जयंती नटराजन ने जमकर मलाई खाने के बाद कांग्रेस को मारी लात

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। कांग्रेस में लंबे समय तक मलाई खाने के बाद जयंती नटराजन ने राहुल गांधी पर तमाम आरोप लगाते हुए कांग्रेस को छोड़ने की घोषणा कर दी। उनकी इस घोषणा करने के बाद याद आ गया एक गुजरे दौरे के भयावह मंजर का फोटो। राजीव गांधी का बम विस्फोट से छलनी शरीर पड़ा है। यह बात साल 1991 की है। उसे बहुत से लोग देख रहे भय और अविश्वास के भाव से। उनमें कांग्रेस के दो नेता भी हैं। एक जी.के.मूपनाऱ और दूसरी जयंती नटराजन। जयंती के बारे में तब कहा गया था कि राजीव गांधी की अकाल मौत से वो टूट गई हैं।

Jayanthi Natarajan quits after getting everything from Congress

अब जयंती नटराजन उसी राजीव गांधी के पुत्र राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाती हैं। आरोप लगाते हुए यूपीए सरकार के दौरान पर्यावरण मंत्री रही जयंती नटराजन ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने साथ ही एक बड़ा खुलासा भी किया, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए।

दखल देने के आरोप

जयंती नटराजन ने राहुल गांधी पर काम-काज में दखल देने और पर्यावरणीय मंजूरी के संबंध में 'विशेष अनुरोध' करने का आरोप लगाया है। जयंती ने कहा कि उन्हें कई बड़े प्रोजेक्ट राहुल गांधी के कहने पर रोकने पड़े, जबकि उनके कैबिनेट के सहयोगी इन्हें मंजूरी देने की मांग कर रहे थे।

कुछ सवाल भी

पर बड़ा सवाल यह है कि जयंती ने तब क्यों नहीं इस्तीफा दिया जब राहुल गांधी उनके कामकाज में दखल दे रहे थे। तो क्या उन्होंने अपने काम के साथ नाइंसाफी नहीं की ? क्या उन्होंने इस बाबत जानकारी अपने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को या यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी को दी थी... अगर नहीं दी तो क्यों नहीं दी... क्या उन्होंने देश के हितों के साथ अन्याय नहीं किया क्या इन और इन जैसे दूसरे सवालों के जवाब जयंती जी देंगी।

जयंती नटराजन को राजीव गांधी कांग्रेस में लेकर आए थे, लेकिन नरसिम्हा राव के समय में जयंती पार्टी छोड़कर जीके मूपनार के नेतृत्व में बनी तमिल मनिला कांग्रेस मंन शामिल हुई थीं, फिर वापस सोनिया गांधी उन्हें पार्टी में लेकर आई थीं। उन्होंने राव के दौर में पार्टी इसलिए छोड़ी थी क्योंकि राव उन जैसे नकारा कथित नेताओं को पसंद नहीं करते थे। वे दरबारी नेता नहीं थे। वे तो काम से काम मतलब रखते थे।

दरअसल बहुत अजीब सी स्थिति यह हो गई है कि जब कोई पार्टी सत्ता से बेदखल हो जाती है तो उसके बहुत से नेता उससे किनारा करने लगते हैं। कांग्रेस के साथ तो यह बीते लोकसभा चुनाव के ठीक पहले से खासतौर पर हो रहा है। हरियाणा कांग्रेस के नेता और सांसद राव इंद्रजीत से लेकर राव बीरेन्द्र सिंह भाजपा में गए। अब दोनों मंत्री भी हैं मोदी सरकार में। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के एक दिन के मुख्यमंत्री जगदम्बिकापाल भी भाजपा में आए। अब वे भाजपा के माननीय सांसद हैं। दिल्ली में हाल ही में पूर्व केन्द्रीय मंत्री कृष्णा तीरथ भाजपा आ गईं और अब लड़ रही भाजपा की टिकट पर चुनाव। इन सबने सारी जिंदगी कांग्रेस में मलाई खाई। जब कांग्रेस के सितारे डूबे तो इन्होंने कांग्रेस को छोड़ दिया।

जनाधार वाली नेता नहीं

शायद ही कोई इस बात को माने की जयंती कभी बड़ी जनाधार वाली नेता रही। वह तो राजीव गांधी-सोनिया गांधी के कृपा से राजनीति में सफल और सशक्त होती रहीं। कायदे से देखा जाए तो वह तो मीडिया डिबेट और प्रवक्ता का ही काम कर सकती थीं। अंग्रेजी बेहतर बोल लेती हैं। इसलिए कांग्रेस की तरफ से एक दौर में टीवी चैनलों पर बहुत दिखती थीं।

जाहिर तौर पर, जयंती नटराजन के आरोपों को बीजेपी ने हाथोंहाथ लिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आखिरकार अफवाहें सच साबित हुईं।. उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट में देरी होना अर्थव्यवस्था से खिलवाड़ है और पर्यावरण मंत्रालय को इन प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने पर फिर विचार करना चाहिए। पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने नटराजन के आरोपों की जांच करने का ऐलान किया।

मोदी का हल्ला बोल

लोकसभा चुनाव की कैंपेन के दौरान नरेन्द्र मोदी सीधे-सीधे जंयती नटराजन पर आरोप लगा रहे थे कि उनकी ढिलाई के चलते विकास के कई प्रोजेक्ट्स शुरू नहीं हो पाए। नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया था कि फाइलें जयंती टैक्स की वजह से रुकती हैं, लेकिन उसी नरेंद्र मोदी को लेकर जंयती नटराजन ने चिट्ठी में लिखा है कि स्नूपगेट में नरेंद्र मोदी को फंसाने की साजिश कांग्रेस की थी। अब एक सवाल और। दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जयंती नटराजन का राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए इस्तीफा देना क्या किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है?

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