विदेश मंत्री Jaishankar Rahul Gandhi पर बरसे, कहा- 'मैं अपनी खबर चीनी एंबेसडर से नहीं पूछता'
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राहुल गांधी पर बिना उनका नाम लिए निशाना साधा। उन्होंने भारतीय जमीन पर चीनी सैनिकों के कब्जे के मामले में टिप्पणी की।

विदेश मंत्री S Jaishankar Rahul Gandhi पर आक्रामक हैं। उन्होंने भारत की जमीन पर चीनी सैनिकों के कब्जे से जुड़े एक सवाल पर कहा, अगर किसी ज़मीन की बात करते हैं तो 1962 में चीन ने भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा किया था।
उन्होंने राहुल गांधी, कांग्रेस और तमाम विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, वे (विपक्ष) आपको बताते नहीं हैं, वे ऐसा दिखाएंगे जैसे भारतीय जमीन पर चीन सैनिकों का कब्जा कल-परसो ही हुआ हो।
चीनी एंबेसडर से नहीं पूछता
विदेश मंत्री ने राहुल गांधी और चीनी राजदूत के कथित संपर्क पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, अगर मेरी सोच में कमी है तो मैं अपनी फौज़ या इंटेलिजेंस से बात करूंगा। मैं चीनी एंबेसडर को बुलाकर अपनी खबर के लिए नहीं पूछता। दिलचस्प बात है कि विदेश मंत्री ने राहुल गांधी का नाम नहीं लिया। बता दें कि राहुल और चीनी राजदूत की मुलाकात की कथित भेंट मई, 2022 में सुर्खियों में आई थी। बाद में फैक्टचेक में ये बात सामने आई कि राहुल एक शादी समारोह के लिए चीन गए थे, चीनी राजदूत से मुलाकात करने नहीं।
सिंधु जल संधि तकनीकी मामला
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को सवालों के जवाब में कहा कि सिंधु जल संधि तकनीकी मामला है। भविष्य की कार्रवाई भारत और पाकिस्तान के सिंधु आयुक्तों (Indus Commissioners) के बीच बातचीत पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान में जो हो रहा है, उसके बारे में सार्वजनिक रूप से बोलना मेरे लिए सही नहीं होगा। आयुक्तों की राय के बाद ही देश भविष्य के कदमों पर चर्चा कर सकता है।"
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भारत ने पाकिस्तान को नोटिस भेजा
गौरतलब है कि भारत ने सितंबर 1960 की सिंधु जल संधि (IWT) में संशोधन के लिए पाकिस्तान को नोटिस जारी किया, क्योंकि पाकिस्तान की तरफ से हुई हरकतों ने संधि के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला। आईडब्ल्यूटी के अनुच्छेद XII (3) के अनुसार सिंधु जल के संबंधित आयुक्तों के माध्यम से 25 जनवरी को नोटिस दिया गया था।
भारत हमेशा एक जिम्मेदार भागीदार रहा
संशोधन के नोटिस का उद्देश्य पाकिस्तान को IWT के भौतिक उल्लंघन को सुधारना था। इसके लिए 90 दिनों के भीतर अंतर-सरकारी वार्ता का अवसर भी प्रदान करने का प्रयास किया गया। इस प्रोसेस में पिछले 62 वर्षों में सीखी गई बातों को शामिल करने के लिए IWT को भी अपडेट किया जाएगा। IWT को लागू करने में भारत हमेशा एक जिम्मेदार भागीदार रहा है। हालांकि, पाकिस्तान ने IWT के प्रावधानों और उनके कार्यान्वयन का अतिक्रमण किया है। इस कारण भारत को IWT में संशोधन के लिए उपयुक्त नोटिस जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
भारत का प्रभाव हिंद महासागर से परे
विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत की विदेश नीति में समुद्र-परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश का प्रभाव हिंद महासागर से आगे प्रशांत महासागर तक पहुंच गया है। जयशंकर ने अपनी किताब "भारत मार्ग" के प्रकाशन समारोह में सवालों के जवाब में कहा, "आजकल भारत का प्रभाव हिंद महासागर से परे प्रशांत महासागर तक पहुंच गया है, इसलिए मैं इतिहास पर बोलता हूं, बड़े देश हमेशा केवल अपने बारे में सोचते हैं, यह उनके डीएनए में कमी है।"
