जेल में कैद व्यक्ति भी लड़ सकते है चुनाव: चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को यह स्पष्टीकरण भेजा है। इस आदेश के साथ ही 1951 की धारा 62 की उपधारा (5) में एक और प्रावधान जोड़ा गया है। जिसके मुताबिक यदि कोई व्यक्ति, जो मतदाता सूची में दर्ज है किसी जेल अथवा पुलिस की कानूनी हिरासत में है, तो वह मतदाता बना रहेगा, भले ही संबद्ध उप धारा के तहत उसके मतदान पर रोक हो।
गौरतलब है कि इससे पहले जनप्रतिनिधित्व (संशोधन और वैधता) कानून, 2013 को संसद के मानूसन सत्र में पारित किया गया, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे निरस्त कर दिया और कहा कि जेल में कैद कोई व्यक्ति मतदाता नहीं रह जाता इसलिए वह न तो वोट डाल सकता है और न ही चुनाव लड़ सकता है।जिसके बाद अब चुनाव आयोग ने कहा कि धारा 62 (5) के संशोधन को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जेल अथवा पुलिस हिरासत में बंद किसी व्यक्ति की चुनाव लड़ने की योग्यता पर कोई असर नहीं होगा।












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