस के 17 विधायक हैं, जिसमें से 12 प्रदेश सरकार में असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। इनमें से 8 विधायक रांची में बातचीत विफल रहने के बाद शनिवार शाम को दिल्ली पहुंच गए और सीधे पार्टी हाई कमान तक अपनी शिकायत पहुंचाने की कोशिशों में जुट गए।

रांची में मान मनोव्वल की कोशिशें फेल
शुक्रवार को चंपई सोरेन सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही कांग्रेस के 12 असंतुष्ट विधायकों को मनाने की कोशिशें रांची में शुरू हो गई थीं, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली।

उन्हें समझाने-बुझाने के काम पर पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के भाई और जेएमएम कोटे से मंत्री बसंत सोरेन को भी लगाया गया, लेकिन वह इन कांग्रेसी विधायकों की शिकायतों का समाधान नहीं कर सके।

कांग्रेस नेतृत्व के फैसले का हो रहा है विरोध
कांग्रेस के ये विधायक पार्टी एमएलए आलमगीर आलम, बन्ना गुप्ता, रामेश्वर उरांव और बादल पत्रलेख को मंत्री बनाने के पार्टी के फैसले का विरोध कर रहे हैं। इन विधायकों की ये भी मांग के राज्य के सभी 5 प्रमंडलों के विधायकों को मंत्री बनाया जाए।

यही नहीं इन विधायकों को यह भी उम्मीद है कि पार्टी आला कमान 'एक व्यक्ति, एक पद' के फॉर्मूले पर विचार करेगा।

बेरमो के कांग्रेस एमएलए कुमार जयमंगल ने कहा है,'कांग्रेस के 17 एमएलए हैं और 29 जेएमएम के...जेएमएम मुख्यमंत्री और स्पीकर का पोस्ट पहले ही ले चुका है। उनके 6 मंत्री हैं और बाकी हम चाहते हैं। उसमें समझौता नहीं करेंगे। अगर आलमगीर आलम मंत्री रहते हैं तो उन्हें कांग्रेस विधायक दल के नेता का पद छोड़ देना चाहिए।'

फेरबदल की उम्मीद में थे नाराज विधायक
कांग्रेस विधायकों में हालिया विवाद के बावजूद बन्ना गुप्ता को मंत्री बनाए जाने को लेकर भी नाराजगी है। कांग्रेस विधायकों में पार्टी के भीतर पैदा हुई नाराजगी को लेकर महागामा विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपिका पांडे ने कहा, 'पिछले चार वर्षों से हमें जो कोटा मिला था, वह मंजूर नहीं था और उसको लेकर भी असंतोष था....लेकिन अचानक से एक मौका मिला और चंपई सोरेन के नेतृत्व में नई कैबिनट बन रही थी, सभी को उम्मीद थी कोई फेरबदल होगा।'

चंपई सोरेन सरकार के लिए पैदा हो सकता है संकट
कांग्रेस के इन असंतुष्ट विधायकों के बारे में यह भी खबर है कि वह अपनी मांगें नहीं माने जाने की सूरत में 23 फरवरी से शुरू हो रहे झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के बहिष्कार और धन विधेयक पर मतदान के दौरान सदन से गैर-हाजिर रहने पर भी विचार कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इसी वजह से मुख्यमंत्री चंपई सोरेन रविवार को दिल्ली पहुंचे हैं औरकांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की है।

बता दें कि धन विधेयक पर सरकार अगर सदन में आंकड़े जुटाने में नाकाम रहती है तो ऐसी स्थिति में माना जाता है कि उसने बहुमत खो दिया है।

5 फरवरी को चंपई सोरेन सरकार के विश्वास मत के दौरान 81 सदस्यों वाले सदन में सरकार को 47 वोट मिले थे और विपक्ष के खाते में 29 वोट गए था। ऐसे में मुख्यमंत्री का कांग्रेस विधायकों की नाराजगी से परेशान होने की वजह समझी जा सकती है।

वैसे झारखंड में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर का कहना है कि पार्टी के 12 विधायकों ने जो मुद्दे उठाए हैं, उसपर विचार किया जा रहा है। (इनपुट-पीटीआई)

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