'जैसे बम फट गया हो', किश्तवाड़ फ्लैश फ्लड्स ने छीनी 60 जिंदगियां, यात्रियों ने सुनाई दहशत भरी दास्तान
जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छासोटी गांव में गुरुवार को मचैल माता यात्रा (Machail Mata Yatra) के दौरान अचानक आई तेज बाढ़ ने हाहाकार मचा दिया। बाढ़ की तेज धार में कई श्रद्धालु फंस गए और अब तक कम से कम 60 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
एक महिला शालू मेहरा ने बताया कि, 'अचानक जोरदार धमाके जैसी आवाज़ आई और सब चिल्लाने लगे, 'भागो, भागो'। मैं मलबे में फंस गई, एक बिजली का पोल मेरे सिर पर गिर गया। मैंने अपनी बेटी को पुकारा, उसने मुझे बाहर निकाला और फिर अपने बेटे की तलाश में चली गई, जो उससे लगभग 7 किलोमीटर दूर था।'

वायु सेना राहत और बचाव अभियान चलाने के लिए तैयार
सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय वायु सेना जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की घटना के पीड़ितों के लिए राहत और बचाव अभियान चलाने के लिए तैयार है। वर्तमान में जम्मू और उधमपुर में दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर और एक उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर (Advanced Light Helicopter) स्टैंडबाय पर हैं। मौसम ठीक होते ही अभियान शुरू हो जाएगा।
श्रद्धालुओं की आपबीती
संजय कुमार (42 वर्ष) वहां के सामुदायिक भोजनालय में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि, 'कुछ लोग भोजन कर रहे थे और कुछ बारिश से बचने के लिए शरण में थे। अचानक बाढ़ ने सब कुछ बहा दिया। यह मेरे लिए चमत्कार जैसा था।' उन्होंने बताया कि चार वाहन, जिनमें लगभग 15 लोग थे, बाढ़ की तेज धार में बह गए। संजय कुमार दोनों पैरों में गंभीर चोटें लेकर इलाज करा रहे हैं।
सामुदायिक भोजनालय भी बाढ़ की चपेट में आया
सामुदायिक भोजनालय के प्रमुख सुभाष चंद्र गुप्ता ने कहा कि, 'बड़े-बड़े पत्थर, पेड़ और मिट्टी बहकर आए। मैं तीन घंटे तक एक बड़े पत्थर के नीचे फंसा रहा।'
यात्रियों को तैयार होने का मौका नहीं मिला
बाढ़ उस समय आई जब यात्री मंदिर तक पहुंचने के लिए आखिरी 8.5 किलोमीटर की यात्रा कर रहे थे। यह हादसा इतना तेज था कि श्रद्धालु किसी भी तरह से तैयारी नहीं कर सके।












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