Rajasthan assembly elections 2018: जाट और राजपूत बदल सकते हैं प्रदेश के सियासी गणित को
नई दिल्ली। राजस्थान विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं। प्रदेश में मतदान में अब सिर्फ चार दिन का समय बचा है, लेकिन अभी भी मुख्य दलों का ध्यान यहां के राजपूत और जाट वोटरों पर टिका है। इसकी बड़ी वजह यह है कि राजस्थान में राजपूत और जाट मिलाकर प्रदेश की कुल 200 विधानसभा सीटों में से 120 सीटों पर अपना प्रभाव छोड़ सकते हैं, लिहाजा इन जगहों पर हार और जीत का फैसला इन दोनों समुदाय पर ही निर्भर करता है। लिहाजा भाजपा और कांग्रेस इन दोनों ही वोट बैंक पर अपनी सेंधमारी करने में जुटे हैं।

भाजपा के खिलाफ राजपूत
प्रदेश में सबसे बड़े राजपूत संस्था श्री राजपूत सभा ने इस बार साफ कर दिया है कि वह सत्तारूढ़ भाजपा के विरोध में वोट करेगी। जबकि अन्य राजपूत संगठन करणी सेना ने नारा दिया है कि कमल का फूल हमारी भूल। दोनों ही संगठन अपने प्रतिनिधियों को लोगों के बीच भेज रहे हैं और मतदाताओं से भाजपा के खिलाफ वोट करने की अपील कर रहे हैं। लेकिन इन सब से इतर जाट महासभा राजाराम मील का कहना है वह इस बार कांग्रेस को वोट करेगी। लेकिन प्रदेश में जाट वोटबैंक एकजुट नजर नहीं आ रहा है, माना जा रहा है कि ये वोट बैंक कहीं भी जा सकता है।

जाट भी भाजपा के विरोध में
युवा जाट मतदाताओं की बात करें तो जाट समुदाय मुख्य रूप से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को अपना समर्थन दे रहे हैं, इस पार्टी की कमान हनुमान बेनीवाल के हाथ में है। वहीं अगर मध्यम उम्र के वोटरों की बात करें तो उनका वोट कांग्रेस और भाजपा के बीच बंटा हुआ है। लेकिन इन सबके बीच भाजपा ने दावा किया है कि पूरा जाट समुदाय उनके साथ है, लिहाजा उसे प्रदेश में बड़ी जीत मिलेगी। श्री राजपूत सभा के गिरिराज सिंह लोतवारा का कहना है कि भाजपा को समर्थन करने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। भाजपा ने हमारे समुदाय के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया। यही नहीं भाजपा ने पूर्व उपराष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत और उनके परिवार को नजरअंदाज किया। जसवंत सिंह का पूरा परिवार मानवेंद्र सिंह के साथ मिलकर वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव लड़ रहा है।

अंतर्कलह का मिल सकता है लाभ
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का विवाह जाट शाही धौलपुर परिवार से हुआ है, लेकिन उन्हें जाट समुदाय अपना नेता नहीं मानता है। भाजपा ने यहां गजेंद्र सिंह शेखावत को चुनाव प्रबंधन के मुखिया के तौर मैदान में उतारा है, लेकिन वह यहां अपना कुछ खास असर डालने में फेल रहे हैं। लेकिन मीना समुदाय भाजपा को अपना समर्थन दे रहा है। वहीं जिस तरह से कांग्रेस के भीतर अंतर्कलह चल रही है माना जा रहा है कि भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है।
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