जेट की लंदन जाने वाली फ्लाइट के एक पायलट को आई नींद और एक गलत फ्रिक्वेंसी पर!
पिछले हफ्ते जर्मनी के आसमान में ही टूट गया था मुंबई से लंदन जा रही जेट एयरवेज की फ्लाइट का संपर्क। जर्मनी ने हाइजैकिंग के डर से भेजे थे दो फाइटर जेट्स, विमान में थे 300 से ज्यादा लोग।
मुंबई। पिछले हफ्ते जर्मनी में एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया जब मुंबई से लंदन जा रही जेट एयरवेज की फ्लाइट का संपर्क कुछ समय के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया था। अब इस घटना से जुड़ी एक रिपोर्ट आई है जिसके मुताबिक इस फ्लाइट को उड़ा रहे दो पायलट्स में से एक पायलट सो गया था जबकि दूसरा पायलट गलत फ्रिक्वेंसी पर था।

फ्लाइट में 300 से ज्यादा लोग
जेट एयरवेज की बोइंग 777-300 ईआर फ्लाइट 9W-118 ने मुंबई से लंदन के लिए टेक ऑफ किया था। जर्मनी के कोलोन से जब यह फ्लाइट गुजरी तो उस समय उसका संपर्क एटीसी से टूट गया था। इसके बाद जर्मन अथॉरिटीज काफी घबरा गई थीं और उन्होंने दो यूरोफाइटर जेट्स इस फ्लाइट को एस्कॉर्ट करने के लिए भेजे थे। जहां फ्लाइट का एक पायलट सो गया तो वहीं दूसरा पायलट गलत फ्रिक्वेंसी पर था जिसकी वजह से उसकी आवाज नहीं पहुंच पा रही थी। इसी कारण वह भी एटीसी से संपर्क नहीं कर पाया था। कहा जा रहा है कि घटना पिछले गुरुवार यानी 16 फरवरी की बताई जा रही है। फ्लाइट में 330 यात्री तो 15 क्रू मेंबर्स थे। हालांकि इस फ्लाइट ने लंदन में सफल लैंडिंग की थी। फ्लाइट के क्रू ने दिल्ली में जेट एयरवेज के फ्लाइट ऑपरेशंस से कॉनटैक्ट किया और उस समय उसने एयरक्राफ्ट कम्यूनिकेशन एंड एड्रेसिंग सिस्टम्स यानी एसीएआरएस का प्रयोग किया था जिसे सैटेलाइट फोन कहते हैं। जब सैटेलाइट फोन के जरिए हुई बातचीत में क्रू को अलर्ट मिला तो फिर एटीसी से बात हुई।
हेडसेट की आवाज भी कम
सूत्रों के मुताबिक इस फ्लाइट का एक पायलट 'कंट्रोल्ड रेस्ट' में था यानी वह नियमों के मुताबिक सो रहा था। दूसरे पायलट ने गलत फ्रिक्वेंसी पर ट्यून किया था। इसके अलावा उसके हेडसेट की आवाज भी काफी कम थी। इसकी वजह से ही पायलट न तो जर्मन एटीसी से संपर्क नहीं कर पाया और न ही यूनिवर्सल इमरजेंसी फ्रिक्वेंसी से उसका संपर्क हो सका। जब जेट इस से बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि इस मुद्दे पर एयरलाइन की ओर से जांच जारी है और साथ ही डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) भी इसकी जांच कर रहा है। इस स्थिति में वह कुछ भी कहने के लायक नहीं हैं। जेट की लंदन जा रही इस फ्लाइट का संपर्क करीब 33 मिनट तक कटा रहा था। इतने समय में फ्लाइट ने करीब 500 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी। यह समस्या तब शुरू हुई थी जब फ्लाइट चेक एयरस्पेस में थी। फ्लाइट जब तक ब्रातिसल्वा से प्राग की ओर से थी तो सही फ्रिक्वेंसी पर थी और एटीसी के मैसेज भी मिल रहे थे। जैसे ही फ्लाइट जर्मनी में दााखिल होने वाली थी तो प्राग के एटीसी ने ध्यान दिया कि दिल्ली से लंदन जा रही जेट की ही एक और फ्लाइट मुंबई से लंदन वाली फ्लाइट से आगे थी। प्राग ने तब जर्मनी के राइन एटीसी से संपर्क किया और दिल्ली वाली फ्लाइट से कॉन्टैक्ट करने को कहा। लेकिन तब तब फाइटर जेट्स को रवाना किया जा चुका था। पढ़ें-कैसे जर्मन एयरफोर्स के दो फाइटर जेट्स ने किया जेट एयरवेज की फ्लाइट का पीछा












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