WHO:गरीब देशों के लिए 'घर पर रहें' कहना अव्यवहारिक, लॉकडाउन हटाने की 6 शर्तें बताईं
नई दिल्ली- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस की वजह से लगाई गई पाबंदियों और लॉकडाउन खत्म करने को लेकर दुनिया भर के देशों के लिए कुछ गाइडलाइंस जारी किए हैं। संगठन ने कहा है कि लॉकडाउन हटाने वाले और लॉकडाउन लगाने वाले सभी तरह के देशों को उसकी गाइडलाइंस को ध्यान में जरूर रखना चाहिए। इसके मुताबिक हर परिस्थिति में नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रॉस एधानोम घेब्रेयेसस ने सारे गरीब देशों को लॉकडाउन के प्रति आगाह किया है। उनका कहना है कि वे गरीब देश जहां आबादी भी ज्यादा है, उनके लिए अपने देश के गरीब नागरिकों से घर पर ही रहने को कहने से पहले उनके मूलभूत मानवाधिकारों पर जरूर गौर कर लेना चाहिए।

नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना सबसे अहम- डब्ल्यूएचओ
कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए दुनिया के कई देशों ने इस वक्त पूरी तरह से लॉकडाउन लगा रखा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऐसे देशों के लिए मंगलवार को एक विस्तृत गाइडलाइंस जारी की है। गाइडलाइंस जारी करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन कहा है कि आज की तारीख में दुनिया के कई देश अब अपने देशों में लगाई गई पाबंदियों को हटाने की सोच रहे हैं तो कई देश ये सोच रहे हैं कि इसे कब और कैसे लगाएं। इसको लेकर संगठन ने कहा है कि दोनों ही स्थिति में दो बातों को जरूर ध्यान में रखना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण ये है कि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना, जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि हम इस वायरस के बारे में कितना समझते हैं और वह कैसे बर्ताव करता है। इसने कहा है, 'हम जानते हैं कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर यह वायरस आसानी से फैल सकता है जैसे कि नर्सिंग होम्स में। हम जानते हैं कि केस का जल्दी पता लगाना, जांच करना, केस को आइसोलेशन में रखकर उसपर नजर रखना और इसके फैलाव को रोकने के लिए हर संपर्क का पता लगाना।' डब्ल्यूएचओ ने लॉकडाउन जैसी पाबंदियों को हटाने के बारे में भी गाइडलाइंस दिए हैं। इसके मुताबिक पाबंदियां धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से ही हटाई जानी चाहिए। अचानक तो बिल्कुल नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह भी कहा है कि लॉकडाउन जैसे उपाय तभी खत्म होने चाहिए, जब स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ट्रैक पर हों।

गरीबों को घर पर रहने को कहना अव्यवहारिक- टेड्रॉस
इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रॉस एधानोम घेब्रेयेसस ने कहा है कि कई देशों ने आवाजाही पर पहले से ही सख्ती लगा रखी है, लेकिन कुछ मध्यम-आय वाले अफ्रीकी, एशियाई और लैटिन अमेरिकी देश भी आवाजाही पर रोक लगाने पर विचार कर रहे हैं। उनके मुताबिक ज्यादा आय और कम आबादी वाले देशों ने जो लोगों को 'घर पर रहें' कहा है, वही उपाय ज्यादा आबादी वाले गरीब देशों के लिए अपनाना सही नहीं है। उन्होंने कहा है, 'बहुत सारे गरीब, प्रवासी और शरणार्थी पहले से ही भीड़भाड़ वाली स्थिति में रह रहे हैं, उनके पास ज्यादा सुविधाएं भी नहीं हैं और न ही स्वास्थ्य सुविधाओं तक उनकी ज्यादा पहुंच ही है। जब आप खाने के लिए दैनिक मजदरी के भरोसे रहते हैं तो लॉकडाउन में कैसे जी सकते है?' विश्व स्वास्थ्य संगठन के जिस महानिदेशक पर अमेरिका कोरोना वायरस के संक्रमण की असल स्थिति छिपाने को लेकर चीन से साठगांठ का आरोप लगा रहा है, उनका कहना है कि दुनिया के देशों को अपने गरीब नागरिकों और खासकर सबसे कमजोर तबकों को 'घर पर रहने' के लिए मजबूर करके उनके मूलभूत मानवाधिकारों के साथ समझौता नहीं करना चाहिए।

लॉकडाउन हटाने के डब्ल्यूएचओ की 6 शर्तें
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर के देशों को अपने नागरिकों पर कोरोना वायरस महामारी की वजह से लगाई गई पाबंदियों से राहत देने के लिए 6 तरह की शर्तें बताई हैं:-
- वायरस का फैलाव नियंत्रित है
- स्वास्थ्य व्यवस्था हर मामले का पता लगाने, जांच करने, आइसोलेट करने और हर केस के इलाज और उनके संपर्क की तलाश करने में सक्षम है
- स्वास्थ्य सुविधाएं और नर्सिंग होम जैसी विशेष व्यवस्थाओं में प्रकोप के जोखिमों को कम किया जा सकता है
- कार्यस्थलों, स्कूलों और दूसरी जगहों पर जहां लोग निश्चित तौर पर पहुंचेंगे, वहां एहतियाती कदम उठाए जा चुके हैं
- बाहर से आने वाले जोखिमों को मैनेज किया जा सकता है
- लोग पूरी तरह से शिक्षित, इस विषय से जुड़े हुए और नए मानदंडों के साथ एडजस्ट करने के लिए सशक्त हैं।

लॉकडाउन में है दुनिया की 260 करोड़ से ज्यादा आबादी
इस समय भारत समेत पूरी दुनिया में 260 करोड़ से ज्यादा लोग अपने घरों में लॉकडाउन की वजह से आंशिक या पूर्ण रूप से बंद हैं। इस दौरान सरकारें कोरोना वायरस के संक्रमण के चेन को नियंत्रित करके इसके इलाज के लिए अपने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने में जुटी है, ताकि अगर मरीजों की तादाद बहुत ज्यादा बढ़े तो उन सबको बेहतर इलाज दिया जा सके। साथ ही साथ इसकी वजह से संक्रमण की गति में भी कमी आने का भरोसा है। बता दें कि बहुत ही तेजी से फैल रहा या सांस संबंधी वायरल इंफेक्शन दुनिया भर में करीब 25 लाख लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है और सवा लाख से ज्यादा लोगों की इसके चलते मौत हो चुकी है।












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