चंद्रयान-3: वो महिला वैज्ञानिक, जिन्होंने 'विक्रम' को लैंड करवाने में निभाई अहम भूमिका
इसरो के चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने बुधवार शाम को चांद की सतह पर टचडाउन किया। इसके साथ ही वहां मौजूद दो महिला वैज्ञानिकों की आंखों से आंसू निकल आए। जिनका नाम रिंकू अग्रवाल और हर्षिता तोलानी है। दोनों चंद्रयान-3 मिशन के माइक्रोवेव रिमोट सेंसिंग एरिया (एमआरएसए) से जुड़ी हैं।
एमआरएसए के पास चांद की सतह को छोटे ग्रिडों में परिवर्तित करने और इसे पूरी तरह से मैप करने का काम था, ताकि लैंडर लैंडिंग साइट की पहचान सही से कर सके। इसके अलावा उसके नीचे कोई बड़ा गड्ढा या फिर उबड़खाबड़ जमीन ना आए। उसने अपना काम बखूबी किया, जिस वजह से विक्रम ने सॉफ्ट लैंडिंग की।

इस मिशन से उत्साहित हर्षिता तोलानी ने कहा कि हमें इस बात में कोई संदेह नहीं था कि लैंडिंग सही तरीके से होने वाली थी। हम बस एक-दूसरे को आश्वस्त करते रहे कि ये बिल्कुल ठीक होगी। हमारे लिए भी ये गर्व का पल था। टीम के रूप में हमने कड़ी मेहनत की और वो सफल भी रही।
इन दोनों के अलावा भी कई महिला वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट में अहम भूमिका निभाई। उनकी तरह ही महिला वैज्ञानिक माधवी ठाकरे ने सेंसर डेवलपमेंट एरिया (एसडीए), कैमरों सहित खतरे का पता लगाने और बचाव (एचडीए) सॉफ्टवेयर सिस्टम पर काम किया। जिसने टचडाउन प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि जब स्क्रीन पर ये पूरी प्रक्रिया दिखाई जा रही थी, तो काफी खुशी हुई। लैंडर को सही से काम करता देख वो लोग उत्साहित थे। उन्होंने लैंडर की विभिन्न चमक को ध्यान में रखते हुए कैमरों पर बड़े पैमाने पर काम किया। इस तरह श्वेता किरकिरे और जलश्री देसाई ने लैंडर पोजिशन डिटेक्शन कैमरा (एलपीडीसी) पर काम किया, जो लैंडर की आंखें थीं। उनकी टीम भी सफलता से काफी उत्साहित है।
सेंसर पर सबसे ज्यादा काम
चंद्रयान-2 मिशन सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान फेल हो गया था। ऐसे में इस बार सबसे ज्यादा फोकस सेंसर्स पर था, ताकि यान तय पथ पर उतरे और उसके नीचे गड्ढे ना आएं।












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