'ये कहां की इंसानियत? पहले पूछा नाम और फिर...', Train Shooting में सैफुद्दीन की मौत पर छलके चाचा के आंसू
जयपुर- मुंबई सुपरफास्ट ट्रेन में आरपीएफ जवान की गोलियों का शिकार हुए सैफुद्दीन का परिवार बिलख रहा है। रेलवे की ओर की गई 10 लाख रुपए की सहायता के बाद सैफुद्दीन के चाचा ने कहा कि इंसान की जान अनमोल है।
जयपुर- मुंबई सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन में सैफुद्दीन की हत्या के बाद वो भयानक मंजर उनके परिजन अब भी भूल नहीं पा रहे। परिवार के हर सदस्यों की हालत एक जैसी है। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा क्या कोई भी कर सकता है। एक मीडिया इंटरव्यू में आरपीएफ जवान की गोलियों की शिकार सैफुद्दीन के चाचा पाशा ने आंसू बहाते हुए कहा कि सरकार की ओर अब तक की गई मदद से इंसान की जान की कीमत की तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने ट्रेन में उस घटना की जिक्र करते हुए याद दिलाया कि आरपीएफ जवान ने किस प्रकार अमानवीयता दिखाई। पाशा ने कहा कि आरपीएफ जवान ने पहले भतीजे से उसका नाम पूछा, फिर गोली चला दी।
जयपुर से मुंबई सेंट्रल को जाने वाली जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन में इस हफ्ते सोमवार सुबह तीन यात्रियों की हत्या कर दी गई। आरपीएफ जवान ने यात्रियों पर उस वक्त फायरिंग कर दी जब ट्रेन मुंबई बोरीवली-मीरा रोड रेलवे स्टेशन पहुंची थी। इस दौरान बी-5 बोगी में आरपीएफ के कांस्टेबल चेतन ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोली लगने से हैदराबाद के सैफुद्दीन समेत कुल 4 यात्रियों की मौत हो गई।

फायरिंग करने वाले की पहचान RPF कॉन्स्टेबल चेतन एस्कॉर्ट ड्यूटी में तैनात था। फायरिंग करके वह ट्रेन से कूद गया. हालांकि, उसे मीरा रोड बोरीवली के बीच से हिरासत में ले लिया गया। फायरिंग की वजह सामने नहीं आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संभवत: कांस्टेबल चेतन की यात्रियों से कहासुनी के बाद ये घटना हुई।
सैफुद्दीन था खर्च उठाने वाला अकेला सदस्य
सैफुद्दीन के भाई युनिस कहते हैं कि उसका भाई छह सदस्यों को परिवार का खर्च चलाने वाला अकेला था। परिवार में भाई-बहन, मृतक की पत्नी और उनकी तीन बेटियां हैं। सैफुद्दीन तेलंगाना के नामपल्ली जिले के बाजार घाट इलाके के निवासी था। सैफुद्दीन परिवार का खर्च उठाने के लिए हैदराबाद के गुजराती गली-कोटी में एक मोबाइल रिपेयर का काम करते थे।
'सैफुद्दीन पर आतंकी हमला'
सैफुद्दीन के चाचा पाशा ने भतीजे पर फायरिंग का घटना की तुलना आतंकी हमले से की। उन्होंने कहा की जब वो अपने सेठ के साथ ट्रेन में सफर कर रहा था, तो ये घटना सैफुद्दीन के साथ ही क्यों हुई। चाचा पाशा ने कहा कि आरोपी आरपीएफ जवान ने सैफुद्दीन की हत्या करने से पहले उनका नाम पूछा था। ये कहते हुए पाशा का गला रुंध जाता और आंख में आसू आ जाते हैं कि ये हमला उनके परिवार के लिए किसी आतंकी हमले से कम नहीं है।
'मुआवजा हो 5 करोड़, पत्नी को मिले नौकरी'
सैफुद्दीन की पत्नी के खाते में इस हफ्ते सोमवार को रेलवे ने 10 लाख रुपए जमा करा दिए हैं। लेकिन मृतक के चाचा मोहम्मद वाजिद पाशा इससे संतुष्ट नहीं है। उन्होंने तेलंगाना सरकार से मुआवजा बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने, उनकी बेटियों की शिक्षा में मदद करने और उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। पाशा ने कहा, "10 लाख रुपये पर्याप्त नहीं हैं। भतीजे के जाने से जो गम परिवार को मिला है, वो दूर नहीं हो सकता। वह अपने पीछे तीन छोटी-छोटी बेटियां छोड़ गए हैं। कोई मेरे भतीजे को वापस नहीं ला सकता लेकिन कम से कम वे उसके परिवार की भलाई तो सुनिश्चित कर ही सकते हैं।"












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