ISRO जासूसी केस: नंबी नारायण मामले में केरल पुलिस के पूर्व अफसरों के खिलाफ CBI ने दर्ज की FIR

नई दिल्ली, जुलाई 26। इसरो (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दिए हैं। दरअसल, सीबीआई ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि 1994 के जासूसी मामले में केरल के विभिन्न अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

CBI

जांच की सीलबंद कॉपी सुप्रीम कोर्ट को सौंपी

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच पूरी करके कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सीबीआई ने न्यायमूर्ति डीके जैन समिति के निष्कर्षों के आधार पर FIR दर्ज की है। इसके बाद, सोमवार को जांच एजेंसी ने इस संबंध में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट की सीलबंद कॉपी सुप्रीम कोर्ट को सौंपी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि सीबीआई न्यायमूर्ति डीके जैन समिति के निष्कर्षों को अपनी FIR का आधार नहीं बना सकती है। ऐसे में एजेंसी को कानून के अनुसार स्वतंत्र जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया।

जस्टिस डीके जैन कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब FIR के बाद सीबीआई अपनी जांच शुरु करे और आरोपियों के खिलाफ कानूनी रूप से एक्शन ले। ये कार्रवाई अपनी FIR और जांच के आधार पर होनी चाहिए, जस्टिस डीके जैन कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नहीं। कोर्ट ने कहा कि आगे यह भी कहा कि आरोपियों के पास भी कानून के मुताबिक उपाय हैं, वो चाहे तो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

क्या है पूरा मामला?

- आपको बता दें कि 1994 में, डॉ एस नंबी नारायणन, जो उस समय भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) क्रायोजेनिक्स डिवीजन के प्रमुख थे, पर विदेशी एजेंटों को भारत के अंतरिक्ष विकास से संबंधित गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप लगाया गया था। नंबी नारायणन और मालदीव की दो महिलाओं सहित पांच अन्य पर विदेशी एजेंटों को लाखों में गोपनीय "उड़ान परीक्षण डेटा" बेचने का आरोप लगाया गया था।

- इसके बाद नंबी नाराणयम को नवंबर 1994 में गिरफ्तार किया गया। हालांकि, सीबीआई ने अपनी जांच के बाद आरोप लगाया कि केरल में तत्कालीन शीर्ष पुलिस अधिकारी नंबी नारायणन की अवैध गिरफ्तारी के लिए जिम्मेदार थे। 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके खिलाफ लगे आरोपों को खारिज कर दिया।

- सितंबर 2018 में, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायमूर्ति डीके जैन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पैनल नियुक्त किया, और केरल सरकार को नंबी नारायणन का "बेहद अपमान" के लिए मजबूर करने के लिए मुआवजे के रूप में 50 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

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