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Jallikattu festival:कैसे तमिलनाडु चुनाव के लिए राहुल गांधी को कांग्रेस के पुराने स्टैंड से भागना पड़ा

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Jallikattu festival:राहुल गांधी भले ही पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद औपचारिक तौर पर पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ चुके हों, लेकिन उनके इशारे के बिना पार्टी में पत्ता भी हिलना मुमकिन नहीं लगता है। क्योंकि, पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी सेहत की वजह से पार्टी की गतिविधियों में उतनी सक्रिय नहीं रह पातीं। लिहाजा राहुल ही अघोषित तौर पर अध्यक्ष के तौर पर काम करते लग रहे हैं। उनका शब्द ही पार्टी का आखिरी शब्द महसूस होता है। केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के वही मुख्य चेहरा हैं। यह बात कांग्रेस ही नहीं सत्ताधारी पार्टी भी मानती है। इसलिए उनका स्टैंड ही कांग्रेस पार्टी का आखिरी स्टैंड माना जाता है और उससे अलग विचार रखने वालों के लिए कांग्रेस में शायद कोई जगह भी नहीं है। जल्लीकट्टू के त्योहार पर राहुल गांधी ने जो अब पार्टी के पुराने स्टैंड से ठीक उलट स्टैंड लिया है, वह भी कांग्रेस पार्टी में उनकी मौजूदा हैसियत की ही तस्दीक करता है।

कांग्रेस के पुराने स्टैंड से कैसे भाग खड़े हुए राहुल गांधी

कांग्रेस के पुराने स्टैंड से कैसे भाग खड़े हुए राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी गुरुवार को केंद्र की मोदी सरकार के कृषि कानूनों के विरोध के बहाने जल्लीकट्टू त्योहार देखने तमिलनाडु के मदुरै शहर पहुंच गए। ये वही राहुल गांधी हैं, जिनकी पार्टी की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने 10 साल पहले जलीकट्टू के त्योहार पर पाबंदी लगाई थी। पांच साल पहले भी राहुल गांधी ने उस बैन का जोरदार समर्थन किया था। मदुरै रवाना होने से पहले उन्होंने तमिल में लिखे ट्विटर पोस्ट में लिखा, 'मैं आज आपके साथ पोंगल मनाने के लिए तमिलनाडु आ रहा हूं। मैं मदुरै में जलीकट्टू त्योहार में शामिल होऊंगा।' गौरतलब है कि तमिलनाडु में जलीकट्टू को कृषि और किसानों से जुड़ा एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है, जो कि पोंगल उत्सव के तीसरे दिन मनाया जाता है।

यूपीए सरकार ने जलीकट्टू पर लगाई थी पाबंदी

यूपीए सरकार ने जलीकट्टू पर लगाई थी पाबंदी

2011 में जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी और उसकी अगुवा कांग्रेस पार्टी पर राहुल का आज की तरह ही दबदबा था, तब उन्हीं की पार्टी के जयराम रमेश के अधीन पर्यावरण मंत्रालय ने त्योहारों के लिए सांड के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसका मतलब ये था की जलीकट्टू के लिए सांड का खेल आयोजित नहीं किया जा सकता। हालांकि, तमिलनाडु रेग्युलेशन ऑफ जलीकट्टू ऐक्ट नंबर 27 के तहत यह त्योहार फिर भी जारी रहा, जिसे 2009 में तत्कालीन करुणानिधि सरकार लेकर आई थी। यह कानून 2006 में मद्रास हाई कोर्ट की ओर से जलीकट्टू के खिलाफ आदेश के बाद लाया गया था। 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने भी तमिलनाडु के कानून को सशर्त मंजूरी दे दी थी। लेकिन, इस फैसले को पलटते हुए मनमोहन सिंह सरकार ने अगले साल इस त्योहार पर ही रोक लगा दिया था।

मोदी सरकार ने दी जलीकट्टू को मंजूरी

मोदी सरकार ने दी जलीकट्टू को मंजूरी

2014 के मई में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के 2009 के फैसले को पलटते हुए जलीकट्टू को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। लेकिन, 2016 में जब तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने थे तो उसी साल जनवरी में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 2011 के पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना को बदलकर जलीकट्टू के साथ-साथ केरल के बैलगाड़ी प्रतियोगिता को भी कुछ शर्तों के साथ जारी रखने की इजाजत दे दी। हालांकि, राहुल गांधी की कांग्रेस तब भी जलीकट्टू पर पाबंदी के पक्ष में अपने पुराने स्टैंड पर कायम रही। यहां तक कि 2016 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में भी पार्टी ने कहा कि 'वह जलीकट्टू पर पाबंदी का समर्थन करती है।'

कांग्रेस ने कैसे बदला स्टैंड

कांग्रेस ने कैसे बदला स्टैंड

2016 के जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर जलीकट्टू को मंजूरी देने वाली मोदी सरकार के संशोधित अधिसूचना पर रोक लगा दी। इसके खिलाफ 2017 में जलीकट्टू के समर्थन में भारी प्रदर्शन शुरू हो गया। तब जाकर कांग्रेस अपना स्टैंड बदलती दिखाई पड़ी और उसने परंपरागत खेल के नाम पर इसका समर्थन करना शुरू किया। हालांकि, फिर भी पार्टी के अलग-अलग नेता विभिन्न सुरों में बोलते रहे। पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इस परंपरा का समर्थन किया तो पार्टी के एक और प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अलग राग अलापना शुरू कर दिया। उन्होंने ही जलीकट्टू को इजाजत देने वाले मोदी सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती दी थी। बाद में वह केस से ही हट गए।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव पर नजर

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव पर नजर

2016 के विधानसभा चुनाव में जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके सत्ता में लौटी और उसने राज्य में जलीकट्टू को जारी रखने वाला अध्यादेश लागू किया। तमिलनाडु एकबार फिर से चुनाव के मुहाने पर खड़ा है। गुरुवार को जलीकट्टू के त्योहार में शामिल होकर राहुल गांधी प्रदेश के लोगों और वोटरों को यही संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वो जलीकट्टू पर कांग्रेस के पुराने स्टैंड को भूल जाएं, क्योंकि वह उसे दिल्ली में दफन करके आए हैं और अब उन्हें तमिलनाडु के लोगों की सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा का सम्मान करने में कोई परहेज नहीं है।

इसे भी पढ़ें- Farm Laws: किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिवसेना ने क्या कहा, जानिए

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English summary
Jallikattu festival:How Rahul Gandhi had to run from the old stand of Congress for Tamil Nadu elections
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