झारखंड विधानसभा चुनाव: आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने में कितना कारगर हुआ जनसंवाद केंद्र?
रांची। विजय प्रसाद पलामू जिले के पंडवा प्रखंड के कजरमा गांव के रहने वाले हैं। तरहसी के कसमार स्थित परियोजना उच्च विद्यालय से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद भी जब उन्हें बकाया वेतनमान का भुगतान नहीं किया गया, तब उन्होंने मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में शिकायत की। मई 2004 से जनवरी 2018 तक लंबित वेतन की 25 प्रतिशत राशि का भुगतान करने की गुहार लगाई। उनकी शिकायत पर कार्रवाई शुरू हुई और शिक्षक को 14 वर्षों से कटौती की गयी राशि का भुगतान कर दिया गया।
धनबाद के नवनीत कुमार झा पर वर्ष 2009 में एसिड से अटैक हुआ था। उन्होंने शिकायत की, पर वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में अपनी बात रखी। उन्होंने मुआवजा और इंसाफ की गुहार लगाई थी। श्री झा ने बताया कि उनकी समस्या का निराकरण हो गया।

ट्रांसफॉर्मर से लेकर जमीन तक के निपटारे
धनबाद जिले के गोविंदपुर के कुमारडीह टोला के ग्रामीणों ने जनसंवाद केंद्र में शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि कुमारडीह टोला में वर्ष 2017 में ट्रांसफार्मर लगाया गया था। दो सालों तक ट्रांसफार्मर से बिजली चालू नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि इस संदर्भ में विद्युत कार्यालय गोविंदपुर में भी इसकी शिकायत की गई थी, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनंसवाद केंद्र से कार्रवाई शुरू होने के बाद चार जुलाई 2019 को उस ट्रांसफार्मर को चार्ज कर बिजली बहाल कर दी गई।
लोहरदगा के अपर बाजार के अग्रवाल मुहल्ला निवासी कौशल मित्तल की मां रंजू देवी के नाम पर एक जमीन थी। उसपर कच्चा मकान बना था। वर्ष 1995-96 में यह जमीन खरीदी गई थी। इसकी रसीद कटाने के लिए वे परेशान थे। उन्हें पता चला कि इसके लिए उन्हें इस जमीन का लगान निर्धारित कराना होगा। बीते दस सालों से वे लगान निर्धारण के लिए परेशान थे। अनुमंडल और अंचल ऑफिस दौड़ते रहे। हालांकि यह काम नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद यह काम हो गया।

सवा तीन लाख लोगों को न्याय
त्वरित न्याय पाने वालों की सूची लंबी है। मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र के माध्यम से राज्य के सवा तीन लाख से अधिक लोगों को न्याय मिला है। ऐसा कहा जाता है कि न्याय में देरी का अर्थ अन्याय ही होता है। झारखंड के कई लोगों के साथ इसी तरह के अन्याय वर्षों से होते आ रहे थे। वे न्याय की आस में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर थे। उनका काम साल दर साल लटकता जा रहा था। उन्हें परेशानी होती थी। भागदौड़ में पैसे अलग से खर्च होते थे। हर चौखट पर वे दस्तक दे चुके थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि अब न्याय के लिए जाएं तो कहां। वर्षों दौड़ भाग करने के बाद कई लोगों ने न्याय की उम्मीद तक छोड़ दी थी। लोगों से मिलने के दौरान रघुवर दास ने लोगों की इस पीड़ा को शिद्दत से महसूस की। बिना परेशानी के लोगों को न्याय दिलाने के लिए सोची।
इसी कड़ी में एक मई 2015 को मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र की शुरुआत हुई। यहां लगभग 4 लाख 15 हजार जन शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 92 प्रतिशत का निराकरण किया गया। लगातार मिल रहे त्वरित न्याय से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ती गईं। स्थिति यह हुई कि केंद्र में हर तीन मिनट पर एक शिकायत दर्ज होती थी। हर चौथे मिनट में शिकायत का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया। मुख्यमंत्री रघुवर दास हर माह के अंतिम मंगलवार को खुद लोगों की शिकायतें सुनते थे। लगभग 57 महीनों तक चली सुनवाई में 52 बार मुख्यमंत्री खुद मौजूद रहे। एक घंटे से अधिक वक्त लोगों की शिकायतें सुनीं। तत्काल इसके निराकरण का निर्देश दिया। इस दौरान 1,100 लोगों के साथ मुख्यमंत्री का सीधा संवाद हुआ। लोगों ने अपने गांव सहित सार्वजनिक समस्याएं भी उनके समक्ष रखीं।
जनसंवाद केंद्र शुरू होने के बाद शुरुआती दौर में ट्रांसफार्मर जलने, पानी, वृद्धा पेंशन नहीं मिलने की अधिक शिकायतें आती थीं। इस दौरान नीतिगत निर्णय लिए जाने के बाद ऐसी शिकायतें आनी लगभग बंद हो गईं। लोगों की बढ़ती उम्मीदों की वजह से समय-समय पर कई चीजें जनसंवाद केंद्र में जोड़ी गयीं। उसे और बेहतर बनाया गया। शुरुआत में शिकायतें 12 घंटे ही दर्ज की जाती थीं। समय सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक। इस दौरान यह अनुभव किया गया कि बहुत सारी शिकायतें ऐसी भी आती हैं, जिनका त्वरित समाधान करना जरूरी होता है। इसके बाद केंद्र को 24 घंटे के लिए चालू किया गया।

17 लाख 73 हजार लोगों के साथ सीधा संवाद
एक वक्त ऐसा भी था, जब लोगों की शिकायतें सुनने के लिए जनता दरबार लगाया जाता था। अधिकारी जनता को बुलाकर मिलते थे। इसके बाद उनकी शिकायत के निष्पादन की लंबी प्रक्रिया होती थी। वह शिकायत उसी जगह चली जाती थी, जिससे बचने के लिए पीड़ित उच्चाधिकारियों से मिलते थे। ऐसा पहली बार हुआ कि लोगों को कहीं आने की जरूरत नहीं पड़ी। लोग अपने फोन, ईमेल, सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से सीधे अपनी शिकायतें दर्ज कराते रहे। इसके साथ ही शिकायत के निराकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जब तक शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं होते हैं, तब तक उनकी शिकायत का निष्पादन नहीं किया जाता है। ऐसी सेवा शुरू की गई, जिसमें लोगों को शिकायत के निष्पादन के लिए किसी कार्यालय में जाने की जरूरत नहीं पड़ी। शिकायत का निष्पादन होने के बाद कार्यालय से सूचना दी जाती है।
इस सेवा के माध्यम से 17 लाख 73 हजार लोगों के साथ सीधा संवाद हुआ। कई लोग अपनी शिकायतों के बारे में पूछते रहे। काफी लोगों ने सरकारी योजनाओं की जानकारी ली। हर 45 सेकेंड पर औसतन एक व्यक्ति से संवाद होता रहा। सेवा 30 लाईन से शुरू हुई थी। इसे बढ़ाकर 50 लाईन की गयी। कई ऐसे मामलों का भी निराकरण किया गया, जो पिछले 10 से 15 सालों से लंबित थे। लोगों ने उम्मीदें छोड़ दी थीं। इसका साकारात्मक पहलू यह भी रहा कि कई विभाग अपने यहां से संबंधित शिकायतों का निपटारा खुद करने लगे। साढ़े चार साल की अवधि में जनसंवाद केंद्र लोगों के त्वरित न्याय का एक मंच बना। जनता की उम्मीदों पर खरा भी उतरा।
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