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जमानत की अवधि बढ़ने के बाद भी राह नहीं आसान अम्मा की

बैंगलुरू। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को कर्नाटक हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में जमानत पर जेल से बाहर जयललिता की जमानत अवधि को बढ़ा दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद जयललिता समर्थकों को खुशी की लहर है।

jayalalitha

कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच की नियुक्ति की जाएगी जो रोजाना की तर्ज पर इस मामले की सुनवाई करेगी। कोर्ट स्पेशल बेंच की नियुक्ति अगले महीने जनवरी में कर सकती है।

जया के समर्थकों में खुशी की लहर
जयललिता के वकीलों सहित उनके समर्थकों ने कोर्ट के इस फैसले के राहत की सांस ली है। वहीं तमिलनाडु में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव से पहले जयललिता को इस मामले से बरी होना आवश्यक है। वहीं उनकी लीगल टीम को भरोसा है कि वह इस मामले में जयललिता को पूरी तरह से निर्दोष साबित करने में सफल होंगे।

साथ ही जयललिता अगले चुनाव में भाग लेने के लिए पूरी तरह अहर्त होंगी। वहीं एआईडीएमके को भरोसा है कि अगले चुनाव में उनकी पार्टी को लोगों का समर्थन मिलेगा। पार्टी का मानना है कि इस मामले में जयललिता के निर्दोष साबित होने के बाद लोगों का जबरदस्त समर्थन उनकी पार्टी को मिलेगा।

ये हैं मुश्किलें जयललिता की
जयललिता के लिए सबसे पहली मुश्किल है कर्नाटक हाई कोर्ट। कर्नाटक कोर्ट ने पूर्व में जयललिता की जमानत याचिका को खारिज करके इस मामले में अपने इरादे जाहिर कर दिये थे। इसके एक हफ्ते के बाद सेशन कोर्ट ने उन्हें अपराधी मानते हुए उनके खिलाफ ट्रायल शुरु किया था।

जयललिता मामले की सुनवाई स्पेशल बेंच के बनने के तुरंत बाद शुरु हो सकती है। जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता के मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे, जयललिता के वकीलों ने पहले ही मामले से जुड़े सभी दस्तावेज जमा कर दिये हैं। लिहाजा इस मामले की सुनवाई बिना किसी विलंब के तुरंत शुरु हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट होगा आखिरी उम्मीद
जयललिता मामले की आखिरी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होनी है। कर्नाटक हाई कोर्ट का जो भी फैसला हो उसके बाद जयललिता के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खुला रहेगा जोकि इस मामले में आखिरी फैसला लेगी। अगर हाई कोर्ट ने जयललिता को दोषी ठहराया तो वो राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट जा सकती हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट जयललिता को राहत देने पर राजी हो जाती है तो मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी।

लेकिन अगर मामला सुप्रीम कोर्ट जाता है तो तकरीबन एक साल तक इस मामले की सुनवाई चलन की संभावना है। हालांकि हाई कोर्ट में जयललिता मामले की सुनवाई तीन महीने के भीतर खत्म होने की उम्मीद है। वहीं कानून के जनाकारों का कहना है कि तीन महीनों के भीतर हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो सकती है। वहीं यह पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के उपर है कि वह इस मामले में जयललिता को राहत देता है कि नहीं।

जयललिता के लिए आगामी चुनाव बड़ी चुनौती
तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेने के लिए जयललिता के लिए यह बेहद आवश्यक है कि उनके उपर से आरोप पूरी तरह से हटा लिए जाएं। इसी परिस्थिति में वह चुनाव लड़ने में अर्ह होंगी। जबतक जयललिता के उपर से आरोप नहीं हटता वह चुनाव नहीं सकती हैं। आपको बता दें कि जयललिता को को आय से अधिक संपत्ति के मामलें में चार साल की सजा सुनायी गयी है। वहीं अगर नियमों पर नजर डालें तो इस परिस्थिति में 10 साल तक जयललिता चुनाव नहीं लड़ सकेंगी।

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