देश के विकास में विदेश नीति का बहुत बड़ा महत्व
पुणे में अपनी अंग्रेजी पुस्तक "द इंडिया वे: स्ट्रैटेजीज़ फॉर एन अनसर्टेन वर्ल्ड" के मराठी अनुवाद- 'भारत मार्ग' के विमोचन के मौके पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा, दुनिया में देश के विकास में विदेश नीति का बहुत बड़ा महत्व है। हर देश में, विदेश नीति केंद्र सरकार द्वारा बनाई जाती है .... लेकिन बड़े देशों में, यह नीति केवल केंद्र द्वारा नहीं बनाई जाती है, कई अलग-अलग राज्य भी इसमें भाग लेते हैं।" बकौल जयशंकर, "हमारे देश की विदेश नीति में इसकी बुनियाद सबकी भागीदारी है।"
जी20 में 200 बैठकें
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान देश में हर कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, "यह केवल दिल्ली तक सीमित नहीं होना चाहिए। विदेश नीति को विदेश मंत्रालय से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाने का मेरा शुरू से ही प्रयास रहा है, इसी तरह इस किताब की भाषा बहुत आम लोगों की भाषा है, तकनीकी भाषा में नहीं।" उन्होंने कहा, "इस बार जी20 में 200 बैठकें होंगी। इन बैठकों के जरिए हम दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि जो भी भारत आए और बदलाव देखे, वह दुनिया के लिए भारत का उत्साह और सकारात्मकता देखे।"
विदेश मंत्रालय में आम लोगों को शामिल करें
अपनी किताब के कंटेंट पर विदेश मंत्री ने कहा कि इतिहास से सबक लेकर हमें हमेशा दुनिया के प्रति जागरूक रहना होगा। उन्होंने कहा, मैंने अपने लेख के माध्यम से चेतावनी दी है कि वैश्वीकरण की कई कमियां हैं, जो अन्य देशों से सामने आने वाले परिणामों से स्पष्ट है।" जयशंकर ने विदेश नीति को केवल बाबुओं या विदेश सेवा कर्मियों के लिए न छोड़ने की भी सलाह दी और कहा कि कभी-कभी इसमें आम लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
दुनिया हमारे दरवाजे पर खड़ी है
बकौल विदेश मंत्री एस जयशंकर, "1980 और 1990 की विदेश नीति एक तरफ जा रही थी और देश एक तरफ। ऐसा नहीं होना चाहिए, आम लोगों को भी साथ लेना चाहिए। मैंने अपनी किताब में इस बारे में लिखा है।" उन्होंने भारत-चीन संबंधों के बारे में बात कहा, आज दुनिया हमारे दरवाजे पर खड़ी है और कहा कि अगर हमें आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाना है तो हमें घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना होगा, हम दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकते, इसलिए हमें लघु और मध्यम उद्योग (SME) का समर्थन करना होगा।
विदेश मंत्री यूक्रेन संकट पर क्या बोले ?
उन्होंने कहा, "इस बार 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड में अधिकांश हथियार भारत में बने थे और कुछ पुणे में भी बने थे।" यूक्रेन विवाद के कारण भारत पर दबाव के बारे में उन्होंने कहा, "पीएम मोदी बहुत स्पष्ट थे, उन्होंने कहा कि ऐसा होना चाहिए, यह भारत के हित में होना चाहिए, इसलिए मेरा काम प्रधानमंत्री की स्पष्टता के कारण आसान हो गया।" बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच करीब 10 महीने से संघर्ष जारी है। संघर्ष के दौरान हालात बिगड़ने पर भारत सरकार ने मेडिकल और दूसरे कोर्स में पढ़ने वाले हजारों छात्रों समेत भारतीय नागरिकों को स्वदेश लौटने में मदद की थी।












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