जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने कहा कि हम आतंकियों से भी बात के लिए तैयार, 370 पर दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली जम्मू कश्मीर में 8 अक्टूबर से आतंकियों की लगातार गतिविधियों और धमकी के बीच स्थानीय निकाय के चुनाव होंगे। एक तरफ जहां पीडीपी और नेशनल कॉफ्रेंस ने इस चुनाव का बहिष्कार किया है तो दूसरी तरफ यहां के राज्यपाल सत्य पाल मलिक का कहना है कि भारत ने गलतियां की हैं, लेकिन अब वह गलतियां अपने आप दूर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता ऐसा माहौल तैयार करने की है जिसमे लोगों का भरोसा हो, ताकि केंद्र मुख्य दलों से बात कर सके, यहां तक कि हुर्रियत से भी बात हो सके लेकिन बिना पाकिस्तान को इसमे शामिल किए हुए।

कब्जा नहीं किया गया है

कब्जा नहीं किया गया है

राज्यपाल ने कहा कि कश्मीर कब्जा किया हुआ राज्य नहीं है, ये कोई एक तरह से कब्जा नहीं है, इसको अब आप ऑक्यूपेशन (कब्जा) हो, वो एक अलग बात है, लेकिन नहीं वो बात बैठती नहीं है। ये कोई हमसे मिसहैंडलिंग हुई है, भारत से गलती हुई है, भारत ने अपनी गलतियों से अपने आपको विमुख किया है। राज्यपाल ने यह बयान इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने साक्षात्कार में दिया है। उन्होंने ने अनुच्छेद 370 और 35 ए के बारे में कहा कि इसे लेकर किसी भी तरह की चिंता करने की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा समय रहा है कि जब भारत ने अपना वायदा पूरा नहीं किया है, लेकिन मैं अनुच्छेद 370, 35 ए की गारंटी देता हूं, मुझे भारतीय न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और इसमे चिंता करने की कोई बात नहीं है।

अनुच्छेद 370, 35 ए पर राय

अनुच्छेद 370, 35 ए पर राय

वहीं जब राज्यपाल से पूछा गया कि अनुच्छेद 370 और 35 ए पर क्या केंद्र की भी यही राय है तो उन्होंने कहा कि वह चुने हुए व्यक्ति नहीं है बल्कि केंद्र ने उन्हें नियुक्त किया है। लेकिन मेरा मत से इतर राय तभी हो सकती है जब यहां नई सरकार हो। उन्होंने कहा कि लोग हिमाचल प्रदेश, और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी जमीन नहीं खरीद सकते हैं, ये कौन सा बड़ा गुनाह है, ये मुद्दा राजनीति से प्रेरित है और इसीलिए इसे उठाया जाता है। उन्होंने पाकिस्तान से बातचीत को लेकर भी अपनी राय को खुलकर सामने रखा।

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कश्मीर के मामले में दिल्ली बात करेगी

कश्मीर के मामले में दिल्ली बात करेगी

राज्यपाल ने कहा कि बातचीत के लिए एक ऐसा माहौल तैयार करने की जरूरत है ताकि यहां के राजनीतिक दल एक टेबल पर आ सके, यहां तक कि हुर्रियत से भी बात की जा सके, लेकिन इसके पीछे पाकिस्तान को बातचीत में शामिल किए जाने की शर्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हुर्रियत से मुझे राजनीतिक बात करने अधिकार नहीं दिया गया है, लेकिन अगर वो मेरे पास किसी और मुद्दे को लेकर बात करना चाहते हैं तो मेरे दरवाजे खुले हैं। उनके लिए मेरे अंदर सम्मान है, लेकिन मैं उनसे राजनीतिक मुद्दे पर बात नहीं कर सकता। कश्मीर के मामले में तो दिल्ली ही बात करेगी उनसे।

आतंकियों से भी बातचीत को तैयार

आतंकियों से भी बातचीत को तैयार

हुर्रियत के रुख पर राज्यपाल ने कहा कि अगर हुर्रियत यह कहता है बातचीत में पाकिस्तान को शामिल किया जाए तभी हम बात करेंगे तो हम पंचायती नहीं करवाने वाले हैं। मलिक ने कहा कि बातचीत ही समस्या का समाधान है। यह बातचीत ना सिर्फ मुख्य दल, हुर्रियत बल्कि अगर आतंकी अपने किसी प्रतिनिधि को भेजना चाहे और कहे कि हम हथियार छोड़ने को तैयार हैं और यह व्यक्ति हमारे लिए बात करेगा तो हम उससे भी बात करने को तैयार हैं, लेकिन जबतक हत्या का दौर चल रहा है कोई बातचीत नहीं होगी।

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