जम्‍मू कश्‍मीर: हाइवे बैन पर बोलीं महबूबा, कश्‍मीर कश्‍मीरियों का, सड़क पर चलने के लिए किसी से मंजूरी की जरूरत नहीं

श्रीनगर। रविवार को जम्‍मू कश्‍मीर हाइवे बैन का पहला दिन था। इस मौके पर कई राजनीतिक दलों की ओर से प्रतिक्रिया आई है। राज्‍य के दो पूर्व मुख्‍यमंत्री इस बैन से खासे नाराज हैं। जहां पीडीपी की मुखिया और बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बैन के खिलाफ सरकार को कोर्ट में घसीटने की धमकी दी तो उमर अब्‍दुल्‍ला ने इसे बिना दिमाग वाला आदेश बताया है। पुलवामा आतंकी हमले को ध्‍यान में रखते हुए लोकसभा चुनावों तक जम्‍मू-कश्‍मीर हाइवे को हफ्ते में दो दिन तक आम ट्रैफिक के लिए बंद रखने का फैसला लिया गया है। जम्‍मू कश्‍मीर सरकार के मुताबिक चुनावों में सुरक्षाबलों के आसान मूवमेंट के लिए यह फैसला लिया गया है।

कहा ट्रेन से या रात में सफर करें सुरक्षाबल

कहा ट्रेन से या रात में सफर करें सुरक्षाबल

महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि अगर सरकार को लगता है कि इस तरह के फैसलों के बाद वह राज्‍य की जनता की आवाज को दबा सकती है, तो वह गलत सोचती है। महबूबा ने इस आदेश के विरोध के साथ ही कोर्ट में याचिका दायर करने की धमकी भी दी है। महबूबा ने श्रीनगर के पठानचौक पर हुई रैली में यह बात कही। मुफ्ती ने यह भी कहा है कि कश्‍मीर, कश्‍मीरियों का है और उन्‍हें यहां की सड़कों पर चलने के लिए किसी की इजाजत की मंजूरी हो, ऐसा वह हरगिज नहीं होने देंगी। नेशनल कॉन्‍फ्रेंस के मुखिया फारूक अब्‍दुल्‍ला ने भी सड़क पर सरकार का विरोध प्रदर्शन किया। फारूक अब्‍दुल्‍ला की मांग है कि यह तानाशाही है और सरकार आदेश को तुरंत वापस ले। फारूक का कहना है कि अगर सुरक्षाबलों को सफर करना है तो वह या तो ट्रेन का सहारा लें या फिर रात में मूव करें।

सरकार समर्थक भी सरकार के खिलाफ

सरकार समर्थक भी सरकार के खिलाफ

वहीं सरकार के समर्थक पीपुल्‍स कॉन्‍फ्रेंस के चेयरमैन सज्‍जाद लोन भी इस आदेश के विरोध में आ गए हैं। उन्‍होंने ट्विटर पर लिखा, 'हाइवे बैन अब एक मानवाधिकार संकट में बदलता जा रहा है। लोगों को अपने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए सफर करना पड़ेगा और वह असहाय महसूस कर रहे हैं।' लोन ने राज्‍य के गर्वनर से इस आदेश को वापस लेने की मांग की है। तीन अप्रैल को राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक की ओर से आदेश जारी किया गया था। इस आदेश में कहा गया था कि जम्‍मू से श्रीनगर तक जाने वाले हाइवे पर हर रविवार और बुधवार को आम ट्रैफिक को गुजरने की मंजूरी नहीं दी जाएगी।

270 किलोमीटर की दूरी तय करता है हाइवे

270 किलोमीटर की दूरी तय करता है हाइवे

जम्‍मू से श्रीनगर तक जाने वाले हाइवे करीब 270 किलोमीटर तक की दूरी कवर करता है। हाइवे पर हफ्ते के दो दिन जम्‍मू के उधमपुर से कश्‍मीर के बारामूला तक के रास्‍ते पर आम ट्रैफिक को मंजूरी नहीं दी जाएगी। बारामूला से श्रीनगर, काजीगुंड, जवाहर टनल, बनिहाल और रामबन होते हुए जम्‍मू में उधमपुर तक जाने वाला हाइवे पूरी तरह से सिर्फ सुरक्षाबलों के प्रयोग के लिए ही होगा। किसी भी तरह की इमरजेंसी सिचुएशन या किसी और वजह से स्‍थानीय प्रशासन और पुलिस की ओर से वही इंतजाम किसी सिविलियन गाड़ी के लिए किए जाएंगे, जो कर्फ्यू के दौरान किए जाते हैं। यह इंतजाम 31 मई तक रहेंगे।

90 के दशक में हुआ था ऐसा

90 के दशक में हुआ था ऐसा

90 के दशक के दौरान जब घाटी में आतंकवाद चरम पर था तो उस समय सिविलियन गाड़‍ियों को रोक दिया जाता था। गाड़‍ियां त‍ब तक रुकी रहती थीं जब तक कि सुरक्षाबल गुजर नहीं जाते थे। इसके बाद जब साल 2002 में पीडीपी की सरकार बनी तो इस नियम को हटा दिया गया। सरकार ने उस समय लोगों से वादा किया था कि संघर्ष से जूझ रही जनता को वह कुछ राहत देगी। माना जा रहा है कि सरकार की ओर से आए नए कानून घाटी में लोगों का गुस्‍सा बढ़ा सकते हैं। 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों को ले जा रही बस को जम्‍मू से श्रीनगर तक जाने वाले हाइवे पर ही निशाना बनाया गया था। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे।

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