जम्‍मू कश्‍मीर: अपना खून देकर CRPF जवान ने बचाई एक मां और उसके बच्‍चे की जान

श्रीनगर। पिछले दिनों चुनाव ड्यूटी पर तैनात एक पोल ऑफिसर की जान बचाने के बाद अब सीआरपीएफ के एक जवान ने मां और उसके नवजात शिशु की जान बचाई है। मामला फिर से कश्‍मीर घाटी का है जहां पर सीआरपीएफ जवान गोहित शैलेश ने अपना खून देकर मां और बच्‍चे की जान की रक्षा की। अब सोशल मीडिया पर शैलेश को उनके इस नेक काम के लिए लोगों की तालिया मिल रही हैं। शैलेश ने अपनी ड्यूटी से भी एक कदम आगे जाकर दोनों की जिंदगी बचाई।

खून बहने से बिगड़ी महिला की हालत

खून बहने से बिगड़ी महिला की हालत

मामला श्रीनगर का है जहां पर 25 वर्षीय एक महिला की हालत डिलीवरी के समय उस समय बिगड़ी गई जब उसका काफी खून बह गया। लेकिन इसी समय सीआरपीएफ की 53वीं बटालियन के जवान गोहिल शैलेश ने इस महिला की मदद करने की ठानी। उन्‍होंने मुश्किल समय में महिला को अपना खून दिया। इस महिला का मददगार श्रीनगर के गुलशन मोहम्‍ले में रहता है। महिला का खून बहता देख परिवार ने सीआरपीएफ मददगार पर कॉल किया। मददगार सीआरपीएफ की ओर से कश्‍मीर घाटी में चलाई गई मेडिकल इमरजेंसी हेल्‍पलाइन सर्विस है जिस पर कॉल करने के कुछ ही मिनटों बाद नागरिकों को मदद पहुंच जाती है।

जवान ने दिया अपना खून

सीआरपीएफ की ओर से इसका अपडेट ट्विटर हैंडल पर पोस्‍ट किया गया। इसका कैप्‍शन था, 'खून का रिश्‍ता।' हैंडल पर सीआरपीएफ जवान और नवजात शिशु की फोटोग्राफ भी पोस्‍ट की गई। सीआरपीएफ ने लिखा, 'उनके खून ने एक मां, बच्‍चे और परिवार की जान बचाई और जिंदगी भर का रिश्‍ता बना लिया।' यह फोटो अब ट्विटर पर वायरल हो रही है और लोग इस जवान के लिए तालियां बजा रहे हैं। कुछ लोग इस जवान को शुक्रिया कह रहे तो कुछ कह रहे हैं कभी रिश्‍तों की वजह खून होता है तो कभी खून की वजह से रिश्‍ते बनते हैं।

जवान ने बचाई पोलिंग ऑफिसर की जान

जवान ने बचाई पोलिंग ऑफिसर की जान

पिछले दिनों सीआरपीएफ के जवान ने कश्‍मीर में एक पोलिंग ऑफिसर अहसान-उल-हक की जान उस समय बचाई जब वोटिंग के दौरान उन्‍हें हार्ट अटैक आ गया था। हक श्रीनगर के बुचपोरा में तैनात थे जो कि बूथ नंबर 13 है। उन्‍हें सुबह नौ बजे हार्ट अटैक आया। इसी बूथ पर तैनात सीआरपीएफ जवान सुरिंदर कुमार ने तुरंत ही अपनी यूनिट में तैनात डॉक्‍टर सनीम की मदद मांगी। सनीम ने फोन पर सुरिंदर कुमार को निर्देश दिए।

सीआरपीएफ की 50 से ज्‍यादा बटालियन

सीआरपीएफ की 50 से ज्‍यादा बटालियन

सुरिंदर कुमार ने हक को कार्डियोपलमोनरी रिस्‍यूसाइटेशन यानी सीपीआर दिया। जब तक एयर एंबुलेंस नहीं आ गई, सुरिंदर करीब 50 मिनट तक हक को जरूरी मदद मुहैया कराते रहे। सुरिंदर ने 30 कंप्रेशंस और तीन माउथ-टू-माउथ रेसपेरिशंस हक को दिए और उन्‍होंने डॉक्‍टर की ओर से दिए गए हर निर्देश का पालन किया।सीआरपीएफ, जम्‍मू कश्मीर घाटी में काउंटर इनसर्जेंसी ऑपरेशंस में भूमिका अदा करने वाला अहम बल है। इस समय राज्‍य में सीआरपीएफ की करीब 50 से ज्‍यादा बटालियन हैं और हर बटालियन में 1,000 से ज्‍यादा जवान हैं।

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