जामिया में हुई हिंसा के लिए कांग्रेस ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार, लगाया बड़ा आरोप
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। जिस तरह से रविवार को जामिया मिलिया के छात्रों ने इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उसके बाद पुलिस ने कैंपस के छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की उसके चलते विपक्ष पुलिस और सरकार को घेरने में लगी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने जामिया में पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ बोलते हुए कहा कि पुलिस युनिवर्सिटी में बिना इजाजत नहीं प्रवेश कर सकती है, पुलिस बिना वाइस चांसलर की इजाजत के संस्थान में नहीं घुस सकती है, जोकि केंद्र सरकार के अंतर्गत आती है। हम पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हैं और इस कार्रवाई की न्यायिक जांच की मांग करते हैं।

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि कांग्रेस इस विरोध प्रदर्शन के पीछे हैं। इस आरोप पर पलटवार करते हुए आजाद ने कहा कि अगर कांग्रेस इस तरह का हिंसा भड़काने में सक्षम होती तो आप सत्ता में नहीं होते। हमारे उपर लगाया गया आरोप निराधार है। मैं इस आरोप को सिरे से खारिज करता हूं और इसकी आलोचना करता हूं। इस दंगे के लिए सिर्फ सत्तारूढ़ दल, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और उनके कैबिनेट के सदस्य जिम्मेदार हैं। बता दें कि आज जामिया मिलिया के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ कई जगह प्रदर्शन देखने को मिला।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर काफी चिंतित हूं। शहर में फिर से तत्काल शांति की बहाली के लिए मैंने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के लिए समय मांगा है। बता दें कि गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से जामिया नगर इलाके में हुई हिंसा को लेकर रिपोर्ट तलब की है। गृहमंत्रालय ने नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ हुए प्रदर्शन के खिलाफ यह रिपोर्ट तलब की है। बता दें कि कल पुलि की कार्रवाई में दर्जनों छात्र घायल हो गए थे, जबकि कुछ पुलिसवाले भी इस हिंसा में घायल हुए थे।












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